लेखक परिचय

विजय कुमार सप्पाती

विजय कुमार सप्पाती

मेरा नाम विजय कुमार है और हैदराबाद में रहता हूँ और वर्तमान में एक कंपनी में मैं Sr.General Manager- Marketing & Sales के पद पर कार्यरत हूँ.मुझे कविताये और कहानियां लिखने का शौक है , तथा मैंने करीब २५० कवितायें, नज्में और कुछ कहानियां लिखी है

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मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे !

तेरे बिन कोई नहीं मेरा रे ; हे श्याम मेरे !!

मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे !

 

तेरी बंसुरिया की तान बुलाये मोहे

सब द्वारे छोड़कर चाहूं सिर्फ तोहे

तू ही तो है सब कुछ रे , हे श्याम मेरे !

मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे !

 

मेरे नैनो में बस तेरी ही तो एक मूरत है

सावंरा रंग लिए तेरी ही मोहनी सूरत है

तू ही तो एक युगपुरुष रे ,हे श्याम मेरे !

मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे !

 

बावरी बन फिरू , मैं जग भर रे कृष्णा

गिरधर नागर कहकर पुकारूँ तुझे कृष्णा

कैसा जादू है तुने डाला रे , हे श्याम मेरे !

मैं तो तेरी जोगन रे ;हे घनश्याम मेरे !

 

प्रेम पथ ,ऐसा कठिन बनाया ; मेरे सजना

पग पग जीवन दुखो से भरा ; मेरे सजना

कैसे मैं तुझसे मिल पाऊं रे , हे श्याम मेरे !

मैं तो तेरी जोगन रे ; हे घनश्याम मेरे !

 

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1 Comment on "कविता:जोगन-विजय कुमार"

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लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
Guest

भाव -भक्ति से भरी प्रेम कविता बहुत प्यारा लगा …

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