लेखक परिचय

मोतीलाल

मोतीलाल

जन्म - 08.12.1962 शिक्षा - बीए. राँची विश्वविद्यालय । संप्रति - भारतीय रेल सेवा में कार्यरत । प्रकाशन - देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं लगभग 200 कविताएँ प्रकाशित यथा - गगनांचल, भाषा, साक्ष्य, मधुमति, अक्षरपर्व, तेवर, संदर्श, संवेद, अभिनव कदम, अलाव, आशय, पाठ, प्रसंग, बया, देशज, अक्षरा, साक्षात्कार, प्रेरणा, लोकमत, राजस्थान पत्रिका, हिन्दुस्तान, प्रभातखबर, नवज्योति, जनसत्ता, भास्कर आदि । मराठी में कुछ कविताएँ अनुदित । इप्टा से जुड़ाव । संपर्क - विद्युत लोको शेड, बंडामुंडा राउरकेला - 770032 ओडिशा

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रोशनी का बुरा दिन

देखने योग्य बची कहाँ है

कि खिझा हुआ अँधकार

अपने लंबे नाखूनोँ वाले पंजे फैलाकर चपेट ले सारी रोशनियोँ को

और कोई त्रासद संगीत

नेपथ्य मेँ बज उठे

तब क्या

देखने योग्य चीजेँ

बाजार मेँ उतारे जाएगेँ

और क्या सुलाए जा सकेगेँ

चीखते हुए बच्चोँ को

खामोश पलोँ मेँ

 

रोशनी का बुरा दिन

महानगर की चिकनी सड़कोँ पर

और पंच सितारा के डाँस फ्लोर मेँ

मैने कभी भी नहीँ देखा

 

हाँ बस स्टेण्ड के पड़ाव मेँ

जाँघ उघारे लोगोँ को

सोते जरुर देखे हैँ

और हैसियत की टोपी मेँ

कुछ स्कार्फ भी उड़े हैँ

उस चाँदनी रात मेँ

जब पीली रोशनी को

मारुति के अन्दर खदबदाते हुए देखा

 

उस समय मेरी समझ

गैर और रिश्तोँ के भटकाव मेँ

कहीँ भी भटकने को तैयार न था

और वही हुआ

कि वह बुरा दिन

रोशनी से चौँधियाता रहा

पर रोशनी का बुरा दिन

कभी भी प्रकट नहीँ हुआ

यही मेरा सबसे बुरा दिन था

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