लेखक परिचय

जावेद उस्मानी

जावेद उस्मानी

कवि, गज़लकार, स्वतंत्र लेखक, टिप्पणीकार संपर्क : 9406085959

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-जावेद उस्मानी-

दमन की हवा से ही इक दिन, दहकेंगे श्रम के शोले!
हक़ के अंगार से, दफनाये जायेंगे शोषण के गोले!
अब भी सुन लो शोषकों, बर्के जिहिंद क्या बोले!
इक कौंध में लपक लेने को, अंजाम खड़ा मुंह खोले!
वे अपने दम पर लड़ते आये हैं, ताक़तवर से हर युग में!
मगर ज़माना उनकी हिम्मत को, सदा कम ही तोले!
जो हमारे ही लिए जिए और मरे, उन के हक़ की खातिर!
साथ चलें सब मिल कर, जब श्रमवीर हल्ला बोले!

{बर्के जिहिंद= तड़पने वाली बिजली}

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