लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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Jammat-e-ulemaदेश से बढकर कोई चीज नहीं है, मां से बढकर कोई नहीं है, सच्चाई और ईमान की राह पर चलना चाहिए, इस तरह की बातें बचपन से सुनते सुनते कान पक गए हैं। केद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम, केंद्रीय संचार मंत्री सचिन पायलट, चर्चित योग गुरू बाबा रामदेव, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, स्वामी अग्निवेश, शियाओं के धर्मगुरू डॉ.काल्बे सादिक आदि की उपस्थिति में देवबंद में जमीअत ए उलेमा ए हिन्द की 30वीं महासभा में देशप्रेम का जज्बा जगाने वाले गीत बंदेमातरम पर विवाद खडा किया जाना शर्मनाक ही कहा जाएगा।

आनंदमठ पुस्तक के बंकिमचंद चटोपाध्याय द्वारा 1876 में रचित ”वन्दे मातरम” को 1896 में पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। यह गीत आरंभ से ही विवादित रहा है। इस गीत के पहले दो अंतरों को छोडकर शेष में धरती माता की तुलना मां दुर्गा से की गई है। संभवत: यही कारण है कि वंदेमातरम के बजाए ”जन गण मन” को राष्टगान बनाया गया था।

इस महासभा में इतनी बडी बडी हस्तियों के सामने वंदे मातरम के खिलाफ फतवा जारी किया जाना आश्चर्यजनक है। उससे भी आश्चर्यजनक इन तथाकथित बडी हस्तियों की चुप्पी है। देश के गृहमंत्री जैसे जिम्मेदार और महत्वपूर्ण पद पर आसीन पी.चिदम्बरम का यह कहना भी हास्यास्पद है कि उनके सम्मेलन में रहते इस तरह का कोई फतवा जारी नहीं किया गया है। सवाल तो यह है कि जब संचार माध्यमों से उन्हें इस बात की जानकारी मिल ही चुकी है, तब उनकी इस बारे में क्या प्रतिक्रिया है।

जमीयत उलेमा ए हिन्द के मौलाना मुइजुद्दीन का कहना है कि इस गीत की कुछ लाईने इस्लाम के खिलाफ हैं। इस्लाम मां के सामने नतमस्तक होने की इजाजत नहीं देता। मुसलमान संगठनों, नेताओं और मौलाना मौलवियों ने देवबंद के इस फतवे को सही ठहराया है। यक्ष प्रश्न तो यह है कि इस गीत की रचना के 133 एवं आजादी के बासठ सालों के बाद यह गीत गैर इस्लामी करार कैसे दिया जा सकता है।

इससे पूर्व जिन भी इस्लाम के अनुयायियों ने इसे गाया होगा क्या उन्हें काफिर करार दिया जाएगा। मध्य प्रदेश में तो भाजपा सरकार द्वारा इसे अनिवार्य कर दिया गया है। हर माह सरकारी कार्यालयों में वंदे मातरम गाया जाता है। देवबंद के इस फतवे के बाद इस प्रदेश में क्या हालात बनेंगे कहा नहीं जा सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में हुए इस विवाद को भाजपा ने लपकने में देर नहीं की। भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने तत्काल इस पर अपनी प्रतियिा देते हुए कहा कि चिदंबरम की मौजूदगी का मतलब यह है कि कांग्रेस ने यह फतवा स्वीकार कर लिया है। राजनैतिक तौर पर तो नकवी ने बयान दे दिया किन्तु फतवे के बारे में उन्होंने चुप्पी साध ली।

इस महासभा में अनेक हस्तियां मौजूद थीं किन्तु किसी ने भी इस फतवे के बारे में कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा है। चर्चित स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव ने तो बाजी ही मार ली है। इस महासभा के कवरेज में बाबा रामदेव छाए हुए हैं। इलेक्टनिक मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया में पहले पेज पर बडी बडी तस्वीरें छपीं हैं बाबा रामदेव की। लगता है बाबा रामदेव का मीडिया मेनेजमेंट बडा ही गजब का है।

देश की दुर्दशा, काले धन, बिगडी व्यवस्था पर जब तब बयानबाजी करके चर्चाओं में रहने वाले बाबा रामदेव जिन्होंने हाल ही में राजनीति में कूदने के संकेत दिए थे, ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है। हर कोई जानता है कि मुसलमान इस देश में बहुत ही तगडा वोट बैंक है, इसलिए मुसलमानों से जुडे मामले में बोलने से राजनेता परहेज ही किया करते हैं।

