लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

Posted On by &filed under कविता.


वर्षा !

वर्षा !

तुमसे करूँ विनती एक,

रुक ना जाना एक जगह पर,

सबको प्यार बराबर देना।

वर्षा !

इतना जल भी ना दे देना जो,

घर घरोंदे,गाँव गली, चौबारे,

खेत किसान , मवेशी सारे,

जल मग्न हो जायें।

नदियाँ उफ़ान लेले

और नाव उसी मे डूबें।

भूखे प्यासे लोग,

पानी मे घिरकर,

पेड़ों पर रात गुज़ारें।

वर्षा !

तुम हर छोर पर जाना,

पूरब, पश्चिम,उत्तर,दक्षिण,

सबकी प्यास बुझाना,

कहीं का रस्ता भूल न जाना,

सब पर प्यार लुटाना,

कहीं भी कुऐं ना सूखें,

नदियाँ झीलें भरी रहें,

चटके नहीं दरार धरती पर,

कहीं न सूखी धूल उड़े।

वर्षा !

तुम आगे बढ़ना,

भूल ना जाना मेरी विनती,

सबको प्यार बराबर देना।

वर्षा !

बरसो छम छम छम,छम।

बादल गरजो, बरसो थम थम।

प्यास बुझाओ धरती की तुम।

Leave a Reply

2 Comments on "वर्षा !-बीनू भटनागर"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
PRAN SHARMA
Guest

दोनों कवितायें मन को प्रभावित करती हैं .

dr dhanakar thakur
Guest
अच्छी भावना है आपकी लीजिये इसमें मैं भी कुछ जोड़ देता हूँ वर्षा ! वर्षा ! तुम, रुकते नही हो एक जगह पर, देते सबको प्यार बराबर । वर्षा ! कभी इतना जल दे देते हो घर घरोंदे,गाँव गली, चौबारे, खेत किसान , मवेशी सारे, हो जाते जल मग्न । नदियाँ उफ़ानटी नाव डूबता भूखे प्यासे लोग, पानी मे घिरकर, पेड़ों पर रात गुज़ारते । वर्षा ! तुम हर दिशा में जाते , पूरब, पश्चिम,उत्तर,दक्षिण, सबकी प्यास बुझाते कहीं का रस्ता भूल नही भूलते सब पर प्यार लुटाते कहीं भी कुऐं ना सूखें, नदियाँ, झीलें भरी रहें, दरार कंही चटके… Read more »
wpDiscuz