लेखक परिचय

निर्मल रानी

निर्मल रानी

अंबाला की रहनेवाली निर्मल रानी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं, पिछले पंद्रह सालों से विभिन्न अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार के तौर पर लेखन कर रही हैं...

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निर्मल रानी

 

‘जब तक संसार में लालच जिंदा है उस समय तक ठग कभी भूखा नहीं मर सकता। यह कथन है ठग सम्राट नटवर लाल का। संभवत: नटवर लाल के इसी कथन को आधार मानकर ठगों द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया है। इस नेटवर्क की विशेषता यह है कि इसमें ठगी करने के प्रयास में लगे सभी लोग भी पूर्णतय: शिक्षित प्रतीत होते हैं। इतना ही नहीं बल्कि जिन्हें वे अपने जाल में फंसाना चाहते हैं वह वर्ग भी आम तौर पर शिक्षित ही होता है। शायद इसी लिए जहां ठगों द्वारा अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अर्थात् कंप्यूटर व इंटरनेट का सहारा लिया जा रहा है वहीं ठगी का शिकार भी उन्हीं को बनाया जा रहा है जो कंप्यूटर व इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। अपने शिकार को ठगने के लिए वे मात्र लालच या प्रलोभन को ही अपने धंधे का मुख्य आधार बनाते हैं। जाहिर है कि लालच का शिकार होना या किसी प्रलोभन में आना केवल गरीबों का ही काम नहीं बल्कि किसी पैसे वाले व्यक्ति को शायद धन की कुछ ज्य़ादा ही आवश्यकता होती है। इसी सूत्र पर अमल करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के ठगों का यह विशाल नेटवर्क लगभग पूरी दुनिया में छा चुका है।

 

यह अन्तर्राष्टीय गिरोह ठगी का अपना व्यवसाय पहले तो मुख्य रूप से कई दक्षिण अफ्ऱीकी देशों से ही संचालित कर रहा था। परंतु अब तो लगता है इन ठगों ने दुनिया के लगभग सभी देशों में अपने जाल फैला दिए हैं। यह इंटरनेट ठग गूगल अथवा याहू या किन्हीं अन्य सर्च साइट्स के माध्यम से या फिर किन्हीं अन्य तरीकों से विश्व के तमाम लोगों के ई-मेल पते इकट्ठा करते हैं। उसके पश्चात वे बाकायदा अपने पूरे नाम, टेलीफोन नंबर व पते के साथ-साथ किसी भी ई-मेल पर अपना भारी भरकम परिचय देते हुए प्रलोभन युक्त मेल प्रेषित करते हैं। उस मेल का वृत्तान्त कुछ ऐसा होता है, जिसे पढ़कर बड़े से बड़ा बुद्घिमान एवं समझदार व्यक्ति भी एक बार उनके झांसे में आसानी से आ जाता है। उदाहरण के तौर पर आपको उनका यह संदेश आ सकता है कि- ‘बधाई हो, आप जैकपॉट का पुरस्कार जीते हैं। यह लॉटरी इन्टरनेट प्रयोग करने वाले ई-मेल खाताधारकों के मध्य आयोजित की गई थी। इसमें आपका 14 लाख डॉलर का पुरस्कार निकला है। कृप्या इसे ग्रहण करने के लिए अमुक ई-मेल पर संपर्क करें। जाहिर है एक बार इस मेल को प्राप्त करने वाला व्यक्ति बड़ी $खामोशी के साथ एक कदम आग बढ़ाते हुए ठगों द्वारा भेजे गए उनके ई-मेल पते पर संपर्क साधता है। मात्र 24 घंटों के भीतर ही आपको उस ठग का उत्तर भी मिल जाएगा। उसका उत्तर यह होता है कि- ‘हां मैं बैरिस्टर अमुक हूं तथा आप वास्तव में लॉटरी के विजेता हैं। आपको बधाई। उसके बाद वह तथाकथित बैरिस्टर आपसे आपका नाम, पूरा पता, व्यवसाय, टेलीफोन नंबर, बैंक अकाउंट नंबर तथा आपके बैंक का स्विफट कोड नं आदि जानकारी मांगता है। बस इसके बाद यदि आपने उनके द्वारा मांगी गई सभी सूचनाएं उपलब्ध करवा दीं फिर न तो वे दोबारा आप से संपर्क साधेंगे, न ही आपके किसी अगले ई-मेल का जवाब देंगे। यह ठग इलेक्ट्रोनिक उपायों का प्रयोग कर किसी भी प्रकार से आपके खाते से पैसे निकालने का भरसक प्रयास करने में जुट जाते हैं। और किसी न किसी शिकार व्यक्ति के बैंक खाते से पैसे निकालने में कामयाब हो ही जाते हैं।

