लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर “शादाब’’

15 अगस्त बहुत ही करीब है। में सोच रहा हॅू कि आखिर हमारे भोले भाले नादान प्रधानमंत्री जी लाल किले की प्राचीर से गणतंत्र का झंडा फहरायेगे या भ्रष्टतंत्र का कहना मुश्किल है। आईपीएल घोटाला, राष्ट्रमंडल खेलो में घोटाला, मुंबई के आदशर आवास सोसायटी घोटाला, टुजी स्पेक्ट्रस आवंटन घोटाला, सतर्कता अधिष्ठान में पुस्तक घोटाला, विशष्ट बीटीसी घोटाला, उप्र निर्यात निगम घोटाला, पुलिस भर्ती घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, मीड डे मील घोटाला, जेल में बंदीरक्षक सीधी भर्ती घोटाला, यूपीएस आईडीसी में सस्ती दरो पर जमीन देने का घोटाला, आज कांग्रेस के शासनकाल और माननीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिँह के नेतृत्व में भ्रष्टाचार देश के हर क्षेत्र में अपनी गहरी जडे जमा चुका है। आज जिस प्रकार देश में घोटालो का मौसम चल रहा मुझे नही लगता की ये सब एक अन्ना हजारे या बाबा रामदेव जैसे लोगो से बहुत जल्द निबट पायेगा। क्यो कि देखा ये जा रहा है कि इन घोटालो में है हमारे देश के लोकतंत्र के तीनो स्तंभो की इस में नुमाइंदगी महसूस हो रही है । केंद्र सरकार का एक मंत्री, दो राज्यो के मुख्यमंत्री, कुछ नये और पुराने उद्योगपति, आईएस आफिसर, सैकडो नौकरशाह, सेना के आफिसर, और कुछ लाल बत्ती के शौकीन पत्रकार ये सारे मासूम आज इन घोटालो में गले गले तक शामिल है। लेकिन इन सब घोटालो के लिये जो शख्स पूर्ण रूप से जिम्मेदार है वो है हमारे देश का प्रधानमंत्री और उस की निष्कि्रयता। वही दूसरी ओर घोटालो की मौजूदा कडियो में ए राजा और सुरेश कलमाणी को इन घोटालो का खलनायक भी कहा जा सकता है और हीरो भी।

आज देश में चारो ओर जिस प्रकार घोटाले ही घोटाले सामने आ रहे है। भ्रष्ट अफसर चाहे पुलिस में हो या प्रशासन में उनका देश के भ्रष्ट नेताओ से रिश्ता काफी गहरा और दोस्ताना हो चुका है कार्यवाही यदि अफसर पर होती है तो दर्द राजनेता को होता है और यदि कही गरदन राजनेता की फंसती है तो अपने ऊपर ऑच आने के डर से प्रशासनिक अधिकारी छटपटाने लगता है। ये ही वजह है की आज हम इस भ्रष्टाचार से लड नही पा रहे है। दूसरी ओर आज तक देश में भ्रष्टचार और भ्रष्ट राजनेताओ के खिलाफ कितनी कार्यवाही हुई है हमने देखा है। पूर्व संचार मंत्री सुखराम के अलावा देश की जॉच एजेंसिया किसी भी राजनेता को सजा के कटघरे तक नही पहॅुचा सकी। बोफोर्स दलाली के सभी आरोपियो के खिलाफ बिना सजा व जॉच के केस बन्द कर दिये गये, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व राबडी देवी के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ती का मामला निचली अदालत तक पहूुॅच कर हीं दम तोड गया, हवाला कांड में सीबीआई द्वारा मेहनत से जुटाये सारे सुबूतो को सुप्रीम कोर्ट ने मानने से इन्कार कर दिया, बिहार चारा घोटाले में आरोपी लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र को आज 14 साल बाद भी ऑच तक नही, मायावती व मुलायम सिॅह के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ती मामला आज भी अधर में है , विधायको की खरीद फरोख्त मामले में काग्रेस के लीडर और छत्तीसग के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ सात साल भी कोई चार्जशीट नही दाखिल हो पाई। ये कुछ ऐसे भ्रष्टाचार के मामले है जिन से सीधा या कही न कही कांग्रेस का रिश्ता जरूर है। कांग्रेस ने सत्ता सुख पाने की खातिर देश को पूरी तरह बरबाद कर दिया और जो भी तरक्की हमे आज कागजो पर बताई या दिखाई जा रही है वो पूरी तरह से फर्जी है कांग्रेस का सत्ता में बने रहने के लिये छद्वम आवरण है। देश में मंहगाई आसमान छूने को तैयार है लोग दिन भर खून पसीना बहाने के बाद भी अपने बच्चो को पेट भर रोटी भी नही दे पा रहे है।

