लेखक परिचय

शिखा वार्ष्‍णेय

शिखा वार्ष्‍णेय

लंदन(यूके) निवासी स्‍वतंत्र पत्रकार-लेखिका।

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-शिखा वार्ष्‍णेय

भूखे नंगों का देश है भारत, खोखली महाशक्ति है , कश्मीर से अलग हो जाना चाहिए उसे .और भी ना जाने क्या क्या विष वमन…पर क्या ये विष वमन अपने ही नागरिक द्वारा भारत के अलावा कोई और देश बर्दाश्त करता ? क्या भारत जैसे लोकतंत्र को गाली देने वाले कहीं भी किसी भी और लोकतंत्र में रहकर उसी को गालियाँ दे पाते?.वाह क्या खूब उपयोग किया जा रहा है अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों का……

हाँ हम काबिल हैं कितने

कुछ इस तरह दिखायें

उसी लोकतंत्र का ले सहारा

गाली उसी को दिए जायें

ले औजार भूखे नंगों का

अंग-अंग देश के चलो काटें

बैठ आलीशान कमरों में

सुलगता मुद्दा कोई उठाएं

अपनी ही व्यवस्था को कर नंगा

पुरस्कार कई फिर पा जायें

हो क्यों ना जाये टुकड़े देश के

अपनी झोली तो हम भर पाएं

उठा सोने की कलम हाथ में

चलो हम अरुंधती राय बन जायें

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13 Comments on "कविता : चलो अरुंधती राय बन जाएँ"

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APURV
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भारत में ऐसे लोगों की कमी नही है जो जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। ऐसे लोगों को सङक पर खङा कर गोली मार दी जाए तो भी कम है। इन लोगो को आईना दिखाने के लिए यह कविता अच्छा प्रयास है।

Ashwani Garg
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A very well thought out kavita. Very nicely presented.

Ravindra Nath
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चलो तिवारी जी ने माना तो सही कि अरुंधति का लक्ष्य चमन (देश) बर्बाद करना है।

श्रीराम तिवारी
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एक अरुंधती काफी नहीं है …बर्बाद चमन करने के लिए ….
दस वीस भी होजाएं तो ….सिर्फ चुहुलबाजी के लिए ..
भारत एक अजर अमर राष्ट्र है उसे कोई फ़ना नहीं कर सकता …
जो स्वयम्भू देशभक्ति का ढोंग करें तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता …

डॉ. मधुसूदन
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कविता तो भाव पूर्ण है ही, और, हरपाल जी, और अनिल जी की पंक्तियां भी मुझे बहुत अर्थोचित प्रतीत हुयी। शिखा जी ऐसे ही आप योग दान करती रहें,लिखती रहें। आपके हृदयमें भारत बसा हुआ है, बसा ही रहे।

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