लेखक परिचय

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

ललितपुर (उ0प्र0) मे जन्म, बी.ए., फिल्म एप्रीशियेशन कोर्स तक शिक्षा. प्रकाशनः कहानी, बालकहानी, बाल नाटक, व्यंग, कविताऐें तथा फीचर्स एवं राजनैतिक तथा सामाजिक रिपोर्ट. धर्मयुग, नवनीत, मनोरमा, सुलभ इण्डिया, उत्तर प्रदेश मासिक, हैलो हिन्दुस्तान, लोकमाया, अभय छत्तीसग़ढ, इतवारी पत्रिका, हिमप्रस्त, इस्पात भारती, सुगंध, प्रेरणा, प्रगति वार्ता, गुजंन, डायलोग इण्डिया, शुक्रवार, लोकायत, मध्यप्रदेश सन्देश, मड़ई, हरियाणा संवाद, प्रथम इम्पेक्ट, इण्डिया न्यूज, बुमेन ऑन टाप, प्रगति वार्ता, जागृति इण्डिया,विचारसाराशं, सार्त, मधुरिमा; रचनाकार आदि पत्रिकाओं के साथ नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक ट्रव्यून, पंजाब केसरी, नवज्योति, दो बन्धु, नवभारत, लोकमत, पूर्वाचंल प्रहरी, गांडीव, रांची एक्सप्रेस, प्रभात खबर, चौथी दुनिया, सन्डेमेल, महामेधा, आचरण, दैनिक कौसर, प्रातःकाल, श्री इण्डिया, जनप्रिय, भारतरंग टाइम्स, सत्तासुधार आदि में प्रकाशन। कृतियाँ : उ0प्र0 सिनेमा से सरोकार हंसवाहिनी पत्रकारिता पुरस्कार से इलाहाबाद में सम्मानित रामेश्वरम हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार 2007 से सम्मानित सम्प्रतिः लखनऊ ब्यूरो प्रमुख, दैनिक भास्कर झांसी/ नोएडा। सम्पर्कः राजसदन 120/132 बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ। मोबाइलः 9415508695, 05222200134

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मायाबी रावण बने सब आका

वोटों पर डालने को डाका

 

जमूड़े

सबको पहचान लो ?

पहचान लिया

चारो तरफ घूम जा

घूम लिया

जो पूछँ वह बतलाऐगा

हाँ बतलाऊँगा

राजनीति का खेल निराला

काले को सफेद कर डाला

बन न पाया मुद्दा महँगाई

आरपार की शुरू हुई लड़ाई

लोकपाल को भूल रहे है लोग

जनता को लग गया यह रोग

गुटबंदी का खेल चल रहा

अपना ही अपनो को छल रहा

जातिवाद का घिनौना खेल

कब तक यह चलेगी रेल

मुस्लिम वोटों की है होड़

आरक्षण से रहे है जोड़

मायाबी रावण बने सब आका

वोटो पर डालने को डाका

राहुल की सुर्खियो वाली भाषण बाजी

वोट देने को कर पाते क्या उन्हें राजी ?

सभी ने बीस वर्षो में दिया है धोखा

हमे दो पाँच वर्ष का सिर्फ मौका

अमर सिंह की तान निराली

अपनो को ही दे रहे गाली

उत्तर प्रदेश आ रहे लालू

बने बहुत हैं वह तो चालू

बालकुमार ने खोली पोल

गिर सकता उनका गोल

भ्रष्टाचार का लगा इल्जाम

ऐसे खड़े है लोग तमाम

जिनके कपड़ों पर लगे दाग तमाम

कह रहे चुनाव में धोबी का क्या काम

वोटर भी समझते वक्त की नजाकत

चुप्पी साधने की बनाली है आदत

समाजवाद पर हाबी परिवारवाद

वोटर रखेगा इसे भी अब याद

छोटे दलों की सियासी विसात

मंजिल तक नही पहुंची बात

यूपी के बटवारे का नारा

कांग्रेस ने फुस्स कर डाला

बाहुबलियों, अपराधियों का बोलबाला

सशंकित जनता, आगे क्या होने वाला

यूपी के सिघांसन पर आगे कौन

जनता चुप्पी साधे है तो मौन !

चुनावी विसात पर मुद्दो की गोटियां

दल सेक रहे अपनी-अपनी रोटियाँ

शरद ने चलाये माया पर तीर

किसान नेता को बताया वीर

तेवतिया बन सकते प्रतीक

संयुक्त उम्मीदवार की नीति ठीक

विपक्षी दलों ने चला है दॉव

बसपा की डूब रही है नाव

चुनावी में किन्नर नही है पीछे

विधायक बनने वे भी है रीझे

चुनावी मौसम बड़ा गहरा है

चुनाव आयोग का सख्त पहरा है

परिवर्तन की चल रही यूपी में हवा

काम नही कर रही अब कोई दवा।

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