• मुख पृष्ठ
  • राजनीति
    • चुनाव
      • लोकसभा चुनाव
      • विधानसभा चुनाव
      • घोषणा-पत्र
      • चुनाव विश्‍लेषण
      • आंकडे
  • आर्थिकी
  • विश्ववार्ता
  • मीडिया
  • मनोरंजन
    • खेल जगत
    • टेलिविज़न
    • रेडियो
    • सिनेमा
    • संगीत
    • चुटकुले
    • कार्टून
  • धर्म-अध्यात्म
  • कला-संस्कृति
  • साहित्‍य
    • लेख
    • कहानी
    • कविता
    • गजल
    • आलोचना
    • व्यंग्य
    • पुस्तक समीक्षा
  • समाज
  • साक्षात्‍कार
  • विविधा
  • अन्य
    • वीडियो
    • महिला-जगत
    • बच्चों का पन्ना
    • विधि-कानून
    • हिंद स्‍वराज
    • सार्थक पहल
    • खेत-खलिहान
    • जन-जागरण
    • विज्ञान
    • स्‍वास्‍थ्‍य-योग
    • सैर-सपाटा
    • खान-पान
  • संपर्क


सत्ता..कांग्रेस और गांधी परिवार..


सोनू कुमार

उत्तर प्रदेश के चुनाव मे पहली बार गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी की झलक रायबरेली मे दिखी, प्रियंका गांधी के दोनो बेटों को पहली बार किसी राजनैतिक मंच पर देखा गया, प्रियंका ने कहा की वे गांव देखने आए हैं तो विपक्ष ने भी आरोप लगाया की रायबरेली और अमेठी को गांधी परिवार अपनी जागीर समझती हैं, लेकिन रायबरेली का यह मंच काफी कुछ स्पष्ट कर गया । आजादी के बाद से अब तक हिन्दुस्तान की राजनीति मे गांधी परिवार का दबदबा हमेशा अव्वल नं. पर रहा हैं, जवाहर लाल नेहरु से लेकर राजीव गांधी तक का सफर तो देश ने एक ही परिवार के साथ तय किया लेकिन राजीव गांधी के बाद कांग्रेस की बागडोर तो गांधी परिवार के हाथ रही लेकिन सत्ता से दुरी बना रहा । राजीव गांधी के बाद सोनीया गांधी ने बखुबी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद संभाला लेकिन खुद को हमेशा से सत्ता से दूर रखा, सत्ता से दुरी अगर सोनीया की मजबूरी थी तो इस मजबूरी मे भी कांग्रेस का ही फायदा था । सोनीया ने खुद को सत्ता से दूर रखकर एक तरफ जहां देश को यह संदेश दिया की गांधी परिवार सत्ता के लिए राजनीति नही करता वहीं दुसरी तरफ, सत्ता पर अपने मनपसंद उत्तराधिकारी को बिठा कर हमेशा सरकार की चाबी भी अपने हाथ मे ही रखी । लंबे इंतजार के बाद राहुल गांधी को गांधी परिवार के उत्तराधिकारी होने के नाते कांग्रेस उन्हे अपना अगला प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट कर ही दिया हैं । राहुल गांधी पिछले चार सालों से उत्तर प्रदेश मे लगातार जनाधार जुटाने के लिए दिन-रात एक किए हैं, राहुल को यह पता हैं कि दिल्ली का सफर लखनउ होकर ही तय किया जा सकता हैं, इसलिए युवराज के साथ-साथ मां और बहन भी भाई की ताजपोशी के सफर मे हमसफर की तरह उनके कंधे मजबूत करने मे लगे हैं । कांग्रेस के लिए यह शायद सबसे कठिन समय हैं मौजूदा सरकार घोटाले और भ्रष्टाचार के बोझ तले पहले से दबा हुआ था, उपर से जनलोकपाल आंदोलन और रामलीला कांड ने कांग्रेस की राह मे और मुश्किले खड़ी कर दी हैं, हालांकी इसका ज्यादा असर विधानसभा चुनाव मे नहीं पड़ने वाला क्योंकी वहां पर और भी कई मुद्दे हैं जो अहम हैं । उत्तर प्रदेश मे राहुल गांधी की चुनौति बिहार विधानसभा चुनाव से भी अधिक हैं और हालात भी वही हैं बिहार की तरह यहां भी कांग्रेस को अपनी जमीन मजबूत करनी हैं इसके लिए राहुल गांधी ने दिन रात एक कर दी हैं यहां