लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
रेड क्रॉस क्या है:- रेड क्रॉस के किसी भी देश में एक आपातकालीन प्रतिक्रिया संगठन है। यह युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के शिकार के लिए मानवीय सहायता प्रदान करता है। यह रक्त – जीवन का उपहार एकत्र करता है और यह जरूरतमंदों के लिए देता है। रेडक्रॉस एक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सी है जिसका प्रमुख उद्देश्य रोगियों, घायलों तथा युद्धकालीन बंदियों की देखरेख करना है। रेडक्रॉस आंदोलन के विकास में, विशेषकर 1919 ई. से किसी भी प्रकार की मानव पीड़ा को कम करने की विश्वव्यापी प्रवृत्ति की गणना रेडक्रॉस क्षेत्र के अंतर्गत मानी जाने लगी।
अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस के उद्देश्य:- सभी देशों में रेडक्रॉस आंदोलन को फैलाना रेडक्रॉस के आधारभूत सिद्धांतों के संरक्षक के रूप में कार्य करना नई रेडक्रॉस समितियों के संविधान से वर्तमान समितियों को सूचित करना सभी सभ्य राज्यों को जेनोआ अधिवेशन स्वीकार करने के लिए राजी करना अधिवेशन के निर्णयों का पालन करना इसकी होने वाली अवहेलनाओं की भर्त्सना करना क़ानून बनाने के लिए सरकारों पर दबाव डालना तथा ऐसी अवहेलनाओं को रोकने के लिए सेना को आदेश देना युद्धकाल में बंदियों की सहायता तथा अन्य पीड़ितों की सहायता के लिए अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सी का निर्माण करना बंदीशिविर की देखरेख, युद्धबंदियों को संतोष और आराम पहुँचना और सभी प्राप्य प्रभावों के प्रयोग से उनकी स्थिति सुधारने का प्रयत्न करना शांति तथा युद्ध के समय में भी सरकारों, राष्ट्रों तथा उपराष्ट्रों के बीच शुभचिंतक मध्यस्थ के रूप में कार्य करना युद्ध बीमारी अथवा आपत्ति से होनेवाले कष्टों से मुक्ति का मानवोचित कार्य स्वयं करना अथवा दूसरों को ऐसा करने के लिए सहायता देना माने जाते है । विश्व रेडक्रॉस दिवस रेडक्रॉस अभियान को जन्म देने वाले महान मानवता प्रे_red_crossमी जीन हेनरी डयूनेन्ट का जन्म 8 मई 1828 में हुआ था। उनके जन्म दिवस 8 मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस के रूप में पूरे विश्व में मनाया जाता है।
एक समय था जबकि युद्ध में घायल हुए सैनिकों की नियति में केवल मृत्यु शामिल होती थी या वे जीवन भर विकलांग बने रहते थे. युद्धों की विभीषिका से त्रस्त दुनिया में कोई किसी का रक्षक नहीं था और आपात स्थिति में नागरिकों की दशा बेहद दयनीय हो जाती थी. इन्हीं समस्याओं से निजात पाने के लिए और दुनिया भर के असहायों एवं पीड़ित मानवता की सहायता के लिए रेडक्रास अस्तित्व में आया. युद्ध में घायल सैनिकों की स्थिति से विचलित हेनरी डयूनेन्ट ने 1863 में जेनेवा में एक कमेटी बनाई जिसका नाम रखा रेडक्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (International Committee of the Red Cross) रखा गया. आईसीआरसी एक 25 सदस्यों की समिति थी जिसका काम था अंतराष्ट्रीय स्तर पर सैनिक युद्धों में घायल पीड़ितों की सहायता करना.
