लेखक परिचय

श्रीराम तिवारी

श्रीराम तिवारी

लेखक जनवादी साहित्यकार, ट्रेड यूनियन संगठक एवं वामपंथी कार्यकर्ता हैं। पता: १४- डी /एस-४, स्कीम -७८, {अरण्य} विजयनगर, इंदौर, एम. पी.

Posted On by &filed under कविता.


अगम रास्ता-रात अँधेरी, आ अब लौट चलें.

सहज स्वरूप पै परत मोह कि, तृष्णा मूंग दले.

जिस पथ बाजे मन-रण-भेरी, शोषण बाण चलें.

नहीं तहां शांति समता अनुशासन ,स्वारथ गगन जले.

विपथ्गमन कर जीवन बीता, अब क्या हाथ मले.

कपटी क्रूर कुचली घेरे, मत जा सांझ ढले.

अगम रास्ता रात घनेरी आ अब लौट चलें.

कदाचित आये प्रलय तो रोकने का दम भी है.

हो रहा सत्य भी नीलाम, महफ़िल में हम भी हैं.

जख्म गैरों ने दिए तो इतराज कम भी हैं.

अपने भी हो गए बधिक जिसका रंजो गम भी है.

हो गईं राहेंभी खूंखार डूबती नैया मझधार.

मत कर हाहाकार, करुण क्रंदन चीत्कार.

सुबह का भूला न भूला गर लौटे सांझ ढले.

अगम रास्ता रात अँधेरी, आ अब लौट चलें….

– श्रीराम तिवारी

Leave a Reply

4 Comments on "कविता / आ अब लौट चलें ……."

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
श्रीराम तिवारी
Guest

thanks you laxminarayan lahare ji for encouraging and also happy new year.

लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
Guest

तिवारी जी नव बरस की हार्दिक बधाई
आप का कविता अच्छा लगा …………………………………………………………
लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

Ramlal Gothwal
Guest

कवि ने वर्तमान सन्दर्भ में अपनी पीड़ा व्यक्त की है…क़ाबिले -तारीफ है

डॉ. मधुसूदन
Guest

कुछ दसेक दिन के प्रवास पश्चात आज “प्रवक्ता” को खोला तो, यह सुंदर अंत्यानुप्रासयुक्त गेय कविता देखी।
पर प्रश्नों का उत्तर भी तो कविता में ही है।
“सुबह का भूला न भूला गर लौटे सांझ ढले.”
अर्थ की परतें और भी हो सकती है।
श्री राम तिवारी जी धन्यवाद, आपकी भजनिक विधा में सुंदर, शब्द लालित्य युक्त कविता के लिए।

wpDiscuz