तक की विकास की बात करने वाले यूवा नेता से जाति धर्म और मजहब की राजनीति करने वाले नेता की छवी बना ली, इसका कारण भी हैं कि इसे राजनीति का सचाई माने या सियासत की मजबूरी, बिना इसके सत्ता का सफर तय नही किया जा सकता । राहुल गांधी मीडिया के सामने आकर बयान देते हैं की वो सत्ता के लिए यूपी मे मेहनत नहीं कर रहे हैं आपको बता दे की गांधी परिवार का कोई भी सदस्य कहीं भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठा हैं उत्तर प्रदेश मे कभी राजीव गांधी ने भी इसी तरह मेहनत की थी और पार्टी को जबरदस्त सफलता भी दिलाई थी लेकिन मुख्यमंत्री पद पर गांधी परिवार का कोई सदस्य नही बैठा एक ये भी कारण हैं कि कांग्रेस के परंपरागत वोटर भी इस बात को लेकर असमंजस मे रहते हैं कि गांधी परिवार के नाम पर वोट मांगने वाले खुद तो सत्ता पर काबिज नहीं होगे । परिवार के सभी सदस्य चुनाव मैदान मे हैं हमेशा की तरह प्रियंका गांधी भी पार्टी की स्टार प्रचारक के तौर पर खुद तो मैदान मे हैं हीं साथ मे उनके पति रॉबर्ट वढेरा भी राहुल और कांग्रेस दोनो के लिए प्रचार कर रहे हैं । प्रियंका पार्टी के प्रचार की जिम्मेदारी के साथ-साथ पूरे कैंपेन की जिम्मेदारी के बीच पहली बार इशारो-इशारों मे राजनीति मे आने के संकेत भी दे चुकी हैं , अगर प्रियंका 2014 मे चुनाव लड़ ले तो इसमे कोई हैरानी की बात नही होनी चाहिए । प्रियंका के साथ-साथ रॉबर्ट ने भी राजनैतिक घराने से संबंध का हवाला देकर राजनीति मे आने की ख्वाहीश जता चुके हैं हालांकी बाद मे प्रियंका उनके बात का खंडन करती हैं की वे अपने बिजनेश से ही खुश हैं और उनके स्पष्ट बात को मिडीया पर आरोप ज़ड़ बयान का गलत मतलब निकालने की बात कह रही हैं । राबर्ट ने जो कुछ भी मीडिया के सामने कहा उससे कांग्रेस के भविष्य, पारिवारिक संबंधों और प्रियंका और अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा की साफ झलक दिखाई देती है। जब पत्रकारों ने राबर्ट से सवाल किया कि प्रियंका क्या हमेशा प्रचार ही करती रहेंगी या चुनाव भी लड़ेंगी? जवाब में रॉबर्ट ने कहा कि हर चीज का वक्त होता है। सब कुछ समय आने पर ही होता है। अभी प्रियंका का राजनीति में आने का वक्त नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अभी राहुल गांधी का वक्त चल रहा है। आगे प्रियंका का भी वक्त आएगा ।अगर कांग्रेस के नेता ताल ठोक कर यह कहते हैं की राहुल उनके अगले प्रधानमंत्री हैं तो उनके इस बात मे वाकई दम हैं, क्योंकी मनमोहन सिंह के बाद उनके पास कोई विकल्प नही हैं और राहुल भी इस बात को जानते हैं इसलिए उन्होने अभी तक अपने आप को सत्ता से दूर रखा हैं या ये कहें की गांधी परिवार की परंपरा के अनुसार वो किसी मंत्रालय के मुखिया नहीं बल्की देश के मुखिया बनने की परंपरा कायम रखना चाहते हैं । प्रियंका गांधी के राजनीति मे आने को लेकर हमेशा अटकलें लगते रहे हैं, लेकिन प्रियंका ने अभी तक अपने आप को राजनीति से दूर ही रखा हैं, इसका कारण तो स्पष्ट दिखता हैं कि बहन कही भाई पर भारी न पड़ जाए और दुसरा की कांग्रेस पर पहले से ही एक परिवार की पार्टी का आरोप लगते रहे हैं । प्रियंका का राजनीति से दूर रहना इतिहास को दुहराता हैं चाहे गांधी परिवार हो या भूट्टो परिवार पार्टी मे परिवार के एक ही सदस्य को आगे रखा गया हैं । सुंदर