भ्रष्टाचार के कारण आज त्राहीत्राही मची है। देश की संसद कुछ भ्रष्ट राजनेताओ के कारण हर रोज शर्मसार हो रही है जनता की खून पसीने की कमाई दिल खोलकर लुटाई जा रही है। पिछले दो सालो से खाघान्न की कीमतो में रिकार्ड उछाल है। शोयर बाजार, सोना और चॉदी आसमान छू रहे है। गरीब व मध्यवर्गीय आम आदमी परिवार की गाडी खिचता खिचता थकता चला जा रहा है। हमारे माननीय ईमानदार प्रधानमंत्री जी और सांसदो को इस बात की बिल्कुल भी परवाह नही अपनी जिम्मेदारी का जरा भी एहसास नही आखिर ये कैसी ईमानदारी है कि देश लूट रहा है और मंत्री से लेकर संत्ररी तक बिना किसी डर खौफ के लूटमचाई में लगे है देश के गरीब लोगो के पैसो पर नौकरशाही और राजशाही मनमानी कर रहे है ऐश उडा रहे है। संसद भवन आज राजनेताओ के लिये पिकनिक स्पोर्ट बन चुका है। जनता की खून पसीने की गाी कमाई जहॉ ऐशपरस्ती के लिये इस्तेमाल होती है वही मोटी पगार लेकर भी हमारे जनप्रतिनिधि पूरे पॉच साल जनता के विश्वास का खून ही करते है। देश के सब से पुराने और आधार वाले राजनीतिक दल कांग्रेस के राज में इस प्रकार लूट मचाई हैरत में डालने वाली है। देश में दिन प्रतिदिन ब रहे भ्रष्टचार के मामले दिमाग को झकझोर कर रख देने बाले है। आज भ्रष्टाचार हजार पॉच हजार के नही बल्कि हजार करोड और लाख करोड की संख्या को पार कर चुके है।

यू तो इन्सान को जीने के लिये दो रोटी और तन पर एक कपडा बहुत है मगर जिस रफ्तार से विदेशो में देश के कुछ बडे नेताओ के काले धन के मामले सामने आ रहे है और देश में एक घोर भ्रष्ट संस्कृति पनप रही है वो राजतंत्र, पुलिसतंत्र और न्यायतंत्र का निकम्मापन है। हम लोग तीस सालो से गंगा में प्रदूषण की चर्चा कर रहे है। लेकिन देश में भ्रष्टाचार का प्रदूषण तो आज दिमाग को चकराने वाला है। दो दशर्क पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गॉधी जी ने खुद स्वीकार किया था कि “सरकार द्वारा चलाई गई तमाम विकास योजनाओ के प्रत्येक एक रूपये में से केवल 15 पैसे जरूरतमंदो तक पहॅुचते है’’। आज मनरेगा, गरीबो को सस्ता आनाज, वृद्वा व विधवा पैंशन आादि तमाम सरकारी योजनाओ में हमारे राजनेता और नौकरशाहो की पोल खुलने के बाद हमे इस बात का अहसास हो रहा है। वास्तव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गॉधी जी ने उस वक्त कितनी साफ सुथरी बात कही थी। आज देश में हुए तमाम घोटालो में प्रधानमंत्री मनमोहन सिॅह द्वारा खुद को ईमानदार साबित कर के सिर्फ पट्टी धोने की कोशिश की जा रही है जख्म पर मरहम या चीरा नही लगाया जा रहा है। कुछ मंत्रियो द्वारा सरकार में फैले भ्रष्टाचार के कारण सरकार को विकास के साथ साथ आम आदमी और कमर तोड मंहगाई पर नियंत्रण का भी ख्याल नही रहा। सरकार कार्यवाही के नाम पर सिर्फ लीपापोती करने में लगी है।

बाबा रामदेव या अन्ना हजारे के अनशन से देश में को की तरह फैल चुका ये भ्रष्टाचार यू आईएस अफसरो के घरो पर छापेमारी से या फिर रोज रोज संसद में शोर मचाने से खत्म हो जायेगा नही बिल्कुल नही लेकिन इसे देश में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिये एक अच्छी पहल जरूर कह सकते है। अब कांग्रेस को अपने अगल बगल में झॉकना चाहिये की उसने कितने भ्रष्ट राजनेताओ और प्रशासनिक अधिकारियो को केवल सत्ता सुख के कारण अपनी गोद में छुपा रखा है। आज नही तो कल काग्रेस को उन्हे जनता के हवाले करना होगा क्यो की बिहार में भ्रष्टाचारियो, अपराधी प्रवृति व घपलेबाजो को जनता ने जिस प्रकार से नकारा है वो काग्रेस को जरूर याद रखना चाहिये। कांग्रेस को ये भी याद और ध्यान रखना चाहिये कि देश में फैले भ्रष्टाचार और मंहगाई के जाल में उत्तर प्रदेश में बहुत जल्द होने वाले विधान सभा चुनाव में वो खुद ही न फंस जाये। क्यो कि देश की जनता लोकपाल बिल नही ये तो अपने आप में खुद सरकार है जिसने अपने एक एक एक वोट से न जाने कितनी सरकारे बनाई और गिराई है।

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2 Comments on "गणतंत्र पर हावी होता भ्रष्टतंत्र"

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आर. सिंह
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ऐसे भ्रष्टाचार पर कुछ बोलना या लिखना कुछ समय पहले तक समय की बर्बादी लगता था, पर बाबा रामदेव और अन्नाहजारे की कृपा से इतना तो अवश्य हुआ है ये सब बातें अनर्गल बकवास नहीं लग रही है.ऐसे भ्रष्टाचार के खत्म होने या उसके कम होने की संभावना कम ही नजर आ रही है.मुझे तो लगता है इन दोनों महानुभाओं की आवाजें भी नकारखाने में तूती की आवाज बन कर रह जायेगी.

Satyarthi
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शादाब भाई
आप के पूरे लेख से मैं सहमत हूँ. बस एक बात पर थोडा मतभेद है. बेचारे मनमोहन सिंह ने चुनाव लड़ कर प्रधान मंत्री की कुर्सी प्राप्त नहीं की .उन्हें तो देश की सम्राज्ञी ने कुर्सी पर बिठाया और वे बैठ गए .जो भी फैसले लिए जाते हैं उनके लिए सर्वोच्च अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है तो मेरे विचार में जो निर्णय लेता है (यदि उसमें घोटाला मिलता है )तो निर्णायक सबसे अधिक दोषी है और बाकि सब सहायक के रूप में

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