लेखक परिचय

मनोज श्रीवास्‍तव 'मौन'

मनोज श्रीवास्‍तव 'मौन'

जन्म 18 जून 1968 में वाराणसी के भटपुरवां कलां गांव में हुआ। 1970 से लखनऊ में ही निवास कर रहे हैं। शिक्षा- स्नातक लखनऊ विश्‍वविद्यालय से एवं एमए कानपुर विश्‍वविद्यालय से उत्तीर्ण। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पर्यावरण पर लेख प्रकाशित। मातृवन्दना, माडल टाइम्स, राहत टाइम्स, सहारा परिवार की मासिक पत्रिका 'अपना परिवार', एवं हिन्दुस्थान समाचार आदि। प्रकाशित पुस्तक- ''करवट'' : एक ग्रामीण परिवेष के बालक की डाक्टर बनने की कहानी है जिसमें उसको मदद करने वाले हाथों की मदद न कर पाने का पश्‍चाताप और समाजोत्थान पर आधारित है।

Posted On by &filed under पर्यावरण, लेख.


himalayaभारत के विशाल भूखण्ड में हिमालय की बहुत ही अहम भूमिका है, जिसके आधार पर यह राष्ट्र विश्व में आकर्षक राष्ट्र के रूप में प्रसिद्ध है। पर्यावरण के दृष्टि से यदि देखा जाए तो उत्तरीय भाग में हिमालय का अंशदान पर्यावरण के एक विराट संरक्षक का है। वहीं पर दक्षिण भाग में कम ऊंचे परन्तु हरे-भरे वनों का भण्डार केरल के तटवर्ती इलाकों में भी है। इसके बाद भी भूकम्प का एक विशाल जाल है जो हिमालय के इर्दगिर्द इन दिनो मंडरा रहा है।

हाल ही में इरान और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित खार में 7.8 की रिक्टर तीव्रता का भूकम्प दिनांक 16 अप्रैल 2013 को आया जो कि पृथ्वी की सतह से 82 किलोमीटर नीचे स्थित था। इसीक्रम में चीन में दिनांक 19 अपैल 2013 को सिचुआन स्थित चेन्गुडु में 5.3 की रिक्टर तीव्रता का भूकम्प 13 किलोमीटर नीचे स्थित था। दिनांक 24 अपैल 2013 को हिन्दूकुश अफगानिस्तान में 5.6 रिक्टर तीव्रता का भूकम्प पृथ्वी की सतह से 62.1 किलोमीटर नीचे स्थित था।

भारत की भूमि भी इन भूकम्पों से अछूती नही रही क्योंकि इनका असर गुजरात दिल्ली उत्तर प्रदेश पंजाब हिमांचल प्रदेश जम्मू काश्मीर राजस्थान महाराष्ट्र आदि में हुआ जो कि लगभग आधे भारत के बराबर का क्षेत्र है। दिनांक 16 अप्रैल 2013 को ही सुबह गुवाहाटी क्षेत्र भी नहीं बचा था। यहां पर भी भूकम्प का प्रकोप हुआ। इन भूकम्पों की कड़ी कुछ इस तरह है कि यह स्वतः ही भारतीय भूभाग के हिमालय की ओर खिसकने की बात की पुष्टि करता है।

1 मई को भारत के जम्मू और हिमांचल की सीमा से लगे बादरवा इलाके में 5.8 की तीव्रता वाले भूकम्प का झटका आया जिसमें एक व्यक्ति की मौत जम्मू के किश्तवाड में हो गयी। जिसका प्रभाव क्षेत्र राजधानी दिल्ली समेत श्रीनगर, जम्मू, शिमला, चण्डीगढ़, पंजाब हरियाणा रहा। इसी क्षेत्र मे अप्रैल माह में 24 अप्रैल को 5.7 व 16 अप्रैल को 7.8 की तीव्रता का भूकम्प आया था जिसका केन्द्र इरान में था।

21 अप्रैल को सिचुआन प्रांत के लुशान में प्रातः 8.00 बजे 7.0 की तीव्रता का भूकम्प आया जिसमें 2500 हजार से भी अधिक लोग धायल हुए। लुशान और लोंगमेन में पुराना शहर होने के कारण काफी इमारतें ध्वस्त हुई। भुकम्प के दौरान काफी भूस्खलन हुआ जिससे सड़क मार्ग भी अवरूद्ध हो गया जिससे राहत कार्य भी प्रभावित हुआ। फिर भी उच्च स्तरीय राहत कार्य के चलते ही वहा घायलों को इलाज मुहैया कराने में सुविधा हुई और लोगों को सही समय पर राहत सुविधा के तौर पर 30,000 तम्बू 50,000 कम्बल व 10,000 बिस्तर 6000 राहतकर्मी के साथ मिल सके।

