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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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अवनीश सिंह भदौरिया
पंजाब में पिछले कई वर्षों से आतंकी हमले होते आ रहे हैं। पांच माह पहले गुरदासपुर जिले के दीनानगर थाने पर आतंकी हमला शायद ही कोई भारतीय  भूला हो? अब फिर उन्हीं घटनाओं की पुनरावृत्ति करते हुए सीमापार से आए सेना की वर्दी में आतंकियों ने पठानकोट एयरफोर्स बेस को निशाना बनाने की कोशिश की। सीमा से मात्र 20 किलोमीटर दूर आतंकवादियों ने पठानकोट एयरबेस पर सुबह तीन बजे धावा बोला, लेकिन वे असफल रहे। तीन दिन चले मुठभेड़ में पांच आतंकी मारे जा चुके हैं। दुख की बात यह है कि हमारी सेना के वीर जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपनी जिंदगी की आहुति दी।

ऐसे वीर जवानों को पूरा देश सलाम करता है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे ही हमारे वीर जवान बलि चढ़ते रहेंगे और हम देखते रहेंगे? सोचने की बात यह भी है कि सीमापार से आतंकी हमारे देश कैसे आ जाते हैं? इसके पीछे क्या मनसूबे हैं? कुछ वर्षों से यही देखने को मिल रहा है कि बार-बार ऐसे आतंकी हमलों से पंजाब दहलता आया है। हमारी सरकार कुछ नहीं कर पाई, सिवाय चंद लफ्ज कहने के अलावा। आज यह मोदी सरकार से पूछना चाहिए कि जब सरकार बनाने की बात थी, तब मोदी जी ने भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक सभी मामलों में बड़े-बड़े वादे किये थे, लेकिन अभी तक उन वादों का कोई असर देखने को नहीं मिला है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह हमेशा एक ही बात दोहराते रहते हैं कि हम आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देंगे, हम किसी से नहीं डरते हैं। सवाल यह है कि आतंकी हमले होने से पहले ही इन्हें क्यों नहीं रोका जा सका है? हमारी खुफिया सुरक्षा एजेंसियां क्या कमजोर हैं?
सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 24 घंटे पहले ही आतंकी हमले होने का अलर्ट जारी किया था, लेकिन फिर भी हम आतंकियों को रोक पाने या घुसपैठ करते ही मार गिरा पाने में नाकाम रहे। इसका नतीजा यह है कि हमारी सेना के इतने सारे जवान शहीद हो गए। इस आतंकी हमले ने जहां पाकिस्तान को सवालों के घेरे में ला दिया है, वहीं पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस हमले का कनेक्शन कहीं न कहीं पाकिस्तान से जुड़ा है। पाकिस्तान में आतंकियों ने एक घंटे बात की थी।
पठानकोट एयरबेस हमले के पीछे आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद का हाथ होने की आशंका है। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, न ही इस संबंध में कोई पुख्ता सुबूत मिले हैं। आप को बता दें कि इससे पहले 1965 में हुए भारत-पाक युद्ध के दौरान भी पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन को निशाना बनाया गया। 6 सितंबर 1965 को जब पाकिस्तान ने एयरफोर्स स्टेशन पर बम गिराए, तो उससे एयरपोर्ट के हैंगर पर खड़े दो लड़ाकू विमानों को नुकसान हुआ था। एशिया के नक्शे में पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन दुश्मन के लिए चिकन नेक कहा जाता है। पाकिस्तान हमेशा इस इलाके की जासूसी करवाता आया है।
यह स्टेशन पाकिस्तान से जहां करीब पच्चीस किलोमीटर की दूरी पर है, वहीं चीन तक भी यह स्टेशन निगरानी करने में दक्ष है। कारगिल युद्ध के दौरान भी इस एयरफोर्स स्टेशन ने पाकिस्तान की कमर तोडऩे के लिए बेहतरीन भूमिका निभाई थी। यही कारण है कि यह एयरफोर्स स्टेशन दुश्मन की नजर में हमेशा किरकिरी बना हुआ है। अपने नापाक मंसूबों को सिरे चढ़ाने के लिए कभी पाकिस्तान इस स्टेशन की जासूसी करवाता है, तो कभी आतंकी हमला करवा कर यह संकेत देने की कोशिश करता है कि वह भारत के चप्पे-चप्पे से वाकिफ है। पिछले साल एयरफोर्स कर्मचारी सारजेंट सुनील को जासूसी में शामिल करके उससे एयरफोर्स स्टेशन की जानकारी लेना भी इसी का हिस्सा है।
पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले की पाकिस्तान ने कड़े शब्दों में निंदा की है। इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक बयान में इस घटना में मारे गए सैनिकों के परिजनों के प्रति संवेदना जाहिर की गई है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि हाल में दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं। पाकिस्तान दक्षिण एशिया से आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने में भारत का पूरी तरह से साथ देने को प्रतिबद्ध है।
हम पंजाब में आतंकी हमलों की बात करें, तो यह सिलसिला कई वर्षों से चलता आ रहा है। 1 जनवरी 2001 में हिमाचल प्रदेश से लगती पंजाब सीमा पर आतंकियों के गुट ने डमटाल स्थित फायरिंग रेज पर हमला किया था। इस हमले में सेना के तीन जवान शहीद और पांच लोग घायल हुए थे। फिर एक माह बाद 1 मार्च 2001 गुरदासपुर जिले में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर 124 मीटर लंबी भूमिगत सुरंग का पता चला। इसके 10 माह बाद 31 जनवरी 2002 में होशियारपुर जिले के पटराना में पंजाब रोडवेज की एक बस में आतंकियों द्वारा किए गए बम विस्फोट में दो लोगों की मौत और 12 लोग घायल हो गए थे। 31 मार्च 2002 को लुधियाना से 20 किलोमीटर दूर दोराहा में फिरोजपुर-धनबाद एक्सप्रेस ट्रेन में हुए बम धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी और 28 लोग घायल हुए थे।
28 अप्रैल 2006 में जालंधर बस टर्मिनल में हुए बम धमाके में आठ लोग घायल हो गए थे। 14 अक्टूबर 2007 में लुधियाना के एक सिनेमाघर में हुआ बम धमाके में सात लोगों की मौत हो गई थी। और 40 लोग घायल हुए थे। 27 जुलाई 2015 में गुरदासपुर जिले के दीनानगर पुलिस चौकी पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। उसमें पंजाब पुलिस के एक अधिकारी समेत सात लोगों की मौत हो गई थी और पुलिस चौकी से पहले आतंकियों ने भरी बस पर गोलीबारी की थी और तीनों आंतकी हमले में मारे गये थे।
(लेखक दैनिक न्यू ब्राइट स्टार में उप संपादक हैं।)

 

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1 Comment on "आंतक के साए में रहा पंजाब"

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आर.सिंह
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आपलोगों ने शायद एक खास बात की ओर ध्यान नहीं दिया.जितने बयान आये हैं,चाहे वे बयान आतंकवादी संगठन की तरफ से हों या पाकिस्तान सरकार की ओर से,वे सब आख़िरी आतंकवादी के मारे जाने की खबर की पुष्टि होने के बाद हीं आये हैं.

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