बिना भेदभाव के पीड़ित मानवता की सेवा करने का विचार देने वाले तथा रेडक्रॉस अभियान को जन्म देने वाले महान मानवता के प्रेमी हेनरी डयूनेन्ट का जन्म 8 मई, 1828 में हुआ था. वह एक स्विस बिजनेसमैन और महान समाज सेवक थे. उनके जन्म दिन 8 मई को ही विश्व रेडक्रॉस दिवस के रूप में पूरे विश्व में मनाया जाता है. इसे हम अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस के रूप में मनाते हैं. हेनरी ने समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया और पूरे विश्व के लोगों को मानवतावादी सेवक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने मानव सेवा के लिए लोगों के दिलों में संवेदना पैदा की. इसके लिए उन्होने कई तरह के अभियान को भी छेड़ा. सेवा कार्य के लिए उनके द्वारा गठित सोसायटी को रेडक्रॉस का नाम दिया गया. हेनरी के इसी असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1901 में उन्हें मानव सेवा के कार्यों के लिए पहला नोबेल शांति पुरस्कार मिला.
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रेडक्रॉस के लिए मानवता की रक्षा करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई. उस समय हर जगह मानवता का संहार किया जा रहा था. ऐसे में रेडक्रॉस द्वारा चिकित्सा सुविधाएं देना एक बड़ी समस्या थी. युद्ध के समय घायल सैनिकों को अपनी सेवा देना इनका प्राथमिक कार्य होता था. जब तक प्रथम विश्व युद्ध समाप्त नहीं हुआ तब तक रेडक्रॉस के हजारों स्वंयसेवक बिना भेदभाव के सैनिकों और आम नागरिकों की सेवा मे लगे रहे. इस तरह की चुनौतियों का सामना रेडक्रॉस को द्वितीय विश्व युद्ध में भी करना पड़ा. आईसीआरसी को इन्हीं असाधारण और उल्लेखनीय कार्यों की बदौलत 1917 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया. यह युद्ध में रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों के लिए सबसे बड़ा उपहार था.
द्वितीय विश्व युद्ध बाद विभिन्न देशों में खासकर अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों में आंतरिक झड़पें लगातार होती रहीं. इन झडपों में कई लोग मारे भी जाते थे और भारी संख्या में घायल भी होते थे. इन घायलों को अपनी सेवाए प्रदान करने में रेडक्रॉस सोसाइटी को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था. एक समय था जब किसी देश में मानवता को प्रताड़ित किया जाता था तो रेडक्रॉस को भी उस देश में जाने की अनुमति नहीं होती थी. अगर कोई देश अनुमति दे भी देता था तो वहां की सरकार के सहयोग के बिना लोगों की समस्याओं को दूर नहीं किया जा सकता था. किंतु आज स्थिति में काफी परिवर्तन आ चुका है. वर्तमान में रेडक्रॉस के लिए आतंकवाद एक बड़ी समस्या है. जब कभी उन्हें मानवता को सेवा देने की जरूरत पड़ी तो उनके सदस्यों का अपहरण कर लिया गया. इसके अलावा उन्हें अपने कार्यों के दौरान जान भी गंवानी पड़ी. वर्तमान में विश्व के 186 देशों में रेडक्रॉस सोसायटी कार्य कर रही है.
आज विश्व के अधिकांश ब्लड बैंकों की देख-रेख रेडक्रॉस एवं उसकी सहयोगी संस्थाओं के द्वारा किया जाता है. जगह-जगह रक्तदान शिविर आयोजित करके लोगों को रेडक्रास के बारे में जागरुक किया जा रहा है. रेडक्रास द्वारा चलाए गए रक्तदान जागरुकता अभियान के कारण ही आज थैलीसिमिया, कैंसर, एनीमिया जैसी अनेक जानलेवा बीमारियों से हजारों लोगों की जान बच रही है.