भूकम्प से बचाव के लिए सदैव ही तैयार रहना चाहिए। यहां पर कुछ उपाय सुझाये जा रहे हैं जिनका प्रयोग आप भूकम्प के दौरान कर सकते हैं और सुरक्षित रह सकते हैं। भूकम्प के दौरान किये जाने वाले उपाय इस प्रकार हैं- जैसे परेशान होकर हड़बडायें नहीं और शांत रहे। यदि आप इस दौरान घर के अन्दर हैं तो कांच व इससे बनी हुई वस्तुओं और लटकने वाली वस्तुओं से दूर रहे और मजबूत फर्नीचर या सीढि़यों के नीचे जाकर सुरक्षित करे मगर अपना धैर्य बनाये रखे। यदि आप घर से बाहर की ओर है तो इस दौरान आप बिजली के तारो और भवनों से दूरी बनाकर खुले या पार्क जैसे स्थान की ओर चले जाए। साथ ही बिल्डि़ग से बाहर की ओर भागने हेतु भगदड़ न मचायें। यदि आप वाहन चला रहे है तो वाहन को धीरे से सामान्य प्रक्रिया से रोक दे और जबतक कम्पन्न जारी है वाहन में ही बने रहें। यदि आप लिफ्ट में हैं तो यथाशीध्र ही लिफ्ट से बाहर की ओर आ जायें। यदि आप किसी टनल से गुजर रहे हैं तो शीघ्र ही वहां से बाहर की ओर निकलें। ऐसा करके आप सुरक्षित हो सकते है।

भूकम्प के उपरान्त किये जाने वाले उपाय इस प्रकार हैं- दुर्घटना से बचाव हेतु मदद की मांग करें।यदि आप को गैस के रिसाव होने, पानी के रिसाव का आभास हो तो अवश्य ही सूचित करें और यदि हो सके तो उसके बहाव के मुख्य स्थान से बन्द करने का प्रयास जरूर करें। गैस रिसाव की दशा में बिजली के किसी भी स्विच को आन न करे साथ ही आग का किसी भी प्रकार का प्रयोग न करें। ऐसे स्थान से फोन का प्रयोग भी न करे पहले उस स्थान से दूर सुरक्षित स्थान की ओर जाए फिर सूचना दें। किसी भी क्षतिग्रस्त इमारत से दूरी को बनाए रखे क्योंकि भूकम्प के बाद आने वाले झटकों से इमारत के गिरने का अन्देशा सदैव ही बना रहता है। यहा एक बात और भी ध्यान देने वाली है कि यदि भूकम्प प्रभावित क्षेत्र यदि समुद्र तटीय है तो ऐसी दशा में भूकम्प के बाद सुनामी का भी खतरा बना रहता है तो ऐसी स्थिति में आपको किसी उंचे स्थान की ओर चले जाना चाहिए जिससे कि जान के होने वाले नुकसान से बचा जा सके। यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि यदि कांकरीट की बनी बहुमंजिला इमारत पास हो उसमें शरण नहीं लेना चाहिए।

इन उपायों के किए जाने से जान माल के नुकसान में कमी की जा सकती है।

भारत एक धार्मिक देश है जिससे यहां पर लोग भूकम्प से बचने के लिए जम्मू परिक्षेत्र में जहां पर हिन्दुओं समुदाय द्वारा पूजा अर्चना की जा रही है वहीं पर मुस्लिम समुदाय द्वारा बलि देकर अल्लाह से दुआयें मांगी गयी हैं कि इस परिक्षेत्र को भूकम्प से बचाये रखे जिससे कि जान माल की क्षति न हो और लोग सुखी जीवन यापन करने पाये। इससे प्रतीत होता है कि हिमालयी क्षेत्र में लोग कितने भयातीत है कि यहां पर भूकम्प कभी भी अपना कोप फैला सकता है।

 

Leave a Reply

1 Comment on "हिमालय के परिधि में भूकम्प का खतरा बरकरार बचने हेतु धार्मिक उपाय हेतु लोग मजबूर"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
मनोज श्रीवास्‍तव 'मौन'
Guest

जरूर पढे

wpDiscuz