लेखक परिचय

पन्नालाल शर्मा

पन्नालाल शर्मा

शिमला विश्वविदयालय, हि.प्र. से हिन्दी में स्नातकोतर तथा पत्रकारिता व जनसंचार में डिप्लोमा व स्नातकोतर। हिमाचल के विभिन्न दैनिक व साप्ताहिक समाचार पत्र पत्रिकाओं में लेख व कविताएं आदि प्रकाशित | सम्पर्क का पता: मांगा निवास ,ईस्ट ब्यू , छोटा शिमला हि.प्र. पिन – 171002

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उस शहर का मौसम कैसे सुहाना लगे,

बारिश समय पर न हो,

उगती फसल बर्बाद होने लगे,

बढ रहे कंकरीट के जंगल वहां,

फिर मौसम क्यों न गर्माने लगे।

बदले जब मौसम तकदीर का,

आंधी आए व आए तूफान,

दीबार तब किस्मत की ढहने लगे।

उस शहर का मौसम कैसे सुहाना लगे।

औरों की तो बात क्या?

अपने भी बेगाने लगे।

जीते हैं लोग पैसे के लिए जहां,

मरने वालों के भले प्राण जाने लगे।

उस शहर का मौसम कैसे सुहाना लगे।

-पन्नालाल शर्मा

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4 Comments on "कविता:उस शहर का मौसम कैसे सुहाना लगे"

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SANJAY KUMAR FARWAHA
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AAP NAY SACH LEKHA HAI VERY GOOD KEEP IT UP

श्रीराम तिवारी
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यह मानवीय सर्रोकारों को शब्दों में अभ्व्यक्त करने की ओर का आगाज है .बधाई .

Sh. Tiwari Sahib & deepak ji
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hausla afsai ke liye dhanyabad.by Panna Lal Sharma

deepak.mystical
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शर्मा जी, अच्छी कविता लिखी है आपने.

साधुवाद.

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