लेखक परिचय

रमेश पांडेय

रमेश पांडेय

रमेश पाण्डेय, जन्म स्थान ग्राम खाखापुर, जिला प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन में शौक। सामयिक समस्याओं और विषमताओं पर लेख का माध्यम ही समाजसेवा को मूल माध्यम है।

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-रमेश पाण्डेय-
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देश में बलात्कार के मामलों को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह राजनीति से हटकर इस पर गंभीर दृष्टिकोण पेश किया था वह बदायूं में हाल ही में हुई सामूहिक बलात्कार की घटना पर केंद्र सरकार की चिंता से जाहिर होता है। उत्तर प्रदेश की सपा सरकार का नजरिया इस विषय में निराशाजनक रहा। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले में 11 साल की मासूम बच्ची के साथ 6 व्यक्तियों द्वारा किए गए दुष्कर्म के मामले में राज्य सरकार और पुलिस की लापरवाही भी कम चिंताजनक नहीं है। 17 माह में इस मासूम को 20 ऑपरेशनों से गुजरना पड़ा है। दिल्ली के एआईआईएमएस में इन ऑपरेशनों के बाद वहां राजस्थान भवन में रह रही यह पीडि़ता मामले की सबसे महत्वपूर्ण गवाह है। इसकी सुरक्षा और हिफाजत सरकार का दायित्व है। इसे दिल्ली से बुलाने के लिए सम्मन तो जारी हो गए, वह सीकर लौट भी आई, लेकिन निराश्रित और असुरक्षित है। आरोपी दबंग हैं। यहां तक कि वह जब दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थी तब वहां भी धमकियां दी जा रही थीं। इस जघन्य दुष्कर्म में कथित आरोपियों की संख्या छह बताने के बावजूद, पुलिस ने केवल चार के विरुद्ध ही आरोप पत्र दायर किया है। दो को साफ छोड़ दिया गया। इन चार के विरोध में भी मामले को इतना लचर किया गया है कि दो कि जमानत आसानी से हो गई, इस समय दो ही जेल में हैं। इन दो के मामले में भी शिनाख्त परेड में ऐसी स्थितियां उत्पन्न की गई हैं कि मामले के छूट जाने की गुंजाइश पैदा कर दी गई हैं।

मामला सत्र न्यायालय में गवाही में हैं। यहां सवाल सरकार के गवाह की सुरक्षा के साथ बलात्कार पीड़िता के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की जिम्मेदारी का भी है। जिस तरह यह सही है कि बलात्कार के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए उसी तरह पीड़िता किस जाति या संप्रदाय की है यह विषय भी नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में वर्मा कमेटी के अनुसार मुकदमे का विचारण त्वरित होना चाहिए और मामले की तफ्तीश में किसी प्रकार की कोई ढील नहीं होनी चाहिए। बलात्कार के मामलों में लिंक या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, खासकर मेडिकल साक्ष्यों का निर्णायक महत्व होता है। पुलिस या जांच एजेंसी का काम है कि यदि कोई अपराध घटित हुआ है तो असली अपराधियों को सामने लाए और न्यायालय में ठोस सबूतों के साथ उन्हें पेश करें।

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1 Comment on "देश में ‘दरिंदे’ बेखौफ"

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डॉ. मधुसूदन
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क्या बलात्कार का कारण समस्त वातावरण नहीं है?
क्या समाचार पत्रों में दिखाए जाते वासना प्रेरक चित्र नहीं है?
दूरदर्शन पर प्रसारित विविध कार्यक्रम नहीं है?
हमारा युवा पाँचो इंद्रियों से संस्कार ग्रहण करता है; जिसका कुल जोड, सामूहिक परिणाम उसके विचारों पर होता है।
और व्यक्ति के विचार ही आचार को जन्म देते हैं।
और उसीका फल बलात्कार है।
अंतिम छोर का परिणाम “बलात्कार” सारी कार्य कारण श्रृंखला की अंतिम कडी है। उसी को कारण मान लेना अपनी ही आँखों में धूल झोंकने जैसा है।

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