नैन-नक्श वाली प्रियंका अपनी दादी की छवि हैं। उनका दमदार व्यक्तित्व भी दादी की तरह है। यह गर्व की बात है कि उनके पिता राजीव गांधी, दादी श्रीमती इन्दिरा गांधी और दादी के पिता जवाहरलाल नेहरु तीनों ही भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। प्रियंका गांधी वडेरा को अलग-अलग नामों से पुकारा जा रहा है- अनइच्छुक बहू, मौसमी फल, मीडिया की प्रिय आदि। पेज-3 के पाठकों के लिए वह फैशन आइकन या सोशलाइट हैं। लेकिन जब वह अपने परिवार के परंपरागत चुनाव क्षेत्रों का दौरा करती हैं तो सूती साड़ी पहनकर अपनी दादी इंदिरा गांधी की याद दिला देती हैं।इसमें शक नहीं है कि सोनिया गांधी ने जबसे (1998) कमान संभाली है, उनके दोनों बच्चों की राजनीतिक योग्यता की तुलना निरंतर हो रही है। कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रियंका में राहुल से अधिक सियासी करिश्मा देखते हैं। उन्हें प्रियंका स्वाभाविक नेता प्रतीत होती हैं, जिन्होंने विरासत में अपनी दादी के नेतृत्व गुण, करिश्मा और लुक्स हासिल किया है। प्रियंका ने अपने आप को राजनीति से इसलिए दूर रखा की गांधी परिवार भी जानता हैं प्रियंका अगर राजनीति मे आ गई तो कहीं राहुल का सपना अधुरा ना रह जाए उनकी चमक फिंकी ना पड़ जाए शायद इसीलिए वो अपना राजनैतिक करियर भाई के कहने पर छोड़ दिया हैं । भारतमें पितृ सत्तात्मक समाज है। प्रियंका को कांग्रेस का उत्तराधिकारी बनाने से सत्ता गांधी परिवार के पास नहीं रहेगी। इस बात को सोनिया गांधी अच्छी तरह समझती हैं। तभी तमाम कांग्रेसियों और जनता के आग्रह के बाद भी वे प्रियंका वढेरा को प्रत्यक्ष राजनीति में लेकर नहीं आतीं। हालांकि चुनाव के वक्त उनकी लोकप्रियता का जमकर उपयोग किया जाता है। प्रियंका की लोकप्रियता कामयाबी और शोहरत के आगे राहुल ही नहीं खुद सोनीया गांधी भी पीछे छूट जाती हैं यह कइ बार देखा गया हैं हालांकी प्रियंका राहुल और सोनीया की तरह कोई बड़ी रैली नहीं करती लेकिन उनके इंतजार मे प्रियंका की एक झलक पाने और उनसे बात करने के लिए सड़को के किनारे उमड़ी भीड़ उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण हैं प्रियंका का काफिला जहां से भी गुजरता हैं वहां अपने नेता की झलक पाने के लिए घंटो लोग सड़क की पगडंडीयों पर चिपके रहते हैं । प्रियंका गांधी की मांग चुनाव मे सबसे ज्यादा होती हैं कइ इलाकों मे तो सोनीया और राहुल के बजाय प्रत्याशी प्रियंका की मांग ही करते हैं इसका सबसे बड़ा कारण हैं पिछले चुनाव मे प्रियंका का करिश्मा जहां भी प्रियंका ने प्रचार किया वहां कांग्रेस को अच्छी सफलता मिली । राहुल प्रियंका और सोनीया भले आज प्रियंका के राजनीति मे आने से इनकार करते हों लेकिन आने वाले लोकसभा चुनाव मे गांधी परिवार की एक और नेता अगर मैदान मे दिख जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी, और अब कांग्रेस के कई नेता भी मानते हैं की विपक्ष जो कहे जब एक बार परिवारिक पार्टी होने का तमगा लग चुका हैं तो अब डर कैसा, लेकिन बड़ा सवाल अब भी हैं की क्या कांग्रेस की कमान कभी गांधी परिवार से अलग किसी और के हाथ मे जाएगा ? हो सकता हैं मेरा सवाल अटपटा हो क्योंकी ये सवाल ऐसे समय पर उठाया हैं जब हमे गांधी परिवार की पांचवी पिढ़ी से रुबरु खुद परिवार द्वारा कराया गया हो ।

