लेखक परिचय

प्रवीण दुबे

प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

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-प्रवीण दुबे-   salman_modi_
देश के सबसे लोकप्रिय नेता और भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के बारे में कट्टरवादी सोच रखने वाले लोगों को देश के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सलमान खान से सबक लेने की जरूरत है। रविवार को एक समाचार चैनल पर दिए साक्षात्कार में जब सलमान खान से यह सवाल पूछा गया कि नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने में उन्हें कोई संकोच क्यों नहीं है? इस सवाल पर सलमान ने जो कुछ कहा वह गौर करने लायक है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी को जब न्यायालय ने निर्दोष साबित कर दिया है तो फिर उनकी तारीफ करने में संकोच क्यों होना चाहिए। यहां उन्होंने यह भी कहा कि अगर सलमान मोदी के पास गया तो इतना हंगामा हुआ क्यों? सिर्फ इसलिए कि मेरा नाम सलमान खान है। जबरन कुछ लोग मेरी मुस्लिम पहचान को उभार रहे हैं। सलमान ने यह भी कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है। बताना उपयुक्त होगा कि पिछले दिनों सलमान खान भाजपा प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी से मिले थे और गुजरात में पतंग महोत्सव के दौरान उन्होंने मोदी के साथ पतंग भी उड़ाई थी। इतना ही नहीं, सलमान ने मोदी की प्रशंसा भी की थी। सलमान खान की इस गतिविधि को लेकर कांग्रेस सहित तमाम उन लोगों ने आलोचनाओं का पहाड़ खड़ा कर दिया जो नरेन्द्र मोदी को 2002 के गुजरात दंगों का दोषी मानते आए हैं। सवाल यह उठता है कि बारह वर्ष पूर्व घटित घटना जिसको लेकर तमाम कानूनी कार्रवाई में मोदी को निर्दोष ठहराया जा चुका है उस पर बवाल खड़ा करना कहां तक उचित है। जहां तक गुजरात दंगों का सवाल है उसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता।  लेकिन एक ऐसे व्यक्ति को लगातार निशाना बनाए जाने का समर्थन करना भी कदापि उचित नहीं जिस पर एक भी आरोप आज तक सिद्ध नहीं हो सके।

एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जो लोग गुजरात दंगों पर पिछले बारह वर्षों से गला फाड़-फाड़ कर चिल्ला रहे हैं वे लोग कभी भी इन दंगों के मूल कारण की चर्चा नहीं करते। यदि वे ऐसा करते तो पता चल जाता कि गुजरात दंगों के पीछे गोधरा एक कड़वी सच्चाई की तरह जुड़ा हुआ है। यदि कट्टरवादी मुस्लिम ताकतें अयोध्या से कारसेवा करके लौट रहे रामभक्तों को साबरमती एक्सप्रेस में मिट्टी का तेल डालकर नहीं जलाते तो प्रतिक्रिया स्वरूप गुजरात दंगे भी नहीं भड़कते। यह सच है कि उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे लेकिन गुजरात दंगे अथवा गोधरा कांड इसके लिए सीधे उन्हें दोष देना तथा न्यायालय द्वारा इस दलील को ठुकरा दिए जाने के बावजूद दोषारोपण जारी रखना, इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। जो लोग ऐसा कर रहे हैं वास्तव में वह देश में न तो शांति के पक्षधर हैं और न यह चाहते हैं कि देश विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़े। ऐसे समय जबकि लोकसभा चुनाव नजदीक हैं पूरे देश में विकास, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे विषय चुनावी मुद्दा बने हुए हैं यह लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छी बात है। ऐसे समय इन मुद्दों से अलग हटकर दंगों, सांप्रदायिक विद्वेष आदि की तरफ बहस को  ले जाना कहां तक उचित है। इससे न तो मुसलमानों का भला होने वाला है न देश का। यह अच्छी बात है कि इस देश के मुसलमानों का एक बहुत बड़ा वर्ग अब भली प्रकार यह समझने लगा है कि वोटों की राजनीति के लिए उन्हें भड़काने का प्रयास लंबे समय से होता रहा है। इनमें वही लोग शामिल रहे हैं जो गुजरात दंगों की बात लगातार जीवित रखकर नरेन्द्र मोदी जैसे नेताओं पर आरोप लगाते रहे  हैं। यही कारण है कि गुजरात के पिछले विधानसभा चुनाव हों या फिर हाल ही में हुए चार राज्यों के विधानसभा चुनाव पूरे देश ने खासकर मुसलमानों ने ऐसी ताकतों को बुरी तरह नकार दिया है। वर्तमान में हिन्दू हो या मुसलमान सभी यह भली प्रकार समझ गए हैं कि मोदी के नेतृत्व में देश सुरक्षित रहने वाला है और विकास के रास्ते पर आगे बढऩे वाला है। यही कारण है मोदी की रैलियों में अपार भीड़ उमड़ रही है। मोदी पर आरोप लगाने वालों को सलमान से सीख लेने की आवश्यकता है।

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