देवबंद के कुछ फतवों को छोडकर शेष फतवे काफी अच्छे हैं। कुछ माह पूर्व कहा गया था कि गाय काटना इस्लाम के खिलाफ है, बावजूद इसके देश में गोकशी के अनगिनत प्रकरण सामने आ रहे हैं। शरियत को चाहिए कि पहले वह अपने फतवों का पालन सुनिश्चित करवाए, साथ ही साथ देशहित के खिलाफ बयानबाजी से बचना चाहिए।

भारत देश में हर किसी को अपना धर्म मानने की स्वतंत्रता है। हर कोई अपने तौर तरीके से रहने के लिए स्वतंत्र है, किन्तु इस सबके उपर भारत गणराज्य का संविधान है। संविधान की व्यवस्थाओं को मानना हम सबकी बाध्यता है। वंदेमातरम गीत किसी आम भारतीय फूहड चलचित्र का अश्लील गीत नहीं वरन देश प्रेम का जज्वा जगाने वाला शहादत का प्रतीक है।

भारत सरकार को चाहिए कि इस तरह के संवेदनशील मामले में तत्काल अपना रूख स्पष्ट करते हुए इस विवाद पर विराम लगाए वरना यह मामला एक चिंगारी के रूप में भडका है, राजनैतिक नफा नुकसान के चलते इसे शोला और आग का दरिया बनने में समय नहीं लगेगा, तब आग के दानावल में समूचा देश झुलस जाएगा और उसे बुझाना टेडी खीर ही साबित होगा।

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35 Comments on "राष्टभक्ति पर विवाद! – लिमटी खरे"

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mayank
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rastra bhakti kise kahte hain kon janta hai sahib

shivesh
Guest

thakrey jee ke rastarabhakte dakhi hai na uske bad bhi bharat sarkar ka dhul mul ravaia gazab hai bhai

अहतशाम त्यागी
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अहतशाम त्यागी
वन्दे मातरम! ये गीत है या नगमा गजल है या ग्रन्थ जो भी है जैसा भी है मेने आज तक नहीं गया तो किरपा करके कोई साहब मुझे ये बता दे की में देशद्रोही हूँ या देशभक्त? मेरे ख्याल से इसे गाने से न तो कोई देशभक्त हो सकता है और न ही देशद्रोही वन्देमातरम गाने वाले कुछ महारथी (मालेगाव धमाको) में आतंकवादी घोषित हो चुके हैं ये पूरा हिंदुस्तान जनता है मने या न मने ये अलग बात है और न गाने वाले ऐसे अनगिनत हैं जिन्होंने अपने देश की रक्षा करने के लिए सीमा पर अपने प्राण गवा… Read more »
VIKAS
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MUJHE YE BAAT SAMAJH NAHI AATI KI HAM LOG KYO IN DHARMANDH LOGONKI BATOPAR DHYAN DE ADHINK SOCH WALE MUSLIM LOG INPAR KATAI VISHAWAS NAHI KARATE HAI ! DHARMKE VICHAR ACHHE HAI LEKIN INSAN UTANEHI BURE HAI HAI ! HAME KUCHH SAAL KI JINDAGI MILI HAI USME BHI ANGINAT DHARM JAT HAI MUSLIMME BHI KAI DARJAN GUTH HAI SIKH DHARM,HINDU DHARM SABHI GUTHOSE BAHRE PADE HAI ! AGAR BHAGVAN HOTA TO SUNAMI JAISI AUR BHUKAMP JAISEI TABAHI NAHI AATI JAB KOI BACHTA HAI TO KAHATE HAI BHAGWAN NE BACHAYA LEKIN FIR SAWAL YE AATA HAI KI MUSIBATME DALA KISNE ???… Read more »
MANAV
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ये दुनिया बनकर लाखो साल हुए है और इस धरतीमाता ने हमें और सभी जिव-जंतु को पला पोसा है ! इसलिए हमारी धरती माँ का दर्जा सबसे ऊपर है और हम सभी जीव उनके जिंदगीभर अहसान नहीं चूका सकते ! लाखो वर्ष के इतिहास के हिसाबसे धर्म का जन्म तो कुछ ही मिनिट पहले हुवा है और यही धर्म [मै सभी धर्मकी बात कर रहा हूँ ] हमें शिखायेगा की किसे सबसे ऊपर मानना है ! मुझे लगता है जबसे धर्म पैदा हुवा तब से ही मानवका पतन शुरू हुवा है ! लोग एक दुसरेके दुश्मन बन गए है !… Read more »
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