लेखक परिचय

शकुन्तला बहादुर

शकुन्तला बहादुर

भारत में उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्मी शकुन्तला बहादुर लखनऊ विश्वविद्यालय तथा उसके महिला परास्नातक महाविद्यालय में ३७वर्षों तक संस्कृतप्रवक्ता,विभागाध्यक्षा रहकर प्राचार्या पद से अवकाशप्राप्त । इसी बीच जर्मनी के ट्यूबिंगेन विश्वविद्यालय में जर्मन एकेडेमिक एक्सचेंज सर्विस की फ़ेलोशिप पर जर्मनी में दो वर्षों तक शोधकार्य एवं वहीं हिन्दी,संस्कृत का शिक्षण भी। यूरोप एवं अमेरिका की साहित्यिक गोष्ठियों में प्रतिभागिता । अभी तक दो काव्य कृतियाँ, तीन गद्य की( ललित निबन्ध, संस्मरण)पुस्तकें प्रकाशित। भारत एवं अमेरिका की विभिन्न पत्रिकाओं में कविताएँ एवं लेख प्रकाशित । दोनों देशों की प्रमुख हिन्दी एवं संस्कृत की संस्थाओं से सम्बद्ध । सम्प्रति विगत १८ वर्षों से कैलिफ़ोर्निया में निवास ।

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राम-रहीम में भेद न माना , सब धर्मों को दिया था मान ।
पढ़ते थे क़ुरान , और मन में , रहता था गीता का ज्ञान ।।
पले अभावों में थे लेकिन, सन्तोषी वे रहे सदा ।
विघ्नों से वे जूझजूझ कर, आगे बढ़ते रहे सदा ।।
जीवन भर ब्रह्मचर्य का पालन, किया उन्होंने ज्ञानी बन ।
थे निष्काम कर्मयोगी वे , लोभ नहीं था उनके मन ।।
बड़ी विलक्षण बुद्धि मिली थी , अद्भुत थी प्रतिभा उनकी ।
आस्था और विश्वास से जीती , मनोकामना भी सबकी ।।
लगन लगी थी उनके मन में, दृढ़-संकल्प लिया जीवन में ।
पीछे मुड़ कर कभी न देखा, बने मार्गदर्शक जन-जन में ।।
कर्मठ रहकर करी साधना, विज्ञान को उच्च शिखर पहुँचाया ।
अन्तरिक्ष में यान भेज कर, भारत को गौरव दिलवाया ।।
त्याग-तपस्यामय जीवन था, निश्छल से थे उच्च विचार ।
बने राष्ट्रपति भारत के पर, जन-जन से था उनको प्यार ।।
मन में था अभिमान नहीं , वे वर्चस्वी थे और मनस्वी ।
“भारतरत्न” से हुए अलंकृत, रहे जगत में परम यशस्वी ।।
आज अचानक चले गए वे , छोड़ हमें बीच मँझधार ।
उनका सा अब कहाँ मिलेगा ? सब मानें उनका आभार ।।
ब्रह्मलीन हो गए आज वे , फिर से उनको पड़ेगा आना ।
युग-युग याद रहेगा उनका ,भारत को सन्मार्ग दिखाना ।।
है सलाम तुमको “कलाम “, तुम तो भारत के गौरव थे ।
चिर-शान्ति मिले तव आत्मा को , तुम ही तो सच्चे मानव थे ।।
शकुन्तला बहादुर

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3 Comments on "भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित श्रद्धासुमन"

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डॉ. मधुसूदन
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डॉ. मधुसूदन

आज अचानक चले गए वे , छोड़ हमें बीच मँझधार ।
उनका सा अब कहाँ मिलेगा ? सब मानें उनका आभार ।।
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है सलाम तुमको “कलाम “, तुम तो भारत के गौरव थे ।
चिर-शान्ति मिले तव आत्मा को , तुम ही तो सच्चे मानव थे ।।
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Aadaraniya -Shrimati – Shakuntala ji
-Covering all aspects of Dr.
Kalam’s character,
you have tackled a difficult
task in a comprehensive poem.
Abhinandan.

बी एन गोयल
Guest
बी एन गोयल

अति सुन्दर – वास्तव में आज के जनक – विदेह एक निस्पृह व्यक्तित्व

Mahipal Ghemawat
Guest

Poem by Shakuntala Bahadur is excellent but KALAMJI is much beyond then that!

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