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14 Responses to “प्रवक्‍ता के सम्‍मानित पाठक”

  1. govind keshari

    अब आपके साईट पर लेखक नाम सर्च का आप्शन ख़त्म हो गया है क्या अत्यधिक समस्या होती है कृपया ध्यान दे धन्यवाद

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  2. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbal hindustani

    सबसे बड़ी बात यह है कि प्रवक्‍ता संपादक और प्रबंधक के साथ ही उनकी टीम की कथनी करनी में अंतर नहीं हैा प्रवक्‍ता सभी का निष्‍पक्ष मंच बन चुका हैा उससे जुड़े सभी लोग उसको अपना परिवार समझते हैा इसकी स्‍पश्‍टवादिता और निष्‍पक्षता का इससे बड़ा प्रमाण और क्‍या हो सकता है कि इसकी टीम ने मेरे कुछ विचारों से सहमत ना होते हुए भी केवल बिना किसी दबाव और प्रभाव के अपने स्‍वभाव के हिसाब से लिखने के लिये प्रवक्‍ता के पांच साल पूरे होने पर मुझ जैसे मामूली कलमकार को उन १६ लेखकों के साथ सम्‍मानित किया जिनका देश विदेश में बहुत नाम हैा भाई संजीव सिन्‍हा और भाई भारत भूषण जी के साथ ही मैं तो प्रवक्‍ता की टीम का सदैव आभारी रहूंगाा

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  3. Charan Rawat

    यह सही है की मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भारतीय जनता पार्टी की मुखालफत करता है और किसी भी परिस्थिति में भाजप को परास्त देखना चाहते हैं. फिर भी इसका यह मतलब नहीं होना चाहिए कि हम किसी भी मीडिया हाउस पर बेबुनियाद आरोप लगाएं. मैं औरों के बारे में तो नहीं कह सकता लेकिन बेनेट कोलेमन एक भारतीय कंपनी है और इसका स्वामित्व जैन परिवार के पास है. इसमें क्रिस्चियन संस्थाओं का पूँजी निवेश की बात करना थोडा खाम खयाली है. इस तरह के बयानात से बचाना चाहिए

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  4. BRIJESH KUMAR PATHAK

    आपने लोगो को अपनी भावनाए शब्दों में ढालने का
    अवसर प्रदान किया जिसकी वजह से लोगो को एक
    प्लेटफ़ॉर्म मिला की वो भी देश ,राजनीती ,शोषण
    जैसे मुद्दों पर आवाज मुखर कर रहे है इसके लिए
    आपको धन्यवाद

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  5. रणबीर सिंह

    Ranbir Singh

    पर्वक्ता पर लेख पड़ता हु तो देश प्रेम उभर आता ह आप की सैट बहुत अह्ची लगी दनाय्वाद

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  6. प्रवीण दुबे

    praveen dubey

    प्रवक्ता के लेख सभी वेब. से बेहतर होते हे.

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  7. RH Sharma

    प्रवक्ता डोट कॉम के लेख बहुत हे अछे होते है मैं भी कुछ लेख लिखना चाहता हूँ आप मुझे भी अपने लेखको के सूची में शामिल कर लें

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  8. नन्दकिशोर आर्य

    जब मैनें प्रवक्ता डॉट कोम को जाना तो आनन्दतिरेक से पूरित हो गया मैं प्रतीक्षा में रहता हूँ कि कब मेल आएगा कब मैं विचरण करूं . प्रवक्ता सब के विचारों कि शरणस्थली है
    बहुत-बहुत बधाई

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  9. डॉ. मधुसूदन

    मधुसूदन उवाच

    प्रवक्ता= स्वस्थ बहस|
    मुझे प्रवक्ता इस लिए भाता है, कि प्रवक्ता हिन्दी का भी प्रवक्ता है , और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से, राष्ट्र हित की दृष्टि से इसका सम्पादन किया जाता है|
    हरेक विचारधारा के लेखों को यहां उचित स्थान दिया जाता है|
    बिकाउ मिडिया की मरूभूमि के बीच यह एक छायादायी बटवृक्ष सा खडा है।
    बीके हुए मीडिया के समय, यह समय की मांग भी है|
    इसी भांति प्रगति होती रहे; शुभ कामनाएं ॥

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  10. vimlesh

    प्रवक्ता परिवार की जितनी भी तारीफ की जाय कम ही है .

    निष्पक्ष प्रकाशन के लिए संजीव सिन्हा जी वा उनकी टीम को बहुत बहुत साधुवाद .

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  11. dinesh singh

    प्रवक्ता से रूबरू होकर अत्यन्त खुशी हुई। यह एक अभिनव,सार्थक ऒर युग प्रवर्तक कदम साबित होगा।

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  12. rajeshwari

    प्रवक्ता के लेख बहुत ही ज्वलंत और विचारशील होते हैं. साथ ही जानकारी से सराबोर.

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