लेखक परिचय

आर. के. गुप्ता

आर. के. गुप्ता

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

Posted On by &filed under जन-जागरण, टॉप स्टोरी.


azam khanऐसा लगता है कि आजम खां प्रदेश में सोनिया गांधी की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् द्वारा प्रस्तावित ‘‘साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक-2011’’ को पूरी तरह से लागू कर रहे हैं। जिसके अनुसार यदि कहीं भी कोई भी साम्प्रदायिक दंगा होता है तो उसके लिए केवल और केवल हिन्दू को ही दोषी माना जाएगा। क्योंकि मुसलमान तो कभी साम्प्रदायिक दंगें करते ही नहीं है। इसी विधेयक के अनुसार यदि कोई मुसलमान किसी हिन्दू महिला या लड़की के साथ छेड़छाड़, बलात्कार या अपहरण करता है तो उसे अपराधी नहीं माना जाएगा। यदि हिन्दू इसका प्रतिरोध करता है तो वह दोषी होगा और उस पर इस विधेयक के अनुसार कानूनी कार्यवाही होगी। आज मुजफ्फरनगर में जो कुछ भी हो रहा है वह इसी का परिणाम लगता है जिसके कारण मुस्लिम समाज निर्भय होकर हिन्दुओं का खून बहा रहा है तथा प्रशासन हिन्दू को ही दोषी सिद्ध करने में अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। 

मुजफ्फरनगर में 27 अगस्त, 2013 से लेकर साम्प्रदायिक दंगा आज तक जारी है। ऐसा लगता है कि इन दंगों को आजम खां का खुला समर्थन प्राप्त है जिसके कारण प्रशासन मुस्लिम दंगाईयों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही है उल्टे इस दंगें मंे प्रताडित हिन्दू समाज को मुसलमानों के साथ-साथ पुलिस व सेना की भी मार खानी पड़ रही है। पुलिस हिन्दुओं पर लाठी चार्ज किया जा रहा है और उनको ही जेलों में डाल जा रहा है। मुस्लिम समाज मौका देखते ही हिन्दुओं पर आक्रमण कर रहा है क्योंकि राज्य सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों के कारण उनका का दुःसाहस बढ़ता जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में जबसे समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है तब से प्रदेश में लगभग 100 साम्प्रदायिक दंगें हो चुके है। प्रदेश में सपा से पहले मायावती की बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी। किन्तु मायावती के शासन काल में शायद ही कोई साम्प्रदायिक दंगा हुआ हो। ऐसा क्यांे? शायद आजम खां द्वारा मुसलमानों को पुलिस व अन्य किसी अधिकारी से भी न डरने की बात कहना इन दंगों का मुख्य कारण प्रतीत होता है?

आर. के. गुप्ता

Leave a Reply

4 Comments on "आजम खां ने उत्तर प्रदेश में लागू किया ‘‘साम्प्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक-2011’’"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
parshuramkumar
Guest
भारत के मुस्लिम समाज के लिये यह किसी विडंबना से कम नहीं कि वह पांच वक्त के नमाजी और एकता के समर्थक मौलाना अबुल कलाम आजाद और सरहदी गांधी खान अब्दुल गफ्फार खां को छोड़ व्यक्तिगत जीवन में इस्लाम से कोसों दूर रहे जिन्ना के पीछे चल पड़ा। प्रश्न उभरते हैं कि – क्या हम उस एंग्लो-अमेरिकन जाल से बाहर आ सके हैं ? क्या भारत अपने भू-भाग को शत्रुओं के कब्जे से मुक्त करा सका है ? क्या जो भू-भाग हमारे पास है, उसे हम ठीक तरह से संभाल पा रहे हैं ? क्या हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं ?… Read more »
suresh maheshwari
Guest

आज़म खान ने जैसा बयाँ दिया है उससे उसने अपने आपको बेनकाब कर दिया.

सुरेश माहेश्वरी

mahendra gupta
Guest

आजम खान बिना मुलायम सरकार अपने आपको पंगु समझती है,आजम के करतुते किसी से छिपी नहीं,जो भारतीय राजनीति की समझ रखतें हैं वे यह भी जानते हैं की खान सबसे बड़े सांप्रदायिक हैं, , मुलायम सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं,तो अंजाम यह ही होना था.अभी तो देखिये आगे क्या क्या गुल खिलाएंगे यह सब .

saurabh karn
Guest
हमारे यहाँ एक कहावत है की यदि सपेरा साँप को छूट देदे तोह साँप अपनी मर्ज़ी स किसी को भी काट सकता है.यह कहावत आज़म खान जी पर पूरी तरह से लागु किया जाता है.ऐसा कैसे हो सकता है की यदि किसी हिन्दू लड़की को मुस्लमान लड़का छेड़े तो उसे माफ़ कर दिया जायेगा .जब पाकिस्तान को भारत से अलग किया जा रहा था तोह आज़म खान जी जैसे कुछ सांप्रदायिक दंगे कराने वाले कुछ लोगो को भारत में छोड़ दिया गया था ताकि जब भारत में हिन्दू में एकता आये तो धर्म के नाम पर दंगे कराये जा सके… Read more »
wpDiscuz