लेखक परिचय

डॉ. राजेश कपूर

डॉ. राजेश कपूर

लेखक पारम्‍परिक चिकित्‍सक हैं और समसामयिक मुद्दों पर टिप्‍पणी करते रहते हैं। अनेक असाध्य रोगों के सरल स्वदेशी समाधान, अनेक जड़ी-बूटियों पर शोध और प्रयोग, प्रान्त व राष्ट्रिय स्तर पर पत्र पठन-प्रकाशन व वार्ताएं (आयुर्वेद और जैविक खेती), आपात काल में नौ मास की जेल यात्रा, 'गवाक्ष भारती' मासिक का सम्पादन-प्रकाशन, आजकल स्वाध्याय व लेखनएवं चिकित्सालय का संचालन. रूचि के विशेष विषय: पारंपरिक चिकित्सा, जैविक खेती, हमारा सही गौरवशाली अतीत, भारत विरोधी छद्म आक्रमण.

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ की टिप्पणी के जवाब में डॉ. राजेश कपूर की टिप्पणी 

डॉ. मीना जी, आपकी नीयत पर पाठकों को बार-बार संदेह होता रहा है. आज आपने एक बार फिर से साबित कर दिया कि सचमुच आपकी नीयत ही सही नहीं है. मेरे और इंजी.दिवस गौड़ जी के उकसावे में (सम्पादक महोदय के अनुसार मेरे उकसावे में) आकर उत्तर देने की कृपा की पर उत्तर के नाम पर मैदान छोड़ कर भागते नज़र आये. ऐसा लचर उत्तर दिया जिसकी आशा आपसे तो बिलकुल न थी. प्रो. कुसुम लता केडिया जी जैसी विदुषी के तथ्यों का उत्तर तो आपने दिया ही नहीं, वह क्षमता भी आपकी नहीं.

