लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

Posted On by &filed under कविता, महत्वपूर्ण लेख.


वैसे तो चमत्कार हुये हैं कई बार !

कई बार तर्क को नियमों ने तोड़ा है।

पर अब की बार, जो हुआ चमत्कार !

उस ने सारी सीमाओं को लांघा है।

हवा चलने से, पत्ते न हिले पेड़ों के,

पत्तें हिलने से, चली है आँधी।

अच्छा ?

भूचाल आने से, न गिरा मकान-

पर मकान गिरने से, आया है भूचाल।

हाँ ?

कौन सी तर्क की किताब में पढ़े हो?

कि प्रतिक्रिया को, क्रिया का कारण बताते हो?

गोधरा में रेल जली,

कारण ?

हिन्दू का प्रतिकार?

अरे सेक्य़ुलर पागलों,

मूरख सरदार बावलों।

ये तो बताओ,

कि घोड़ा बग्गी को खींचता है?

या घोड़े को धक्का मारती है बग्गी?

कठिन प्रश्न है।

ठीक सोच कर बताओ।

रेल जली ना होती,

तो दंगा होता ?

Leave a Reply

11 Comments on "डॉ. मधुसूदन की कविता : घोडे़ को धक्का मारती है बग्गी ?"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
peter
Guest

हमारे भारतमें ही ऐसा होता है की निर्दोष को सताने के लिए कानून का उपयौग किया जाता है और दोषी को कनुनका ढाल मिलता है. पुरे देश को बेच डाला उसको हमारे होम मिनिस्टर कुछ नहीं कह सकते लेकिन निर्दोष को दोषी बताने के लिए हमारे दोग्विजय जी कुछ भी कह सकते है. तिन चार हज़ार सालओ का राम मंदिर को गिराके मुसलमान उनके उपर ढाचा बना सकते है लेकिन हिन्दू तिनसो साल पुराना उस ढांचे को गिरा के अपना राम मंदिर को फिर स्व नहीं बना सकते.
ऐसा है हमारे देश का न्याय!

डॉ. प्रतिभा सक्‍सेना
Guest

जिस सच्चाई का निरूपण आपने किया है , उसे विरूप कर सामने लाया जाता रहा है .ऐसा एक बार नहीं अनेक बार हुआ है .बिना तथ्यों को जाने ,केवल बनाई हुई बातों से बहकाने की कोशिश करना ,बहुत गलत नीति है .इससे विश्वास टूटता है और कटुता ही बढ़ती है .

dr dhanakar thakur
Guest

रेल जलना और दंगा होना दोनों ही दुर्भाग्य पूर्ण
दोनों में ही निरपराध मरे और यह हमारी हिन्दू संस्कृति के अनुरूप नहीं है
पर जो कुछ १००० साल से हिन्दुओं के विरुद्ध होता रहा है इस्लामिक लुटेरों के द्वारा वह भी उतना ही ख़राब है -संगठित हिन्दू समाज हे ऊसका उत्तर है

डॉ. मधुसूदन
Guest

बुद्धिमान पाठकों—-
आप सभी प्रबुद्ध पाठक हो, बुद्धिमान हो। आप पारदर्शी मानसिकता को भी समझते ही हो।

जब कोइ पाठक कुछ लिखता है, तो वह जिस विषय पर प्रकाश डालता है, कभी कभी, उस से भी अधिक, स्वयं की मानसिकता पर भी कुछ किरणें तो अवश्य बिखेरता है।
हर ऐसे पाठक को महत्त्व देना, ना देना, आपका अधिकार है।

डॉ. मधुसूदन
Guest

कठिन प्रश्न टाल गए, आप?

wpDiscuz