लेखक परिचय

अलकनंदा सिंह

अलकनंदा सिंह

मैं, अलकनंदा जो अभी सिर्फ शब्‍दनाम है, पिता का दिया ये नाम है स्वच्‍छता का...निर्मलता ...सहजता...सुन्दरता...प्रवाह...पवित्रता और गति की भावनाओं के संगम का।।। इन सात शब्‍दों के संगमों वाली यह सरिता मुझे निरंतरता बनाये रखने की हिदायत देती है वहीं पाकीज़गी से रिश्तों को बनाने और उसे निभाने की प्रेरणा भी देती है। बस यही है अलकनंदा...और ऐसी ही हूं मैं भी।

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lalu and mulayam

देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख बदल दिया जिनमें से एक थे राममनोहर लोहिया। राजनीतिक अधिकारों के पक्षधर रहे डॉ. लोहिया ऐसी समाजवादी व्यवस्था चाहते थे जिसमें सभी की बराबर हिस्सेदारी रहे।
लोहिया कहते थे कि सार्वजनिक धन समेत किसी भी प्रकार की संपत्ति प्रत्येक नागरिक के लिए होनी चाहिए। वे  रिक्शे की सवारी नहीं करते थे, कहते थे एक आदमी एक आदमी को खींचे यह अमानवीय है।
कल से सोचने पर विवश कर रही हैं ये खबरें कि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव सैफई में उनके पोते और सांसद तेज प्रताप सिंह के तिलक के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं ।
जब से देखा कि सैफई की शाही शादी में समाजवाद की धज्ज‍ियां उड़ाई जा रही हैं तब रहा नहीं गया लोहिया के इन कथित फॉलोअर्स के ” समाजवाद”  की आखि‍र ये कौन सी परिभाषा है।  जो कल तक प्रधानमंत्री  के सूट की कीमत पर भर भर आंसू बहा रहे थे , वे ही आज निजी समारोह पर पानी की तरह सरकारी और निजी कोष लुटा रहे हैं ।
ये राजनीति का कौन सा रूप है ? निश्च‍ित ही समाजवाद की इस परिभाषा को फिर से परिभाषित करने की जरूरत आ गई है कि जिस विरासत पर ये नेता अपना साम्राज्य स्थापित करते गये और कुनबे दर कुनबे ने पूरे के पूरे प्रदेश में अराजक राज के सारे पैमानों को तोड़ दिया,  आखिर ये समाजवाद का कौन सा रूप है ।
आज के इन समाजवादियों का शाही अंदाज़ राम मनोहर लोहिया के आख‍िर कौन से मूल्यों को महिमा मंडित किया जा रहा है ।
जी हां, मुलायम सिंह के बड़े भाई के पोते तेज प्रताप की शादी आरजेडी प्रमुख लालू यादव की सबसे छोटी लड़की राजलक्ष्मी से हो रही है जिसमें ….

  • अतिविशिष्ट लोगों के लिए  400 अत्याधुनिक टेंट लगाए गए हैं जो स्वि‍ट्जरलैंड से आयात किये गये हैं।
    बिहार के मेहमानों के लिए ख़ासतौर पर स्विस कॉटेज वाला एक हिस्सा अलग कर दिया गया है।
    1,500 लोगों के लिए सामान्य कॉटेज तैयार किए गए हैं।
    1.25 लाख लोगों के लिए भोजन तैयार किया गया है और पानी के 100 टैंकर लगे हुए हैं।
    इस मौके पर क़रीब 100 किस्म के व्यंजन पेश किए जा रहे हैं।
    अतिविशिष्ट लोगों के लिए दिल्ली और मुंबई के पांच सितारा होटलों के खानसामा खाना तैयार कर रहे हैं।
    इस तिलक समारोह के सुरक्षा इंतज़ाम में 3,000 पुलिस बल लगे हुए हैं जिनमें 12 आईपीएस रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।
    उत्तर प्रदेश के 30 ज़िलों के पुलिसकर्मियों को सैफ़ई बुलाया गया है।
    यहां पांच सुपर एंबुलेंस और 500 सरकारी वाहन भी सेवा देने के लिए उपलब्ध हैं।
    इटावा ज़िले के कई होटलों ने भी इस समारोह की वजह से बाहरी बुकिंग बंद कर दी है।
    ये तो वो जानकारी है जो मीडिया के ज़रिए बाहर आ पाई है , बहुत कुछ ऐसा भी होगा जो ” अंडर द कारपेट”  होगा ।
    जो भी हो राजनेताओं के मुंह लगा राजकाज का ये खून समाजवाद की नई परिभाषा गढ़ने लगा है ।

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4 Comments on "सैफई का समाजवाद : अंडर द कार्पेट"

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आर. सिंह
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सबसे बड़ा कमाल तो यह है कि माननीय प्रधान मंत्री की उपस्थिति ने इस समारोह में चार चाँद लगा दिए.क्या याद करेंगे सैफईके लोग भी.उनके पुरखों ने भी ऐसा नजारा राजे रजवाड़ों के जमाने में भी नहीं देखा होगा.

anil gupta
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वास्तव में लालू, मुलायम और माया की राजनीती को देखकर ऐसा लगता है की हम लोकतान्त्रिक व्यवस्था में नहीं बल्कि कबीलाई व्यवस्था में जी रहे हैं.मुलायम सिंग के ७५वें जन्मदिवस समारोह के लिए अगर उनके बेटे की सरकार का एक मंत्री इंग्लैंड से विशेष शाही बग्गी मंगवा सकता है और बदले में उसे अरबों रुपये कीमत की सरकारी संस्थान और संपत्ति ‘रिटर्न गिफ्ट’ के तौर पर दी जा सकती है तो इसमें लोहिया जी का कौन सा समाजवाद छुपा है क्या कोई इसे समझायेगा?

इक़बाल हिंदुस्तानी
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क्या ये वही मुलायम और लालू है जो CM सम्मेलन में मोदी से ये सोचकर दूरी रखते थे कि उनके मुस्लिम वोट ख़फ़ा न हो जाएँ ?
क्या मुलायम समाजवादी और सेकुलर वास्तव में हैं जिनके प्रोग्राम में 2 बीजेपी के नेता रहे गवर्नर और बीजेपी के PM व होम मिनिस्टर तो नज़र आये लेकिन कोई समाजवादी वामपंथी क्षेत्रीय दल और कमज़ोर वर्ग का एक भी बड़ा नेता नज़र नहीं आ रहा……और फिर लेखक का ये सवाल अभी भी लाजवाब है कि इतना तामझाम एक समाजवादी नेता कैसे जुटा सकता है ?????????

anil gupta
Guest

समाजवाद के विषय में वर्षों पहले एक विख्यात सामाजिक / राजनीतिक विद्वान सी ई एम जोड द्वारा कहा गया था की “आज समाजवाद एक ऐसी टोपी बन चुका है जो अलग अलग सिरों पर पहने जाने के कारण अपना स्वरूप खो चुका है”.आज यदि कोई यह ग़लतफ़हमी पालेगा कि पार्टी का नाम समाजवादी होने मात्र से मुलायम सिंह जी के कुनबे को समाजवादी मान लिया जाये तो यह भरी दोपहर में जागते हुए सपने देखने जैसा ही होगा.

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