– आप किसी समाचार पत्र के सम्पादक है, किसी संस्था के प्रमुख हैं जिसके ५००० सदस्य हैं और वह संस्था १८ प्रदेशों में काम करती है : यह आत्मश्लाघा आप पहले भी कई बार कर चुके हैं. मनु विज्ञान के ज्ञाताओं के अनुसार हीन ग्रंथी का शिकार लोग ऐसा करते रहते हैं. पाठकों ने और किसी को ‘प्रवक्ता’ ऐसा करते पहले कभी नहीं देखा.
– इतना लंबा लेख अपनी प्रशंसा में और मेरी आलोचना में लिखने की कृपा की, थोड़ा सा प्रयास केडिया जी के लेख में दिए तथ्यों को समझने में भी कर लेते. पर इतने उच्च स्तरीय लेख पर इतनी निम्न स्तर की टिपण्णी कर के आपने अपने स्तर को ही तो प्रकट किया है. …
– जरा स्पष्ट कर दें कि किसने आपको जान से मारने की धमकी दी है ? यह परम्परा तो आपके प्यारे जिहादियों और चर्च संचालित संगठनों की है जिस पर आप मौनसाधे रहते हैं. आपको तो हिन्दू, भगवा आतंकवाद ही नज़र आता है . उत्तर-पूर्वांचल में वर्षों से जो हत्याकांड अनेक दशकों से चर्च और बंगलादेशियो द्वारा चल रहे हैं, मूल निवासियों-हिन्दुओं की जो हत्याएं हो रही हैं, उसके पीछे कौन है ? हिन्दू आतंक का राग गाने वाले आप लोग इस पर चुप क्यूँ हैं ?
– जिस काल्पनिक मनुवाद का अविष्कार विदेशी चर्च ने अंग्रजी शासन काल में किया, जो आजतक भारत के किसी राज्य व समाज में कभी भी प्रचलित नहीं रहा ; आप उसी का ढिंढोरा पीट-पीट कर समाज में विद्वेष के बीज बोने की नीतियों पर बड़ी कुटिलता से चले जा रहे है. ये तो हिन्दू समाज है जो ऐसे लोगों को अनेक दशकों से सहन कर रहा है. फिर भी आप कहते हैं कि आपको जीवन का भय है….
– जीवन का भय तो हिन्दू समाज को है जिसे समाप्त करने के लिए एक नए कानून का प्रारूप ( लक्षित हिसा कानून ) सोनिया कांग्रेस (एन.ए.सी) ने बनाया है. आतंकवादियों को जेलों में जवाईयों की तरह पालने वाली कांग्रेस आपको धर्म निरपेक्ष नज़र आती है ? आप की वास्तविकता इन बातों से स्पष्ट हो ही जाती है.
– तभी तो देशभक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आपको शत्रु नज़र अता है. जिस संगठन के कार्यकर्ताओं ने सैकड़ों बार देश के लिए जीवन दाव पर लगाया, कांग्रेस की नेता इंदिरा जी द्वारा देश पर तानाशाही लादने के बाद यह संघ ही था जिसके लाखों कार्यकर्ता जेलों में गए थे.. भूकंप, सुनामी, पाक आक्रमण के समय ये संघी हैं जो तन-मन-धन से राष्ट्र \ सेवा में जुट जाते हैं.
– आपकी कांग्रेस ने कब ऐसा कोई काम किया ? या आपके ५००० सदस्यों ने ऐसा कुछ किया हो ? – आप कहते हैं कि आपको हिन्दू होने पर गर्व है. यदि आप असत्य नहीं बोल रहे ( जो कि आप पहले भी बोल चुके हैं ) तो ज़रा बतलाने की कृपा करें कि आपकी नज़र में हिन्दू धर्म की क्या विशेषताएं हैं? कौन से हिन्दू धर्म ग्रंथों की किन बातों से आप प्रभावित है ?
– महोदय आप पहले भी अनेक बार बड़ी असभ्यता का साथ कह चुके हैं कि सभी हिन्दू धर्म ग्रंथों में विष भरा हुआ है. श्रीमान आप स्वयं अपने फैलाए जाल में फंसते जा रहे हैं. टालने से अब काम नहीं चलेगा कि कभी इस पर लिखूंगा. आगे आपकी मर्ज़ी.
– आप हिन्दू धर्म व समाज के विरुद्ध लेखन व प्रचार के लिए पूर्णकालिक हैं कि नहीं यह तो पता नहीं पर ये जो इतने पाठक आपकी पोस्ट/लेख पढ़ कर उसपर इतनी कठोर टिप्पणिया करते हैं, उनका भी ये व्यवसाय नहीं, देश व समाज के प्रति लगाव, प्रेम है.
– तर्कसंगत कटु विरोध भी बुरा नहीं लगता. पर जो लोग निरंतर, पूर्वाग्रह से भरा भारत को हानि पहुचाने वाला लेखन अत्यधिक पूर्वाग्रह से करते हैं, उनके प्रति न चाहते हुए भी स्वाभाविक रूप से कुछ तो रोष पैदा हो ही जाता है.
– पर यदि दुराग्र न हो और नीयत सही हो तो संवाद स्वस्थ रहता है. पर क्या आप इमानदारी से संवाद कर रहे है ?
– आपने गांधी जी के बारे में काफी असभ्य भाषा का प्रयोग अनेक बार किया है. गांधी जी के बारे में आप अनेक बार एकांगी लेख व टिप्पणियाँ लिखते हैं. क्या यह इमानदारी है ? क्या आप नैतिकता और सभ्यता का पालन कर रहे हैं ? विश्व में गांधी जी का जो इतना सम्मान है, उनकी जो इतनी स्तुति होती है, क्या वह अकारण है ? क्या आपने उनकी छोटी सी पुस्तक ” हिंद स्वराज ” पढ़ी है ? यदि नहीं तो आपको उन पर टिपण्णी करने का नैतिक अधिकार नहीं है. यदि पढ़ी है तो भी आप इमानदार नहीं, आपकी नीयत में खोट है. अन्यथा उसकी सामग्री के प्रभाव से आप कैसे अछूते रहते ? श्रद्धेय दलाईलामा और रिम्पोछे के अलावा विश्व के अनेक विद्वानों ने इस पुस्तक की बड़ी प्रशंसा की है. कहें तो आपको भेंट में भेज दूँ ?
– आप कहते है कि आप किसी पत्र के सम्पादक है, किसी संस्था के प्रमुख हैं . फिर तो बहुत गैर ज़िम्मेदार हैं. आप गांधी जी के कमसे कम सत्य पर किये प्रयोगों व उक्त पुस्तक को तो पढ़ना चाहिए था, तब संतुलित लेख लिखते. गांधी जी जैसे महान व्यक्तित्व की एकांगी आलोचना तो केवल वे ही करेंगे जो विदेशी चर्च या उन जैसे किसी गुप्त अजेंडे को लेकर चल रहे हों. या वे जो किसी कारण से भ्रमित हों. आप किस वर्ग में हैं ?
– आप सचमुच स्वस्थ संवाद में विश्वास रखते हैं या केवल दिखावा है ? विरुद्ध विचार होने पर भी विरोधी विचार वाले को भारतीय संस्कृति में मित्र ही माना जता है. मेरे द्वारा आपको मित्र कहना आपको गलत क्यूँ लगा ? मैं तो सचमुच आपको आज भी मित्र ही मानता हूँ. सत्य ह्रदय से कहता हूँ कि यह दिखावा नहीं. इतने दिन से आपसे संवाद करते-करते अनेकों बार आप पर रोष तो हुआ पर शत्रु भाव तो बिलकुल नहीं है. मुझे तो आप मित्र ही लगते है.
– हर मानव से गलती हो रही है, हो जाती है. तो क्या उन्हें अपना शत्रु मानें ? दिल की बात कहता हूँ कि जिहादी या किसी आतंकवादी द्वारा आक्रमण किये जाने पर उसका पूरी शक्ती से प्रतिकार करूंगा. उससे रक्षा के भी सब उपाय करूंगा. पर शान्ति काल में उसके प्रति प्रेम व क्षमा भाव रखते हुए, उसे एक भटका मानव मान कर उसके परिवर्तन व कल्याण के लिए जो भी संभव हो वह करूंगा. मुझ अल्पग्य की दृष्टी में यही सही है और यही भारतीय संस्कृति है.
– आशा है कि स्वस्थ संवाद करते हुए मित्र भाव बनाए रखेगे. आपका शुभाकांक्षी.

