कविता – यायावर

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yayawarवह मेरे खाने के पीछे पड़ा था

जब मैं खाना चाहता था

अपना रुखा-सूखा खाना ।

 

वह मेरी नींद चुराना चाहता था

जब मैं सोना चाहता था

थक-हारकर एक पूरी नींद ।

 

वह मेरे प्यास के पीछे भी पड़ गया

जब मैं पीना चाहता था

चुल्लू भर पानी ।

 

वह मेरे घर को हथियाना चाहता था

जब मैं नहीं था

अपने उस फुटपाथ पर ।

 

उसने पूरी ताकत लगा दी

हड़प करने के पीछे

लेकिन फिरभी

मैंने खाना खाया

नींद ली

प्यास भी बुझायी

किसी तरह ।

 

हाँ, नहीं बच सका

मेरा घर

जो छतविहीन थी

फिरभी

मैं खुश हूँ

अपनी जीत पर

कि मैंने उससे

अपना खाना

अपनी नींद

और अपनी प्यास बचायी

घर की चिंता

न तब थी

न अब है ।

 

मोतीलाल

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मोतीलाल
जन्म - 08.12.1962 शिक्षा - बीए. राँची विश्वविद्यालय । संप्रति - भारतीय रेल सेवा में कार्यरत । प्रकाशन - देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं लगभग 200 कविताएँ प्रकाशित यथा - गगनांचल, भाषा, साक्ष्य, मधुमति, अक्षरपर्व, तेवर, संदर्श, संवेद, अभिनव कदम, अलाव, आशय, पाठ, प्रसंग, बया, देशज, अक्षरा, साक्षात्कार, प्रेरणा, लोकमत, राजस्थान पत्रिका, हिन्दुस्तान, प्रभातखबर, नवज्योति, जनसत्ता, भास्कर आदि । मराठी में कुछ कविताएँ अनुदित । इप्टा से जुड़ाव । संपर्क - विद्युत लोको शेड, बंडामुंडा राउरकेला - 770032 ओडिशा

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