February 11th, 2012 | 78 views | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post
Category: टॉप स्टोरी | Tags: gandhi family in politics, कांग्रेस और गांधी परिवार
Share on MySpace Share in Google Buzz Y!:Yahoo Buzz

सबसे ज्यादा चर्चित लेख

  • परिचर्चा : अयोध्‍या मामले पर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय
  • परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स
  • क्या यही हकीकत है ‘सच्चे मुसलमानों’ की? / तनवीर जाफ़री
  • आरक्षण, धर्मनिरपेक्षता एवं अल्पसंख्यकों का विरोध असंवैधानिक / डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
  • पुरुष से ऊंचा स्‍थान है नारी का हिंदू परंपरा में
  • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष

प्रवक्ता.कॉम के लेखों को अपने मेल पर प्राप्त करने के लिए
अपना ईमेल पता यहाँ भरें:

परिचर्चा में भाग लेने या विशेष सूचना हेतु : यहाँ सब्सक्राइव करें


  • Most recent
    Most liked
    Show all Comments (3)
  • इक़बाल हिंदुस्तानी
    iqbal hindustani

    शानदार लिखा.

    February 16 2012
    CommentsLikeUnlike
    • Awadhesh

      गाँधी राज परिवार को अब यह समझ लेना चाहिये कि जनता को अब राजा नहीं सेवक चाहिये, अब हाथ हिलाने, आँसू बहाने, आस्तीन चढाने और खादी पहनने से वोट नहीं मिलने वाले. पहले राजा-महाराजा सिर्फ त्योहारों में जनता को दर्शन देते थे, ठीक उसी तरह प्रियंका गाँधी चुनावों के टाईम पर भारतीय वस्त्र पहन कर मतदाताओं को दर्शन देने पहुँच जाती हैं और मीडिया कुत्ते की तरह दुम हिलाता हुआ उनके पीछे लग जाता है. जनता को अब रोजगार, सडक, सुशासन, पारदर्शिता और न्याय चाहिये, जो इसका प्रयास करेगा जनता उसके पीछे अपने आप लग जायेगी. गुजरात में मोदी, बिहार में नितीश, मप्र में शिवराज तो छत्तीसगढ में डा. रमन सिंह इसके उदाहरण हैं.

      February 12 2012
      CommentsLikeUnlike
      • sangeet shrivastava

        अच्छा लिखा

        February 11 2012
        CommentsLikeUnlike

        • अपनी प्रतिक्रिया व विचार यहाँ लिखें :



         (Press Ctrl + G) or Click on letter (अ) to toggle between English and हिंदी, for other Indian Languages scroll down (अ)
        • हिंदी में टाइप करें

          यहाँ क्लिक करें

        • हिंदी फॉण्ट कन्वर्टर

          हिंदी फॉण्ट से यूनिकोड

        • सबस्क्राइब

          प्रवक्‍ता डॉट कॉम के लेखों को अपने ईमेल पर प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए बॉक्‍स में अपना ईमेल पता भरें:

        • आपका मत

          उड़ीसा में अपहृत विधायक मामले में सरकार ने माओवादियों के सामने घुटने टेक दिए ?

