लेखक परिचय

सुप्रिया सिंह

सुप्रिया सिंह

स्वतंत लेखिका

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helmetयूपी सरकार ने जब यह आदेश निकाला की अब दोपहिया वाहन पर पीछे बैठने वालों को भी हेलमेट लगाना पङेगा तब उन लोगों ने इस फैसले की तारीफ तो ऐसी की जैसे वे इस तरह सरकारी फैसले कितनी शिद्दत से मानते हो । इस फैसले की तारीफ करने में उन लोगों नें भी देर नहीं की जो आज तक अपनी गाङी की डिक्की में रखा हेलमेट निकाल कर कभी लगाया न हो क्योंकि कुछ लोगों ऐसे भी होते हैं जो किसी भी विषय पर प्रतिक्रिया देने में कभी देर नहीं करते हैं । कितना अजीब हैं न हम लोग क्योंकि जब पुलिस हमारी गलती पर चालान काटती हैं तो हम उसेपुलिस की दादागिरि करार देते हैं लेकिन वहीं पुलिस जब कभी हमारी गलती होनें के बावजूद छोङ देती हैं तो हम उसेअपनी शान समझने लगतें हैं और पुलिस और कानून व्यवस्था पर ही सवाल खङे करने लगते हैं । कानून वयवस्थ की जटिलता की बुराई और विदेशों की कानून व्यवस्था की तारीफ करने का हम एक मौका नहीं छोङते हैं । हम हर बार देश में किसी भी कमी के लिए के लिए नेताओं को ही जिमेम्दार साबित करने का प्रयास करते हैं । पर कभी अपनी गलतियों पर ध्यान ही नहीं देते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 177 के तहक बाइक चलाने के दोरान हेलमेट लगाना अनिवार्य हैं पर कुछ लोगों के अलवा बहुत ही कम ही लोग इसका पालन करतें हैं और जो करते हैं भी वें अपनी स्वंय की सुरक्षा के लिए बाद में सोचते हैं पहले पुलिस से सुरक्षा के लिए इसका पालन करतें हैं । सिंग्नल ये 4 सेकेंण्ड पहले ही अपनी – अपनी गाङी निकालना शुरु कर देते हैं । जबकि ट्रैफिक सिंग्नल की लाइट और हर सेकेंण्ड का महत्त्व हम बचपन से पढते आ रहें है । सरकार ने जब यह फैसला लिया कि अब बिना हेलमेट किसी को पैंट्रोल पम्प से पैट्रोल नहीं मिलेगा तब बहुत से ऐसे लोग थें जो ना चाहते हुए भी इसे सरकार की तरफ से दी गई एक नई आफत समझ कर स्वीकार करने लगें । सरकार को भी लगा कि शायद इस मामलें में जनता अपनी जिमेम्दारी समझेंगी पर यह सरकार की भूल थी क्योंकि उसनें जनता की इस पहल से ज्यादा उम्मीद बांध ली थी । सरकार के इस फैसलें की स्थिति भी चार दिन की चांदनी फिर अन्धेरी रात वाली हो गई । एक अनुमान के अनुसार हेलमेट लगानें से 85 प्रतिशत सिर की सुरक्षा हो जाती हैं । व्टासएप पर यह पढकर सब हंसतें हैं कि किसी तरह हम लोग फोन पर स्क्रीन गार्ड लगना नहीं भूलतें हैं पर हेलमेट लगना जरुर भूल जातें हैं ! पर कभी इस सच्चाई पर ध्यान देना पसंद नहीं करते हैं । फोन वालेऔर सोशल मीडिया वाला कॉनटेक्क हमारे लिए घर बैठे हमारा इन्तजार कर रहें परिवार के लोगों की तुलना में ज्यादा महत्तवपूर्ण हैं। हर काम के लिए सरकार पर निर्भर रहने से अच्छा है कुछ काम जो हम अपने स्तर पर कर सकते हैं उसके लिए हम सरकार पर निर्भर न रहें । पैंट्रोल पम्प मालिकों नें जब सरकार की मुहिम में सहयोग किया तो इसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पङा क्योंकि हम लोगों की आदत बन गई है कि न तो अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगें और नही दूसरों को करने देगें । चाय की चौपाल पर बैठकर सरकार की नीतियों की आलोचना करने को अपना अधिकार समझनें वालेहम में से अधिकांश लोग हमारी ही सुरक्षा के लिए बनाएंगें कानून का पालन नहीं करतें हैं । जिस दिन हम में से 50 प्रतिशत लोग भी अपना अधिकार के साथ अपने कर्त्तव्यों का पालन करने लगें उस दिन देश को आगे बढने से कोई रोक नहीं सकता हैं । एक महत्त्वपूर्ण और ध्यान देने वाली बात जो सर्वें में सामने आ रही हैं वे यह है कि शहर वालों की तुलना में आज गाँव के लोग , जो अपने अधिकार को भी अच्छे से नहीं समझतें हैं वे अपने कर्त्तव्यों का पालन शहर वालों की तुलना में अच्छे से करते हैं । केवल पढ – लिख लेनें से और दो चार राजनैतिक बात कर लेनें से कोई अच्छा नागरिक नहीं बन जाता ।

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