 

लॉटरी निकलने की सूचना देने के अतिरिक्त और भी तरह-तरह के किस्से-कहानी से भरपूर ई-मेल ठगों का यह नेटवर्क पूरी दुनिया में ई-मेल धारकों को भेजता रहता है। किसी ठग द्वारा यह सूचित किया जाता है कि अमुक परिवार विमान हादसे में मारा गया है। उस परिवार का चूंकि कोई वारिस नहीं है तथा यदि आप उसके वारिस बन जाएं तो उसकी जमा धनराशि यथाशीघ्र आप पा सकते हैं। कोई महिला शादी का प्रलोभन देते हुए लिखती है कि मेरा करोड़ों डॉलर बैंक में है, मैं यह धनराशि आपके खाते में स्थानान्तरित करना चाहती हूं। अत: आप मुझे अपना नाम, पता, खाता व अपने बैंक का स्विफ्ट कोड आदि भेजिए। कई ठग तो सीधे तौर पर यही लिख देते हैं कि मैं अमुक बैंक में गुप्त दस्तावेज डील करने वाले विभाग में अधिकारी हूं। मेरे एक जानकार व्यक्ति की मृत्यु हो गई है। उनका करोड़ों डॉलर मेरे ही बैंक में जमा है। यदि आप इस धनराशि को लेने में रुचि रखते हैं तो अपना व अपने बैंक अकाऊंट का विस्तृत ब्यौरा यथाशीघ्र भेजें ताकि मैं यह धनराशि आपके खाते में स्थानान्तरित कर सकूं। अपने आपको चीन का बताने वाले एक ठग ने भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करने की तो हद ही कर दी। उसने स्वयं को कैंसर का मरीज बताते हुए यह लिखा कि वह चीन का एक नामी-गिरामी उद्योगपति है। चूंकि वह अपने जीवन की अन्तिम सांसें ले रहा है अत: वह चाहता है कि उसकी नक़द धनराशि का एक बड़ा हिस्सा गरीब व बेसहारा लोगों में बांट दिया जाए। फिर उस तथाकथित उद्योगपति ने इस कार्य के लिए सहयोग मांगते हुए अपने तथाकथित बैरिस्टर का ई-मेल पता दे दिया। उधर उस तथाकथित बैरिस्टर ने भी अन्य ठगों की भांति विस्तृत पता तथा बैंक खाते का विस्तार मांगना शुरु कर दिया।

 

कुछ ठग तो धार्मिक व जातिगत भावनाओं को भी जगाने का प्रयास अपने इस ठग व्यवसाय में करते हैं। परन्तु भारतीय संस्कृति की स पूर्ण जानकारी न होने की वजह से उन्हें बारीकी से परखा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि आपका नाम संजय चौधरी है तो जाहिर है आपने अपना ई-मेल भी लगभग संजय चौधरी के नाम से या इससे मिलता जुलता ही बनाया होगा। यह अन्तर्राष्ट्रीय ठग चौधरी शब्द को तो यह समझ कर चुन लेते हैं कि हो न हो, यह किसी व्यक्ति का सरनेम ही होगा। उसके पश्चात ठगानन्द जी आपके ई-मेल पर जो संदेश भेजते हैं उसमें लगभग यह लिखा होता है कि- ‘कार एक्सीडेंट में अथवा विमान हादसे में अथवा किसी समुद्री जहाज के डूबने में फलां देश का एक परिवार मारा गया। उसका मुखिया रॉबर्ट चौधरी था। चूंकि आप संजय चौधरी हैं अत: आप राबर्ट चौधरी के भाई के रूप में स्वयं को प्रस्तुत करते हुए उसके खाते में जमा 22 करोड़ डॉलर की नक़द धनराशि प्राप्त कर सकते हैं। यहां यह ठग चौधरी शब्द का तो बड़ी आसानी से महज इसलिए प्रयोग कर लेता है क्योंकि वह उसे सरनेम ही समझता है परन्तु संजय के स्थान पर दूसरे भारतीय शब्द का अभाव होने के चलते उसे राबर्ट नाम का सहारा लेना पड़ता है। इन ठगों द्वारा दिए जाने वाले इन सभी प्रलोभन में जो कहानी तथा अनुबन्ध उल्लिखित किया जाता है उसमें बाकायदा 30 अथवा 40 या 50 प्रतिशत का उनका अपना हिस्सा भी बताया जाता है ताकि कोई भी व्यक्ति अचानक यह न समझ बैठे कि अमुक व्यक्ति को मेरे ही साथ इतनी हमदर्दी आखिर क्योंकर है।और यह पूरी रकम केवल मुझे ही क्यों देने की बात कर रहा है।

 

कंप्यूटर क्रांति विशेषकर इन्टरनेट के रूप में वैज्ञानिकों ने नि:संदेह दुनिया को वह बेशकीमती सौगात दी है जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इसमें कोई शक नहीं कि इन्टरनेट व क पूटर के तमाम $फायदे व सुविधाएं हैं। परन्तु जिस प्रकार देवताओं के समय में भी राक्षसों व राक्षस प्रवृत्ति के लोगों की कोई कमी नहीं थी, ठीक उसी तरह इस कंप्यूटर व इंटरनेट के स्वर्णिम व अत्याधुनिक युग में भी जहां पूरा संसार उससे तमाम सुविधाएं उठा रहा है वहीं ठग प्रवृत्ति के तमाम लोग भी इस प्रणाली का दुरुपयोग करने हेतु अपनी कमर कस चुके हैं। इंटरनेट के माध्यम से तरह-तरह की योजनाएं बता कर ठगी करना, गन्दे व अश्लील ई-मेल भेजना,किसी का ई-मेल हैक करना, वायरस भेजना दूसरों को डराना-धमकाना तथा आतंकवाद संबंधी गतिविधियों की सूचनाओं का गैर कानूनी आदान-प्रदान व अवैध रूप से गुप्त दस्तावेजों का हस्तानान्तरण करना भी इसी कंप्यूटर के माध्यम से हो रहा है। जहां हमें कंप्यूटर के तमाम सकारात्मक व लाभप्रद पहलुओं को स्वीकार करना तथा उन्हें अपने प्रयोग में लाना है वहीं इससे होने वाले नुकसान व दुष्परिणामों से भी पूरी तरह चौकस व सचेत रहने की जरूरत है। इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त होने वाले किसी भी अंजान व्यक्ति के किसी भी लालचपूर्ण प्रस्ताव को पढऩे में समय गंवाने के बजाए ऐसे मेल को डिलीट कर देना ही ठगी से बचने का सबसे ज्य़ादा उचित व सुरक्षित उपाय है।

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2 Comments on "ठगों का स्वर्ग बनता ‘इंटरनेट’"

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chandra prakash dubey
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chandra prakash dubey

ये आज कल आम बात हो गयी है, जो “शिक्षित लालची” होगा वो मरेगा.
बहरहाल , ज्ञानवर्धक लेख के लिए साधुवाद.

गुड्डोदादी
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निर्मला बिटिया
आशिर्वाद
आपके लेख से जान कारी मिली एइसा बहुत बार हुआ मेरे साथ और
किसी ने मेरे बेंक अकाउंट भी हैक किया पर पता नहीं हैक से पहले एक
घंटा पहले पास एओर्द बदल लिए और सभी खाते बंद किये
आभार के साथ
गुड्डो दादी चिकागो से

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