कविता : प्रशासन और दु:शासन

 मिलन सिन्हा

जनता आज

द्रौपदी बन गयी है

पांडवों  की ईमानदारी

कल की बात हो गयी है

कृष्ण का अता-पता नहीं

गलत को ही लोग

कह रहे हैं सही

द्रौपदी का है बुरा हाल

फैला है चारों ओर

छल -प्रपंच का जाल

प्रशासन के कारनामे

हैं  कमाल, बेमिसाल

दु:शासन का

बढ़ रहा अत्याचार

जिधर देखो, मिलेगा

उसी के चाटुकार

और उसी का दलाल

हो रहा है वह निरंतर

निरंकुश एवं मालामाल !

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