लेखक परिचय

संजय चाणक्य

संजय चाणक्य

Posted On by &filed under समाज.


संजय चाणक्य
——————–
‘‘ वक्त लिख रहा कहानी इक नए मजमून की !
जिसकी सुर्खियों को जरूरत है हमारे खून की !!
अगर हम आपसे कहे कि आजाद हिन्दुस्तान के दो नाम है पहला गरीब भारत और दुसरा रिच इण्डिया तो शायद आप मुझे सिरफिरा कहेगें। या फिर अवसाद ग्रसित। हो सकता है आप अपनी जगह पर सही हो। क्याोंकि आप वही देख रहे है जिसें चैसठ वर्षो से हमारे देश के भाग्य विधाता दिखा रहे है। लेकिन यकीन माननिए! अगर आप सही है तो हम भी कहीं गलत नही है। फर्क बस इतना है कि आप आजाद भारत की वह तस्वीर देख रहे है जो किसी कलाकार द्वारा बड़ी ही खुबसुरती से बनाया गया है और हम वह तस्वीर देख रहे है। जिस पर किसी कलाकार का ब्रश नही पहुचा है हम तस्वीर देख रह उस मासूम बच्चे की जिसके पास तन ढापने के लिए कपड़ा नही है, हम उस बेवस माॅं को देख रहे है जो अपने कलेजे के टुकड़े की पेट की आग बुझाने के लिए पडोसियों के घरों में बर्तन-चैका करती है। हम उस कुनबा को देख रहे है जहां न चुल्हा है न वर्तन, न घर है न धुआं। अब आप ही बताइए ! यह किस भारत की तस्वीर है।
‘‘ शासन की नीति में सदा रहा है दोष
रह रहकर भड़के यहां जन-जन में आक्रोश’’
rich indiaबेशक! आजाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतात्रिक राष्ट्र है। हमे गर्व है हमारी संस्कृति दुनिया के सभी देशों से सर्वोपरि है। हमे नाज है कि हम दुनिया के उस धरती पर जन्म लिए जिस पर महामानव के साथ-साथ देवताओं का अवतरण है। हमारा इतराना स्वभाविक है क्योकि कि हमने संसार को शून्य और दशमलव दिया है। संसार का एक मात्र राष्ट्र भारत है जिसे मां का दर्जा प्राप्त हुआ है। तभी तो ‘‘भारत माता की जयघोष’’ कर हर हिन्दवासी खुद को गौरवन्वित महसूस करता है। यह तो रहा देश की खुबी। आइए! बात करते है इस देश के भाग्य विधाताओं और नीति-नियंताओं की। असली मुद्दे पर बात पर करे इससे पहले एक सवाल-क्या आपको पता है स्विस बैंको में भारतीयां का चैदह खरब छप्पन अरब डालर जमा है अगर यह पैसा अपने देश में वापस आ जाए तो सवा अरब के आबादी वाले इस देश में कोई गरीब नही रहेगा। यह विडम्बना नही तो क्या है हमारे देश के सांसदों के वेतन भत्ता सहित अन्य सुविधाओं पर प्रति वर्ष प्रति सांसद पर तकरीबन बत्तीस लाख रूपये खर्च होता है। इतना ही नही संसद के एक घण्टे की कार्यवाही पर बीस लाख रूपये खर्च होते है। इसके अलावा केन्द्र और राज्य के सभी माननीयों व जनप्रतिनिधयों की सुरक्षा व्यवस्था हर साल अरबों पानी की तरह बहा दिया जाता है। जिसे हमारे देश की गरीब जनता पेट काट कर भरपाया करती है। ये तो था रिच इण्डिया की तस्वीर, अब आइए गरीब भारत की तस्वीर देखते है गृह मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1999 में गरीबी से 2952 लोग और बेरोजगारी से 2124 लोगों ने खुदकुशी कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। इतना ही नही कृषि प्रधान इस देश में बदहाली के कारण 148322 किसानों ने अपनी जान दे दी। अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट पर गौर करे तो मां भारती के इस देश में अस्सी करोड़ लोग अट्ठाइस रूपये प्रतिदिन की आय पर अपना गुजर-बसर करते है। जबकि नौ हजार बच्चे प्रतिदिन भूख से तड़फड़ाकर दम तोड़ देते है। वैसे तो एयरकंडिशन रूम में बैठकर गरीबों के लिए नई-नई स्कीम बनाने वाले हमारे देश के भाग्य-विधता और नीति-नियंता यह मानने के लिए कभी तैयार ही नही है कि भूख से किसी की मौत होती है। लेकिन अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट है चुगली करने के लिए पर्याप्त है। फिर भी इस पर हम कोई टिप्पणी नही करेगे लेकिन कृषि मंत्री के उस बयान पर कैसे खामोश रह सकते है जब बीते वर्ष महगाई को लेकर हो-हल्ला मचा था और उन्होने बड़ी ही निर्लजता से कहा था कि मंहगाई नही है लोग पहले के अपेक्षा ज्यादा खा रहे है इस लिए मंहगाई है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जहा हर साल बीस लाख लोग टी.बी नामक बीमारी के चपेट में आने से मर जाते है वही निजी अस्पतालों में खर्चीले इलाज के कारण प्रति वर्ष चैबीस लाख लोग गरीबी रेखा के नीेचे खिसक आते है। जिस पर इस देश के भाग्य विधाता कभी बोलने की जहमत नही उठाते। अब आप ही बताइए! यह आकड़ा देखकर क्या कहेगें। एक तरफ देश के उद्योगपति और सांसदो की ठाट-बाट और दुसरी तरफ अट्ठाइस रूपयें में गुजारा करने वाली देश की आधी आवादी। अब एक ही देश में अमीर-गरीब का यह फासला है तो गरीब भारत, रिच इण्डिया कहना लाजमी है या नही ?
‘‘ कर्णधार तू बना तो हाथ में लगाम ले।
क्रान्ति को सफल बना नसीब का न नाम ले।।’’
!! सत्यमेव जयते !!

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz