लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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-बीनू भटनागर-
religion

धर्म क्या है?
केवल संस्कृति!
या फिर एक नज़रिया!
या फिर जीने की कला!
जो है जन्म से मिला।
धर्म जो बांट दे,
धर्म जो असहिष्णु हो,
तो क्या होगा किसी का भला!
व्रत उपवास ना करूं,
मंदिरों में ना फिरूं,
या पूजा पाठ ना करूं,
तो क्या मैं हिंदू नहीं?
रोज़ा नमाज़ ना करूं
तो क्या मैं मुस्लिम नहीं?
मै अधर्म ना करूं,
तो क्या मैं धार्मिक नहीं?
धर्म तो है जोड़ता,
नहीं है वो तोड़ता,
यही है धर्म निर्पेक्षता!
माथे पे हो चंदन टीका,
या हो जालीदार टोपी,
ईश तो सबका वही है,
नहीं तो है सिर्फ धोखा!

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1 Comment on "धर्म क्या है?"

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Himwant
Guest
धर्म वह है जो धारण करने योग्य है, जिसे धारण करने से, व्यक्ति, समाज एवं विश्व सुखी बनेगा. धर्म की राह विविधताओं से भरी है, वह जो चाहता है की सारे विश्व में उस एक सम्प्रदाय का शाषण हो, सब लोग वही करे और वैसा हीं सोचे जो उस पुरानी पवित्र (?) किताब में लिखा है तो वह मार्ग धर्म का मार्ग नहीं है. आप मंदीर जाए या मन के मंदीर में उस परम सत्य का दर्शन कर लें, यह विषय आपका व्यक्तिगत है. मुझे गर्व है अपनी जीवन पद्दति पर, लोग अब इसे धर्म कहने लगे है, मैंने भी… Read more »
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