लेखक परिचय

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

मुकेश चन्‍द्र मिश्र

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्‍म। बचपन से ही राष्ट्रहित से जुड़े क्रियाकलापों में सक्रिय भागेदारी। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और देश के वर्तमान राजनीतिक तथा सामाजिक हालात पर लेखन। वर्तमान में पैनासोनिक ग्रुप में कार्यरत। सम्पर्क: mukesh.cmishra@rediffmail.com http://www.facebook.com/mukesh.cm

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थे राम अयोध्‍या के राजा ये सारा विश्‍व जानता है।

पर आज उन्‍हें अपने ही घर तम्‍बू में रहना पड़ता है।।

अल्‍लामा इकबाल ने उनको पैगम्‍बर बतलाया है।

उनसा मर्यादा पुरुषोत्तम न पृथ्‍वी पर फिर आया है।।

फिर भी इस सेकुलर भारत में राम नाम अभिशाप हुआ।

मंदिर बनवाना बहुत दूर पूजा करना भी पाप हुआ।।

90 करोड़ हिंदू समाज इससे कुंठित रहते हैं।

उनकी पीड़ा को समझे जो उसे राष्‍ट्रविरोधी कहते हैं।।

हिंदू उदारता का मतलब कमजोरी समझी जाती है।

हिंद में ही हिंदू दुर्गति पर भारत माता रोती है।।

हे लोकतंत्र के हत्‍यारों सेकुलर का मतलब पहचानो।

मंदिर कहना यदि बुरी बात तो राम का घर ही बनने दो।

गृह निर्माण योजना तो सरकार ने ही चलवाई है।

तो राम का घर बनवाने में आखिर कैसी कठिनाई है।।

हे हिंदुस्‍तान के मुसलमान बाबर तुगलक को बिसरावो।

यदि इस मिट्टी में जन्‍म लिया तो सदा इसी के गुण गावो।।

भाई-भाई में प्‍यार बढ़े ये पहल तुम्‍हें करनी होगी।

वरना ये रक्‍पात यूं ही सदियों तक चलता जायेगा।

आपस की मारा काटी में बस मजा पड़ोसी पायेगा।।

-मुकेश चन्‍द्र मिश्र

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20 Comments on "कविता : रामजन्‍मभूमि"

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SATISH
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महोदय आपका आरक्षण वाला लेख पढ़ते पढ़ते मुझे आपकी ये कविता भी मिली जो बहुत ही खुबसूरत है तथा आपने रामभक्तों की आत्मा तक को झगझोर दिया है पर मुझे नहीं लगता हमारे देश की सरकार या किसी और को कोई फर्क पड़नेवाला, इनको तो वोट बैंक तैयार करना है , राम का वनवास ख़त्म हो या नहीं इनको क्या……

Dharmendra Kr. Singh
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मुकेश जी आपकी कविता सुन्दर रचनाओ मे से एक है . मैंने आपकी कविता की आखरी लाइन पढ़ी जो की प्रकाशित नहीं हुई थी उसे पढने के बाद ही सही रूप से कविता का भाव समझ में आता है .

डॉ. राजेश कपूर
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अली अलबेला जी, आपकी बातें मन को छू रही हैं. आपकी बातों में ज्ञान, विद्वत्ता नहीं, दिल है. दिल की बात दिल तक पहुँच जाती है. आप सरीखे लोगों से ही समस्याओं के समाधान के रास्ते हर मौके पर निकलेंगे. पर सरकार सर पर उन्हें बिठाती है जो देश को तोड़ने का कम करते हैं. खैर सज्जनों का मौक़ा भी आयेगा, मुझे विश्वास है. – एक जानकारी आपको देना चाहूँगा कि लाल किला अरबों के आक्रमण से बहुत पहले बने होने के प्रमाण मिल चुके हैं. पर आपकी बात सिद्धांत रूप में सही है कि फैसलों के पैमाने सबके लिए… Read more »
डॉ. राजेश कपूर
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बहुत सुन्दर ! साधुवाद.

subhash dhyani
Guest

hello mishra ji ka hal ghaiel bhaiyya iiiee ka likh diye be aisan lage jaisan pura hindu samaj dukhda khol diye be bahutai accha bhaiel hamka

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