लेखक परिचय

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

प्रभुदयाल श्रीवास्तव

लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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बहुत ही सुहावना मौसम था सुबह ही झमाझम बारिस हो चुकी थी और अब गुनगुनी धूप निकल आई थी|जंगल के सभी जानवर खुशी के मारे उछल कूद कर रहे थे|हत्थू हाथी को भी बहुत मज़ा आ रहा था| उसे ऐसा लग रहा था कि कोई जोरदार खेल हो जाये|अचानक सामने से लल्लू शेर आता दिखाई दिया|फिर क्या था झट से अपने मन बात की उसके सामने रख दी|”लल्लू दादा कितना बढ़िया मौसम है क्यों न फुटबाल मैच हो जाये|शरीर में कुछ चुश्ती भी आ जायगी|”

“हां हां क्यों नहीं” जैसे लल्लू शेर पहले ही तैयार बैठा हो तुरंत हामी भर दी|

हत्थू ने चिंघाढ़‌ चिंघाढ़ कर जंगल के दूसरे जानवरों को बुला लिया|सियार, भालु ,लकड़बग्गा, बंदर ,जिराफ ,चीता, नील गाय इत्यादि बहुत सारे जानवर एकत्रित हो गये|लौमड़ी ,चीटी ,खरगोश ,जंगली भैंसा ,ऊँट जैसे छोटे बड़े सभी तरह के प्राणी खेलने को तैयार हो गये|जंगल में पूर्णत: लोकतंत्र था| टीम का एलान कर दिया गया|एक टीम का मुखिया हत्थू हाथी और दूसरी का का लल्लू शेर बनाया गया|चीटी को मेच का रेफरी बनाया गया|और मेडीकल चेक अप और इमरजेंसी के लिये गद्धूराम गधा एम. बी. बी. एस.एम. डी. को बुला लिया गया| हिन्नू हिरण ने अपने सींगों को चूने में डुबा डुबा कर बाऊंड्री बाल बना दी| गोली गिलहरी लल्लू शेर की टीम में शामिल होने पर अपने आप को धन्य समझ रही थी|जंगल के राजा की टीम जो थी,उसे कौन पराजित कर सकेगा, यही सोचकर आनंदित हो उछल रही थी|छुट्टी चीटी ने लाल रुमाल हिलाया और खेल शुरू हो गया| हिन्नू हिरण ने किक मारी और बाल सीधे लल्लू शेर के के पास जा पहुँची |उसने पूरी ताकत से किक मारी और बाल सीधे गोल में जा घुसी|हत्थू हाथी ने गोल बचाने का बहुत प्रयास किया परंतु उसका भारी भरकम शरीर बाल तक पहुँच पाता कि पहले ही बाल गोल में जा चुकी थी|उसे आज अपने भारी शरीर पर बड़ा क्रोध आ रहा था,ऐसा बलवान शरीर क्या काम का, जिसमें चुश्ती न हो|एक गोल से पिछड़ने के कारण हत्थू को बहुत गुस्सा आ गया और उसने नियमों के विरुद्ध खतरनाक ढंग से बाल को उछलकर मारा कि बाल सामने से आती हुई गोली गिलहरी को लगी|बेचारी जरा सी जान ,हाथी के हज़ार एलीफेंट पावर की बाल कहाँ सह पाती वहीं ढेर हो गई|मैदान में अफरा तफरी मच गई|छुट्टी चीटी ने सीटी बजा बजा कर खेल रुकवाया|सब जानवर उस मरणासन्न गिलहरी को घेर कर खड़े हो गये|गिद्धू गधे ने फर्स्ट एड बाक्स निकालकर गोली को चेक किया | उसकी दोनों टांगे टूट चुकीं थी, शरीर की खाल बाहर आ गई और वह बहुत तेज गति सांस ले रही थी|

गिद्धू ने हत्थू को सामने खड़ा पाकर उसे जोरों से डाँट पिलाई”तुमने नियम के विरुद्ध फाउल किक मारी है तुम्हें दंड दिया जायेगा|बेचारी गोली गिलहरी की तो जान पर बन आई है|गिद्धू की बात सुनकर हत्थू पागल हो गया|”तेरी यह मज़ाल मुझे डांटता है, दो टके के पिद्दी गधे”ऐसा कहकर उसने गधेराम को जोरों से धक्का दिया और गुल्ली गिलहरी पर अपना एक पैर रखकर स्वर्ग लोक पहुंचा दिया| आज जंगल का प्रजातंत्र भी भारत के प्रजातंत्र जैसा हो गया था|

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2 Comments on "जंगल का प्रजातंत्र"

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव
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धन्यवाद गुप्ताजी
प्रभुदयाल

mahendra gupta
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ठीक तुलना की आपने.बधाई

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