लेखक परिचय

लीना

लीना

पटना, बिहार में जन्‍म। राजनीतिशास्‍त्र से स्‍नातकोत्तर एवं पत्रकारिता से पीजी डिप्‍लोमा। 2000-02 तक दैनिक हिन्‍दुस्‍तान, पटना में कार्य करते हुए रिपोर्टिंग, संपादन व पेज बनाने का अनुभव, 1997 से हिन्‍दुस्‍तान, राष्‍ट्रीय सहारा, पंजाब केसरी, आउटलुक हिंदी इत्‍यादि राष्‍ट्रीय व क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रिपोर्ट, खबरें व फीचर प्रकाशित। आकाशवाणी: पटना व कोहिमा से वार्ता, कविता प्र‍सारित। संप्रति: संपादक- ई-पत्रिका ’मीडियामोरचा’ और बढ़ते कदम। संप्रति: संपादक- ई-पत्रिका 'मीडियामोरचा' और ग्रामीण परिवेश पर आधारित पटना से प्रकाशित पत्रिका 'गांव समाज' में समाचार संपादक।

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विभूति राय प्रकरण की नजर एक छोटी सी कविता

-लीना

धिक्कार

थू- थू की हमने

थू- थू की तुमने

जिसे मिला मौका

गाली दी उसने

ऐसे संस्कारहीनों को

हटाओ

नजर से गिराओ।

पर धिक्कारते धिक्कारते

भूल गए हम

अपनी भी धिक्कार में

वैसी ही भाषा है

वैसे ही संस्कार

जिसके लिए तब से

उगल रहे थे अंगार।।

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4 Comments on "कविता : धिक्कार"

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Rahul Telrandhe, MAHARASHTRA
Guest
Rahul Telrandhe, MAHARASHTRA

vP<h jpuk gS

Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
Guest
Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
आदरणीय लीना जी, नमस्कार। हमारे समाज में यथार्थपकर सोच का अभाव या आदर्शवादी सोच की नाटकीयता बहुत सारी सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं का कारण है। बल्कि यह कहना अधिक उपयुक्त होगा कि मानवी की बहुत सारी समस्याएँ इसी के कारण हैं। हमें बचपन से ही आदर्श, बल्कि खोखले आदर्श घुट्टी में पिलाये गये हैं। ऐसे खोखले आदर्श जिन्हें बहुत कम उम्र में ही; हमने अनेकों बार धडाम से टूटते और बिखरते हुए देखा है और साथ ही साथ ऐसे खोखले आदर्शों को जाने-अनजाने तोडने वालों के विरुद्ध, विशेषकर उन लोगों को आग उगलते भी देखा है, जिनके स्वयं के कोई… Read more »
vijayprakash
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बहुत बढ़िया

श्रीराम तिवारी
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दुरस्त फ़रमाया आपने ;कतिपय छपास पिपासुओं की छप्प लोल्लुप्ता में आकंठ डूबी बिलम्बित अतृप्त आकांक्षा को उद्दीपित करने में विभुतिनारायण की खलनायकी सफल रही .लीना की कविता अच्छी है .कविता को और कलात्मक रूप दिए जाने की गुन्जाईस है .

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