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3 Comments on "‘सचमुच, आपकी नीयत ही सही नहीं है डॉ. मीणा जी’"

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GGShaikh
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गाँधी जी की प्रशंसा विश्वसनीय लगी…
दुहरे मापदंड भी नहीं आपके इज़हार में..
पलड़ा तो आपका ही भरी रहा डॉ.मीणा जी की तुलना में.

UTTAM PARMAR
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डॉ. कपूर साहब आप बिलकुल सच कह रहे है, डॉ. साहब इस देश को आप जेसे लोगो की बहुत जरूरत है. ये मीना जी ओसामा की …..दिग्विजय सिंह के छोटे भाई है,जो कांग्रेसी मानसिकता से ग्रसित है. दिग्गी और इन दोनों को मनोरोग विशेषज्ञ के पास भेजना है. आपका लेख बहुत अच्छा लगा. पता नहीं केसे-केसे लोग संपादक बन जाते है और मुझे तो हंसी आ रही है की वो ५००० लोग इनका साथ दे रहे है.

डॉ. राजेश कपूर
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आशा है कि हमारे मित्र डा. मीणा जी उपरोक्त प्रश्नों और आरोपों का उत्तर बिना शत्रु भाव के, तर्क पूर्ण ढंग से देंगे. ………निष्पक्ष रूप से इस टिपण्णी को प्रकाशित करने हेतु सम्पादक महोदय का आभार.

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