भारतीय रेडक्रॉस:-भारत का रेडक्रॉस के संबंध प्रथम विश्वयुद्ध से है। भारत में वर्ष 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के तहत भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी का गठन हुआ, तब से रेडक्रॉस के स्वंय सेवक विभिन्न प्रकार के आपदाओं में निरंतर निस्वार्थ भावना से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उस समय एक करोड़ रुपया, जो इस संस्था के लिए दान मिला था, इसका मूल धन बना। इस समय तक इसकी 18 प्रांतीय संस्थाएँ और 412 ज़िला शाखाएँ स्थापित हो चुकी हैं। बंगाल की भुखमरी से लेकर कई प्राकृतिक दुर्घटनाओं के समय इसने सहायता पहुँचाई है।
भारत में वर्ष 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के तहत भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी का गठन हुआ, तब से रेडक्रॉस के स्वंय सेवक विभिन्न प्रकार की आपदाओं में निरंतर निःस्वार्थ भावना से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. भारत में प्राकृतिक आपदा अपने चरम पर रहती है उसको देखते हुए रेडक्रास सोसाइटी मानवता की सेवा के लिए भारत के कोने-कोने में अभियान भी चलाती है।
रेड क्रॉस के चिन्ह का इस्तेमाल गैर-कानूनी:- रेड क्रॉस का जब नाम मन में आता है तो आप क्या सोचते हैं ? अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ? या अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस संस्था ? शायद नहीं । भारत में रेड क्रॉस शब्द का अर्थ है, गाँवों और शहरों में दौड़ने वाले एम्बुलेंस, अस्पताल, दवाई की दुकान पर लगे बैनर जिसपर रेड क्रॉस का चिन्ह बना होता है, इमरजेंसी सुविधाओं के लिए भी इसी चिन्ह का प्रयोग किया जाता है । लेकिन क्या आपको पता है की सफ़ेद पृष्ठभूमि में लाल रंग से 2 एक दूसरे को काटती रेखाएं यानी रेड क्रॉस के चिन्ह का इस तरह इस्तेमाल करना गैर-कानूनी है? क्या आप जानते हैं की इस रेड क्रॉस के चिन्ह का दुरुपयोग करने पर 500 रूपये का जुर्माना होने के साथ-साथ आपकी उस संपत्ति को भी जब्त किया जा सकता है, जिसपर रेड क्रॉस का चिन्ह बना हो । भारतीय संसद द्वारा मान्य 1960 के जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार रेड क्रॉस के चिन्ह के दुरुपयोग होने की दशा में 500 रूपये का जुर्माना और उस संपत्ति को भी जब्त किया जा सकता है जिसपर ये चिन्ह लगा हो । इसके अंतर्गत अस्पतालों, एम्बुलेंस, आदि पर प्रतिबन्ध तक लगाया जा सकता है । निचे दिए तस्वीरों में आप देख सकते हैं की किस प्रकार से धड़ल्ले से इस चिन्ह का दुरुपयोग होता है ।
जिनेवा कन्वेंशन के नियमों के मुताबिक रेड क्रॉस के चिन्ह का इस्तेमाल केवल संघर्ष या युद्ध की स्थिति में चिकित्सा कर्मिओं और उन वाहनों के लिए किया जाता है जिनमें चिकित्सा सम्बन्धी सामग्री हो । यह चिन्ह पीड़ितों के लिए एक उम्मीद की किरण होने के साथ-साथ उन लोगों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है सो विषम परिस्थितियों में भी पीड़ितों की सहायता के लिए जाते हैं . और यही कारण है की इस चिन्ह का इस्तेमाल केवल उन्हीं लोगों द्वारा होना चाहिए जो आधिकारिक रूप से इसके लिए चुने गये हों . इस चिन्ह का इस्तेमाल केवल सेना के चिकित्सक जवानों, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट मूवमेंट के द्वारा ही किया जा सकता है .अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के कई कोशिशों के बावजूद रेड क्रॉस के चिन्ह का गैर-कानूनी रूप से इस्तेमाल बदस्तूर जारी है । अपनी क्लिनिक पर रेड क्रॉस के चिन्ह लगाए डॉक्टरों को न पता है और न डर है की ये उन्हें मुसीबत में डाल सकती है, यहाँ तक की कई प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टरों को इस चिन्ह के बारे में पता भी नहीं है।अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति आप सभी नागरिकों से आग्रह करती है की इस चिन्ह का इस्तेमाल गैर-सरकारी, सरकारी, मेडिकल, डॉक्टर, एम्बुलेंस आदि के लिए न करें ।
डा. राधेश्याम द्विवेदी

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