लेखक परिचय

डॉ. सीमा अग्रवाल

डॉ. सीमा अग्रवाल

लेखिका गोकुलदास हिंदू गर्ल्‍स कॉलेज, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के हिंदी विभाग में वरिष्‍ठ असिस्‍टेंट प्रोफेसर हैं।

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कल क्या होगा, इस चिंता में

रात गई आँखों में बीत।

होठों पर आने से पहले,

सुख का प्याला गया रीत।

आशाओं का दीप जला

ढूँढा, न मिला जीवन संगीत।

किस्मत भी जब हुई पराई,

फूट पडा अधरों से गीत।

साथी सुख तन्हा छोड़ गया जब,

दर्द मिला बन मन का मीत।

हर सुख से खुद को ऊपर पाया,

की जब मैंने दुख से प्रीत।

की जब मैंने दुख से प्रीत।!

– डा0 सीमा अग्रवाल

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5 Comments on "कविता/की जब मैंने दुख से प्रीत"

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Girish Joshi
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वैरी nice

रमेश " शंखधर "
Guest
रमेश " शंखधर "

आदरणीय सीमा जी…काफी समय से आपने कोई कविता नहीँ लिखी है।। हमेँ इन्तजार है।।

रमेश " शंखधर "
Guest
रमेश " शंखधर "

आदरणीय सीमा जी..
आपकी कविता पढकर काफी अच्छा लगा। लगता है कि जो आपने अपनी कविता मेँ लिखा है.. शायद वो आपके साथ हुआ है.. इसी लिए आपकी कविता इतनी ग़मग़ीन है।

लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
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डा सीमा जी सप्रेम आदर जोग
आपका कविता पढ़ कर अच्छा लगा आपको हार्दिक बधाई ”””””””””””””””””””””””””””””””’

लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
Guest
कविता ””’ ”””””वो भोली गांवली”””’ जलती हुई दीप बुझने को ब्याकुल है लालिमा कुछ मद्धम सी पड़ गई है आँखों में अँधेरा सा छाने लगा है उनकी मीठी हंसी गुनगुनाने की आवाज बंद कमरे में कुछ प्रश्न लिए लांघना चाहती है कुछ बोलना चाहती है संम्भावना ! एक नव स्वपन की मन में संजोये अंधेरे को चीरते हुए , मन की ब्याकुलता को कहने की कोशिश में मद्धम -मद्धम जल ही रही है ””””””””वो भोली गांवली ””””’सु -सुन्दर सखी आँखों में जीवन की तरल कौंध , सपनों की भारहीनता लिए बरसों से एक आशा भरे जीवन बंद कमरे में गुजार… Read more »
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