          View Results

          Loading ... Loading ...
          • Polls Archive
        • परिचर्चा

          स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं।
        • विषय सूची

        • लेखक के अनुसार पढ़ें

        • अब तक

        • आपने कहा…

          • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
          • dr. madhusudan on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
          • dr. rajesh kapoor on भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
          • Danish umar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
          • Net Ram Maharania on बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
          • manoj sharma on क्यों बनते हैं किन्नर – राजकुमार सोनी
          • LAL CHAND on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
          • harpal singh on ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
          • Himkar Shyam on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
          • harpal singh on समलैंगिक स्वीकृति के मायने
          • AKASH MISHRA on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
          • MANJU MADHUR JOHRI on 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
          • ePandit on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
          • Prof. Mukund Hambarde on राहुल गांधी के इस बयान में कुछ भी गलत नहीं है : डॉ. मीणा
          • Prof. Mukund Hambarde on हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
          • girish pankaj on डॉ. मधुसूदन: ”हिंदी-अंग्रेज़ी टक्कर?” भाग-एक
          • R.Singh on 60 साल की संसद, सड़ता अनाज और भूखे लोग
          • वीरेन्द्र जैन on आर.एस.एस. और पी. चिदंबरम
          • dr. rajesh kapoor on नीबू से कैंसर का इलाज संभव / डॉ. राजेश कपूर
          • tejwani girdhar on असली हीरो आप तो फास्ट ट्रेक कोर्ट आमिर के कहने पर क्यों?
          • iqbal hindustani on तय सीमा में करें काम-काज
        • Alexa Rank

        • FOLLOW US ON

          
        • लेखक परिचय

          सोनू कुमार
          सोनू कुमार

          पेशे से पत्रकार हैं।
        • ‘प्रवक्‍ता’ एक नजर में

          6,000 से अधिक लेख / 500 से अधिक लेखक / 68,534 एलेक्‍सा रैंकिंग / 51,281 पेजव्‍यू प्रतिदिन (जनवरी 2012)
        • प्रवक्ता पर लेख भेजे

          प्रवक्ता पर लेख भेजने के लिए यहां क्लिक करें या फिर सीधे prawakta@gmail.com पर हमें लिख भेजें।
        • नवीनतम लेख

          • ऐतिहासिक करालपूरा उपेक्षा का शिकार
          • कब जगमग होगा गांव
          • तुष्टिकरण का सबब है हज यात्रा में छूट
          • 60 साल की बूढी संसद को दरकार है सम्मान की
          • भद्रजनों ने क्या कभी अपनी अभद्र भाषा पर गौर किया है ?
          • क्या २जी घोटाले का सच सामने आएगा?
          • नक्सल समस्याः जड़ में हल तलाश कीजिए
          • खदानों में लगी आग से जल रहा झारखंड
          • बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ
          • गजल-भेंट मज़दूरों की क्यों लेती बताओ चिमनियां-इकबाल हिंदुस्तानी
        • परिचर्चा

          • तीन साल का हो गया ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’
          • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ बना वैकल्पिक वेबसाइटों का सिरमौर
          • परिचर्चा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम
          • यूपीए-2 के दो वर्ष: आम आदमी की कीमत पर असफलताओं का जश्‍न
          • परिचर्चा: काला धन
          • परिचर्चा : क्या डॉ. विनायक सेन देशद्रोही हैं?
          • परिचर्चा : यूपीए सरकार और भ्रष्‍टाचार
          • बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम पर परिचर्चा
          • ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ के दो वर्ष पूरे होने पर विशेष
          • राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और सिमी में कोई फर्क नहीं : राहुल गांधी
          • परिचर्चा : अयोध्‍या मामले पर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय
          • एलेक्‍सा एक लाख क्लब में ‘प्रवक्‍ता’ शामिल
          • परिचर्चा : राष्ट्रमंडल खेल और सेक्स
          • परिचर्चा : आम आदमी आज दाल-रोटी तक के लिए मोहताज
          • परिचर्चा : क्या जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए?
          • परिचर्चा: ‘नक्‍सलवाद’ के बारे में आपका क्‍या कहना है…
          • परिचर्चा : राज ठाकरे की राजनीति के बारे में आप क्‍या कहते हैं?
          • परिचर्चा : मार्क्‍सवाद और धर्म
          • परिचर्चा : हिंद स्वराज की प्रासंगिकता
        • जरूर पढ़ें

