लेखक परिचय

ए.एन. शिबली

ए.एन. शिबली

उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी में विभिन्‍न समसामयिक मुद्दों पर निरंतर कलम चलाने वाले शिबली जी गत दस वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। दैनिक हिंदुस्तान, राष्ट्रीय सहारा, कुबेर टाइम्स, उर्दू में राष्ट्रीय सहारा, क़ौमी आवाज़, क़ौमी तंजीम आलमी सहारा, हिन्दी और उर्दू चौथी दुनिया सहित अनेक वेबसाइट्स पर लेख प्रकाशित। फिलहाल उर्दू दैनिक हिंदुस्तान एक्सप्रेस में ब्‍यूरो चीफ के पद पर कार्यरत हैं।

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sachinए एन शिबली
किसी भी खेल में खिलाडियों का आना जाना कोई नयी बात नहीं है. खेल ही नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में नए लोग आते रहते हैं और पुराने जाते रहते हैं. यह जीवन का दस्तूर है. कहने वाले तो कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि  किसी के चले जाने या खेल से रिटायर होने की भरपाई नहीं होती मगर ऐसा हर मामले में सही नहीं है. हर क्षेत्र में कुछ नाम ऐसे होते हैं जिनके जैसा अब कोई दूसरा कभी नहीं हो सकता।  ऐसे ही लोगों में से एक हैं सचिन तेंदुलकर जिन्हें पूरी दुनिया क्रिकेट के बादशाह के नाम से जानती है. हो सकता है आने वाले सालों में  हर टीम में कई बड़े  खिलाडी आयें मगर सचिन के खेलने का जो अंदाज़ था, पिच पर उनका अपना जो एक  अलग स्टाइल  था और उन्हों ने जितने रन बनाये हैं वह किसी दुसरे के बस की बात नहीं है. क्रिकेट के जानकार तो यहाँ तक कहते हैं कि  सचिन ने कुछ ऐसे रिकार्ड बना दिए हैं  जिन्हें तोड़ने के लिए खिलाडियों को दो बार जन्म लेना पड़ेगा। सचिन पहले एकदिवसीय क्रिकेट से तो अलग हो ही गए थे अब उन्हों ने एलान  कर दिया है की उनका २०० वां टेस्ट उनके जीवन का अंतिम टेस्ट होगा. वैसे तो सचिन को एक न एक दिन टेस्ट को अलविदा कहना ही था मगर उन जैसे महान बल्लेबाज़  के रिटायरमेंट की खबर के बाद क्रिकेट के दीवानों को अब यही बात सता रही है कि  अब हम उनके कुछ खास शॉट्स नहीं देख सकेंगे। सचिन की महानता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि  जैसे ही सचिन के रिटायर होने की खबर आयी उस के बाद से ऐसे खिलाडियों के बयान  की बाढ़ सी आ गयी जिन्हों ने यह कहा कि  उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि  उन्हें सचिन के खिलाफ खेलने का मौक़ा मिला और उन्हें करीब से देखने का मौक़ा मिला।
सचिन के महान बनने से पहले तक ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमैन   को दुनिया का सबसे महान बल्लेबाज़ माना जाता था मगर अब हर कोई सचिन को ही सबसे बड़ा खिलाड़ी मानता है। क्रिकेट के इतिहास में सर्वाधिक रन बनाने वाले तेंदुलकर 198 टेस्ट में 53.86 की औसत से 15837 रन बना चुके हैं। वहीं 463 वनडे में 44.83 की औसत से 18426 रन बनाये हैं। वह 100 अंतरराष्ट्रीय शतक (51 टेस्ट और 49 वनडे में) बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज हैं। सचिन ने तो एक रिकार्ड अपने दोस्त विनोद काम्बली के साथ मिलकर बचपन में ही बना दिया था और उसके बाद रिकार्ड बनाने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अगले कई सालों तक जारी रहा.  पाकिस्तान के खिलाफ 15 नवंबर 1989 को पहला टेस्ट खेलने वाले तेंदुलकर ने विनोद कांबली के साथ 1988 में लार्ड हैरीस शील्ड अंतर विद्यालयीन टूर्नामेंट में 664 रन की नाबाद साझेदारी की थी। तेंदुलकर ने पहला शतक 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ ओल्ड टैफर्ड में बनाया था। वह वनडे में दोहरा शतक जमाने वाले पहले बल्लेबाज थे. उन्होंने फरवरी 2010 में ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह कारनामा अंजाम दिया था। तब उसे टाइम पत्रिका ने खेल जगत के दस सर्वश्रेष्ठ पलों में शामिल किया था।
