लेखक परिचय

अशोक बजाज

अशोक बजाज

श्री अशोक बजाज उम्र 54 वर्ष , रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से एम.ए. (अर्थशास्त्र) की डिग्री। 1 अप्रेल 2005 से मार्च 2010 तक जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष पद का निर्वहन। सहकारी संस्थाओं एंव संगठनात्मक कार्यो का लम्बा अनुभव। फोटोग्राफी, पत्रकारिता एंव लेखन के कार्यो में रूचि। पहला लेख सन् 1981 में “धान का समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत” शीर्षक से दैनिक युगधर्म रायपुर से प्रकाशित । वर्तमान पता-सिविल लाईन रायपुर ( छ. ग.)। ई-मेल - ashokbajaj5969@yahoo.com, ashokbajaj99.blogspot.com

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-अशोक बजाज

बिहार के चुनाव परिणाम चौकाने वाले है ,राज्य के मतदाताओं ने बहुत ही अप्रत्याशित परिणाम दिया है .15वीं विधानसभा के गठन के लिए हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को इस चुनाव में जबरदस्त सफलता मिली है .जनता दल (युनाइटेड)और भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कर लगभग सभी दलों का सुफडा साफ हो गया है .इस चुनाव में कांग्रेस और लालू को बहुत बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस तो पहले से ही सिमटी हुई थी ,उ.प्र.और बिहार दोनों बड़े राज्यों से वह उखड़ चुकी है .केंद्र सरकार वर्तमान में ऐसा कोई काम ही नहीं कर पा रही है जिससे उसका जनाधार बढ़े .देश की सबसे पुरानी पार्टी का सबसे बुरा हाल है . इस हालत में लालू यादव उस डूबती नव में सवार होने का प्रपंच करते है जिसे जनता ने पसंद नहीं किया ,ये वही लालू है जिसने जयप्रकाश नारायण के समग्र क्रांति का झंडा उठा कर कांग्रेस के खिलाफ शंखनांद किया था लेकिन तथाकथित सांप्रदायिकता के मुद्दे को लेकर वे कांग्रेस से चिपक गए और रेल मंत्री बन गए . यदाकदा प्रधानमंत्री के लिए अपना नाम उछालते रहे . बिहार की जनता ने ऐसा करारा जवाब दिया कि प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालू यादव अपनी पत्नी को विधायक भी नहीं बनवा सके . लगता है अब लालू के दिन लद चुकें हैं .

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अगुवा व निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास के रथ पर सवार होकर जो तीर छो़डा वह निशाने पर ही लगा. नीतीश के तीर से चली इस आंधी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद के “लालटेन” की लौ बुझ गई तो लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष रामविलास पासवान की “झोप़डी” भी उ़ड गई.कांग्रेस के “हाथ” को तो उसने चुनावी परिदृश्य से ही ओझल कर दिया. पहली बार विकास की स्वाद चखने वाली बिहार की जनता ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को फिर से सिर आंखों पर बिठाया और विकास को और आगे ले जाने की फिर से उन्हें जिम्मेदारी सौंपी . विकास के साथ-साथ नीतीश ने जो चुनावी सोशल इंजीनियरिंग की यह उसी का कमाल था कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर तीन चौथाई बहुमत हासिल किया. निर्वाचन आयोग से प्राप्त आंक़डों के मुताबिक इस चुनाव में जनता दल (युनाइटेड) को 115 सीटें मिलीं जबकि उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 91 सीटें मिलीं. दोंनों दलों को 206 सीटों पर जीत मिली है, जबकि राजद (22) और लोजपा (3) गठबंधन 25 सीटों तक सिमटकर रह गया. पूर्व मुख्यमंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी राब़डी देवी राघोपुर और सोनपुर दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव हार गई हैं.

कांग्रेस तो केवल खाता ही खोल पाई है उसे मात्र चार सीटें ही मिल सकीं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महबूब अली कैसर और साधु यादव को भी चुनाव में हार झेलनी प़डी है.भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को चुनाव में महज एक सीट से संतोष करना प़डा जबकि झारखण्ड में भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन सरकार चला रही झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार में भी अपना खाता खोल लिया. उसे चकाई सीट पर जीत मिली। छह सीटें अन्य के खाते में गई.- अशोक बजाज

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7 Comments on "प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालू यादव के दिन अब लद चुकें हैं"

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Anubhav Singh
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@महेंद्र मिश्र जी आप की टिप्पणी अत्यंत खेदजनक लगी कारण आपका विचार की अब ‘लालू जी भैंस लगायेंग ‘ क्या आप कहीं फेल हो जायेंगे तो पंडिताई शुरू कर देंगे या गंगा किनारे जनेऊ बेचेंगे नहीं न तो ऐसी ओच्छी मानसिकता का परिचय न दे धन्यवाद

अशोक बजाज
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@ डॉ. राजेश कपूर जी ,
आपका आंकलन सही है सचमुच कि ” एक आशा का संचार हुआ है कि अभी भी हालात लोक तंत्र के माध्यम से सुधर सकते है.”

डॉ. राजेश कपूर
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कोई समझे तो बिहार का सन्देश है—- – मुस्लिम मत दाताओं ने कांग्रेस के सारे आर्थिक पॅकेज उपेक्षित कर के कांग्रेस को नकार दिया है. – भाजपा को मुस्लिम विरोधी बतलाने की मुहीम बे असर रही है. – अप्रासंगिक होता भ्रष्टाचार बनाम स्वच्छ प्रशासन का मुद्दा सशक्त रूप से उभरा है. जब की लगाने लगा था कि बढ़ाते अस्सीमित भ्रष्टाचार के प्रति समाज संवेदन हीन होने लगा है. – जातिवादी, गुंडई, बईमानी की राजनीती करने वालों के लिए ये चुनाव राजनैतिक मृत्यु का पैगाम लेकर आये हैं. लोकतंत्र पर समाप्त होते विश्वास में जीवन फूंकने का काम किया है इन… Read more »
अशोक बजाज
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@ महेंद्र मिश्र जी ,
जनमत के आगे सभी को झुकना पड़ता है , धन्यवाद . – अशोक बजाज रायपुर

अशोक बजाज
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@ विजय सोनी जी अधिवक्ता दुर्ग , आपका आंकलन बिलकुल सही है कि ” केवल लालू ही नहीं हवा -हवाई टाइप के सभी नेताओं को जनता अब स्वीकार नहीं करेगी -जनता अब डेवलपमेंट के लिए वोट करेगी -,केवल चटपटी बातें अब नहीं चलेगी ,भ्रष्ट आचरण के लिए प्रजातंत्र में कोई स्थान नहीं है .” देश के मतदाता धीरे धीरे परिपक्व होते जा रहें है ,बिहार का परिणाम तो यही कहता है . धन्यवाद . – अशोक बजाज रायपुर .
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