लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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श्यामल सुमन

 

विश्व बना है ग्राम देखिये

है साजिश, परिणाम देखिये

 

होती खुद की जहाँ जरूरत

छू कर पैर प्रणाम देखिये

 

सेवक ही शासक बन बैठा

पिसता रोज अवाम देखिये

 

दिखते हैं गद्दी पर कोई

किसके हाथ लगाम देखिये

 

और कमण्डल चोर हाथ में

लिए तपस्वी जाम देखिये

 

बीते कल के अखबारों सा

रिश्तों का अन्जाम देखिये

 

वफा, मुहब्बत भी बाजारू

मुस्कानों का दाम देखिये

 

धीरे धीरे देश के अन्दर

सुलग रहा संग्राम देखिये

 

चाह सुमन की पुरी में अल्ला

और काबा में राम देखिये

 

 

 

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3 Comments on "कविता ; और काबा में राम देखिये"

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डॉ. मधुसूदन
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भाई बाकी छोडो —अयोध्या में कम से कम राम देखो ना?
हिन्दू तो पहले से ||एकं सत विप्रः बहुधा वदन्ति ||
कहते आया है|
जिसके पास ३३ कोटि देवता है, उसमें और एक से कोई अंतर नहीं पड़नेवाला|

razzak shaikh
Guest

sadhe hue shabdom men vastav tasweer

Lokesh Kumar Joshi
Guest

अति सुंदर |

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