लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

प्रवक्‍ता ब्यूरो

Posted On by &filed under कविता.


चढ़कर इश्क की कई मंजिले

अब ये समझ आया

इश्क के दामन में फूल भी है

और कांटे भी

और मेरे हाथ काँटों भरा

फूल आया

————-

फूल सा इश्क पाकर

फूला न समाया

पर बेवफाई का काँटा हर फूल ने

ज़रूर चुभाया

—————-

अब तो मेरी हालत देख

दोस्त ये कहे

इश्क का तो यही ताकाज़ा है

तेरा दिल हर फूल पे

क्यों आया

Leave a Reply

2 Comments on "अनामिका की कविता : चढ़कर इश्क की"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार
Guest

नव बरस की हार्दिक बधाई दिल की बात दिल से कोई करता नही आज कल कोई मीठी बोल बोलता नही
किस लम्हों की दास्ता लिखें यहाँ कोई दिल की सुनाता नहीं
लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार

amal
Guest

बहुत अच्छा आपकी लेखनी दिल के किसी कोने को छु गई ….लिखते रहिये हमारी सुभकामना आप के साथ है .

wpDiscuz