जहाँ तक क्रीकेट में उनके योगदान का सवाल है तो उनहों ने क्रिकेट को अब इतना कुछ दे दिया है कि भारत ही नहीं  दुनिया के दूसरे देशों में भी शायद ऐसा खिलाड़ी बड़ी मुश्किल से पैदा होगा जो सचिन का रिकार्ड तोड़ना तो दूर उसके रिकार्ड के करीब भी पहुँच पाये। सचिन ने अपने करियर के दौरान एक दो नहीं बल्कि न जाने कितने रिकार्ड बनाए इनमें कुछ तो टूटे भी मगर कुछ तो ऐसे हैं जिनके बारे यह कहा जाता है कि पता नहीं यह कभी टूटेंगे भी या नहीं। क्रिकेट रिकार्डों का ही खेल है और इसमें आए दिन रिकार्ड बनते और टूटते रहते हैं मगर सचिन ने जो कुछ रिकार्ड ऐसे बना दिये हैं वह कभी टूटेंगे भी या नहीं यह कहना मुश्किल है।
सचिन ने अपने २४साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में एक बल्लेबाज के तौर पर लगभग सारे ही रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए हैं। सचिन के नाम वनडे और टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा रन और शतक जड़ने का रिकॉर्ड है। टेस्ट क्रिकेट में सचिन अपने शतकों का अर्धशतक भी बना चुके हैं। इतना ही नहीं सचिन  वनडे मैचों में दोहरा शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी भी बने। यह कारनामा उनहों ने २४  फरवरी २०१० को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुये बनाया था। उनका यह रिकार्ड एकदिवसीय क्रिकेट में उस समय तक सर्वाधिक रन का रिकार्ड रहा जब तक दिसंबर २०११ में सहवाग ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ २१९  रन की पारी नहीं खेल ली। यह भी अपने में एक बड़ी उपलब्धि है कि  जिस एकदिवसीय क्रिकेट में एक से बढ़कर एक तेज़ खेलने वाले बल्लेबाज़ आए उसमें सबसे पहला दोहरा शतक सचिन ने ही लगाया।
24 अप्रेल 1973 को पैदा होने वाले सचिन ने 18 दिसंबर 1989 को महज 16 साल की उम्र में क्रिकेट में पदार्पण किया। 1989 में इस धुरंधर बल्लेबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच से अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर शुरू किया। पहले टेस्ट में सचिन 15 रन पर वकार यूनुस की गेंद पर बोल्ड हो गए। अपने पहले दो एकदिवसीय मैच में सचिन शून्य पर आउट हुये। उनहों ने अपना पहला अर्धशतक अपने नौवें मैच में जबकि पहला शतक 79 वें मैच में लगाया। उसके बाद शतक लगाने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह 49 में शतक तक चलता रहा। जी हाँ जिस एकदिवसीय मैच में बल्लेबाज़ दो चार शतक के लिए तरसते हैं उसमें सचिन ने एक दो नहीं बल्कि 49 शतक बना दिये। टेस्ट में सचिन ने 51 शतक लगाए। वह विश्व के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं और न जाने कब तक अकेले ऐसे खिलाड़ी रहेंगे जिन्हों ने अपने शतकों का शतक पूरा कर लिया है।
सचिन ने अब तक 463 वनडे मैच खेले  हैं जिसमें उन्होंने 49 शतक और 96 अर्धशतकों की मदद से कुल 18426 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 44.83 का है। इनके नाम टेस्ट और वनडे में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। इसके साथ ही उन्होंने वनडे में 154 विकेट भी चटकाए हैं।
