लेखक परिचय

मोतीलाल

मोतीलाल

जन्म - 08.12.1962 शिक्षा - बीए. राँची विश्वविद्यालय । संप्रति - भारतीय रेल सेवा में कार्यरत । प्रकाशन - देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं लगभग 200 कविताएँ प्रकाशित यथा - गगनांचल, भाषा, साक्ष्य, मधुमति, अक्षरपर्व, तेवर, संदर्श, संवेद, अभिनव कदम, अलाव, आशय, पाठ, प्रसंग, बया, देशज, अक्षरा, साक्षात्कार, प्रेरणा, लोकमत, राजस्थान पत्रिका, हिन्दुस्तान, प्रभातखबर, नवज्योति, जनसत्ता, भास्कर आदि । मराठी में कुछ कविताएँ अनुदित । इप्टा से जुड़ाव । संपर्क - विद्युत लोको शेड, बंडामुंडा राउरकेला - 770032 ओडिशा

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कितना अच्छा होता कि

हवा अपनी ही दुनिया में बहती

न वह आँधी का रुप लेती

न ही कोई घर बेघर हो पाता ।

 

कितना अच्छा होता कि

नदी अपने में शांत बहती

न बाढ़ का रुप धरती

न किसी को अनाथ होना होता ।

 

कितना अच्छा होता कि

धरती अपने में मस्त रहती

न वह कभी भी हिलती

न भयानक भूकम्प हमें झेलना पड़ता ।

 

कितना अच्छा होता कि

लोग अपनी ही दुनिया में रहते

न किसी को टंगड़ी मारते

न किसी के फटे में टांग अड़ाते ।

 

कितना अच्छा होता कि

अच्छा हमेशा अच्छा होता

यही बात तो नहीं होती है

और अघटित हमें झेलना पड़ता है ।

 

मोतीलालchild-in-a-trolley

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1 Comment on "कविता – कितना अच्छा होता"

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manu
Guest

आपका कदम काबिल-अ-तारीफ ह .अगर आप संस्कृत जैसे सब्जेक्ट को भी जगह देते तो अच्छा होता

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