          • भारत को कैसे मिले अब तक के अपने राष्ट्रपति
          • हिन्दुत्व और विश्व बंधुत्व : विपिन किशोर सिन्हा
          • समलैंगिक स्वीकृति के मायने
          • ‘नामवर सिंह आलोचक कम और साहित्य के प्रौपेगैण्डिस्ट ज्यादा नजर आते हैं’
          • शब्द वृक्ष दो: डॉ.मधुसूदन
          • खिचड़ी भाषा अंग्रेज़ी – डॉ. मधुसूदन
          • एक बंगारू तो पकड़ा गया बाकी पर न्यायतन्त्र की आंखों पर पट्टी क्यों ?
          • बंगारू लक्ष्मण का अपराध क्या था?
          • बंगारू लक्ष्मण की सजा से उठे सवाल
          • रघुनाथ सिंह की दो कविताएं
          • ॥अमृत भाषा संस्कृत॥- डॉ. मधुसूदन उवाच
          • वे जो हर सांस में भारत को ही जीते हैं / नरेश भारतीय
          • सभी धर्मों में एक ही बात नहीं / शंकर शरण
          • कम्युनिस्टों का असली चेहरा / विपिन किशोर सिन्हा
          • ईसाई धर्म और नारी मुक्ति / प्रो. कुसुमलता केडिया
          • भारतीय वामपंथ के पुनर्गठन की एक प्रस्तावना / अरुण माहेश्‍वरी
          • आदिवासी कुंभ से क्या हासिल होगा आरएसएस को / संजय द्विवेदी
          • पश्चिमी रंग में रंगा भारत: नकलची भूरा बंदर / विश्व मोहन तिवारी
          • IIT रुड़की : ये कैसी इंजीनियरिंग है? / सुरेश चिपलूनकर
          • दबाव की राजनीति में इतिहास और तथ्य की विदाई / जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

        • मुख पृष्ठ
        • हमारे बारे में
        • संपर्क
        • प्रवक्‍ता मण्डली
        • लेख भेजें
        • संपादक
        • ई-मेल
        • चर्चा में प्रवक्‍ता
        • प्रवक्ता पर विज्ञापन
        • Log In
        • पोल Archive
        • Pravakta Ads
          • Chhatisgarh-Ads
          • प्रवक्‍ता के सम्‍मानित पाठक
        • User Online
        • Hindi Font Converter
        • आर्थिकी
        • कला-संस्कृति
        • चुनाव
          • घोषणा-पत्र
          • जन-जागरण
          • लोकसभा चुनाव
            • आंकडे
            • चुनाव विश्‍लेषण
          • विधानसभा चुनाव
        • जरूर पढ़ें
        • ज्योतिष
          • राशिफल
          • वर्त-त्यौहार
        • टॉप स्टोरी
        • धर्म-अध्यात्म
          • चिंतन
        • पत्रिका पर नजर
        • परिचर्चा
        • पर्व – त्यौहार
        • प्रवक्ता न्यूज़
        • मनोरंजन
          • कार्टून
          • खेल जगत
          • चुटकुले
          • टेलिविज़न
          • रेडियो
          • संगीत
          • सिनेमा
        • महत्वपूर्ण लेख
        • मीडिया
        • राजनीति
        • विधि-कानून
        • विविधा
          • उत्‍पाद समीक्षा
          • खान-पान
          • खेत-खलिहान
          • टेक्नोलॉजी
          • पर्यावरण
          • बच्चों का पन्ना
          • महिला-जगत
          • विज्ञान
          • शख्सियत
          • साक्षात्‍कार
          • सार्थक पहल
          • सैर-सपाटा
          • हिंद स्‍वराज
        • विश्ववार्ता
        • वीडियो
        • समाज
        • साहित्‍य
          • आलोचना
          • कविता
          • कहानी
          • गजल
          • पुस्तक समीक्षा
          • लेख
          • व्यंग्य
        • स्‍वास्‍थ्‍य-योग

        Copyright © 2010 PRAVAKTA.COM
        Designed & Developed by Manu Info Solutions (MiS)