बचपन में सचिन के  बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ने उन्हें खेलने  के लिए प्रोत्साहित किया था। उनके एक और भाई  नितिन तेंदुलकर और बहन सवितई तेंदुलकर हैं। 1995 में उन्होंने पेशे से डाक्टर और खुद से पांच साल बड़ी अंजलि से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं अर्जुन और सारा।  सचिन ने मुंबई स्थित शारद आश्रम विद्यामंदिर से स्कूल शिक्षा ग्रहण की। वहीं पर उन्होंने कोच रमाकांत अचरेकर सेक्रिकेट  सीखी।  पहले तेज गेंदबाज बनने के लिए उन्होंने एमआरएफ पेस फाउंडेशन के  कार्यक्रम में शिरकत की। लेकिन वहां गेंदबाज कोच डेनिस लिली ने पूर्ण रूप से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। सोचिये जो खिलाड़ी कभी गेंदबाज़ बनना चाहता था वह दुनिया का सबसे बड़ा बल्लेबाज़ बना.
उनके बनाये गए रिकार्ड से ही यह बात साबित हो जाती है कि  वह कितने महान  खिलाडी हैं और बाक़ी के दुसरे खिलाड़ी उनसे कितने पीछे है।  सचीन ने टेस्ट और एकदिवसीय दोनों में कुल मिलाकर २४२७३ रन बनाये हैं इतने रन किसी दुसरे खिलाडी ने नहीं बनाये बल्कि कोई दूसरा खिलाडी उनके करीब भी नहीं है. सचिन ने टेस्ट में भी और एकदिवसीय मैच में भी सबसे ज्यादा रन बनाये हैं। सचिन ने टेस्ट में चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए १३४०२ रन बनाये हैं यह किसी भी बल्लेबाज़ से अधिक है. दुसरे नंबर पर रहने वाले जैक कल्लिस ने ४५०२ रन कम बनाये है. सचिन ने वर्ल्ड क्रिकेट में १०० शतक लगाये हैं।  दुसरे नंबर पर जो खिलाड़ी है उसने सचिन से २९ शतक कम लगाये है.
सचिन ने एक कलेंडर साल में टेस्ट और एकदिवसीय दोनों में सबसे अधिक बार १००० या उससे अधिक रन बनये. टेस्ट में उन्हों ने यह कमाल ६ बार और वनडे  में सात बार अंजाम दिया है. उन्हें कुल मिलाकर ७६ बार मैं ऑफ़ द मैच का पुरस्कार मिला जोकि एक रिकार्ड है.
सचिन के नाम एक दो नहीं कई रिकार्ड हैं। अगर यह कहा जाये की एकदिवसीय क्रिकेट में बल्लेबाज़ी के अधिकतर रिकार्ड उनके ही नाम हैं तो यह गलत नहीं होगा। सचिन ने सबसे अधिक रन बनाए हैं, सबसे अधिक शतक बनाए हैं, सबसे अधिक अर्धशतक का रिकार्ड भी उनके ही नाम है। सबसे अधिक 61 बार मैन ऑफ द मैच भी वही हुये हैं। उन्हें ही सबसे अधिक 15 बार मैन ऑफ द सेरीज़ का खिताब मिला है। विश्व कप के मैचों में सबसे अधिक रन बनाने का रिकार्ड सचिन के ही नाम है। विश्व कप में सबसे अधिक मैच खेलने का रिकार्ड उनके ही नाम है। विश्व कप के मैचों में सबसे अधिक बार मैन ऑफ द मैच होने का रिकार्ड भी उन्हीं के नाम है। सचिन ने आठ बार एक कलेंडर वर्ष में 1000 या उस से अधिक रन बनाए यह एक रिकार्ड है। एक साल तो उनहों ने 1894 रन बना दिये यह एक वर्ष में सबसे अधिक रन का रिकार्ड है। सचिन विश्व के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हों ने 15000 रन बनाने के अलवा 150 विकटें भी हासिल कीं। इसके अलावा भी कई ऐसे रिकार्ड हैं जो सचिन के नाम हैं। सचिन के टेस्ट और वनडे मैचों के रिकार्ड को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि  सचिन एक ऐसे महान बल्लेबाज़ हैं जिन्हें भूल पाना मुमकिन नहीं है और उनके लिए यह कहा जा सकता है :
तुझे भूल पाना जानाँ  मुमकिन नहीं
तू याद  न आये ऐसा कोई दिन नहीं

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