लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर ‘शादाब’

सलमान रूशदी द्वारा ‘सैटेनिक वर्सेज’ लिखी तो सन् 1988 में गई थी पर इस किताब में इस्लाम के संस्थापक मुहम्मद साहब पर सलमान रुश्दी द्वारा जो टिप्पणिया की गई थी उस पर हिंदुस्तान का मुसलमान आज 24 सालो बाद भी इस कदर नाराज है कि 20 से 24 जनवरी तक राजस्थान के जयपुर में होने वाले साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने आने पर हिंदुस्तान का पूरा मुस्लिम समाज एक सुर में विरोध कर रहा है। जिस कारण विवादास्पद अंग्रेजी लेखक सलमान रूश्दी का भारत दौरा फिलहाल विवादो के साये में में घिर गया है। और इस के साथ ही यह दौरा कांग्रेस के लिये सांप और छचुंदर वाली स्थति में आ गया है कि खाये तो कोढी और न खाये तो नामर्द। मुस्लिम संगठनो ने 20 जनवरी को भारत आ रहे रूश्दी का वीजा तुरंत रद्द करने की मांग के साथ ही ये भी ऐलान किया है कि वो रूश्दी को भारत में कदम नही रखने देगे। कहा जा सकता है कि इस वक्त सलमान रूश्दी मामले में कांग्रेस जिस दो राहें पर खडी है वहा उस की स्थति बडी विकट है। यूपी विधानसभा चुनाव की वजह से वो मुसलमानो को नाराज करने का खतरा इस वक्त किसी कीमत पर नही लेना चाहती है। यू तो सलमान रूश्दी इस से चार वर्ष पूर्व भी भारत का दौरा कर चुके है पर तब और अब में जमीन आसमान का अंतर है। सलमान रूश्दी के भारत आगमन की खबर लगते ही देवबंद से लेकर नदवा तक तो विरोध हो ही रहा है इस के अलावा देश के राजनीतिक दलो ने भी घी में आग डालने का काम शुरू कर दिया है। देश के राजनेताओ और राजनीतिक दलो ने रूश्दी मामले में मुस्लिम प्रेम दिखाते हुए इस मामले पर आसमान सिर पर उठा रखा है। सभी ने एक सुर में केंद्र सरकार को चंतावनी दे डाली की इस शख्स के हिंदुस्तान आने पर तुरंत पाबंदी लगनी चाहिये।

सलमान रूश्दी ने पैगम्बर साहब की शान में जो कुछ भी कहा उसे आज तक आम मुसलमान नही जान पाया। पर किसी इन्सान से नफरत करना और इस हद तक नफरत करना कि 24 बरस बाद भी हम लोग उसे हिंदुस्तान नही आने देगे इस्लाम मजहब के उलेमाओ और हर मुसलमान का कहना है। क्या ऐसा कह कर के हम लोग मोहम्मद साहब की सुन्नत को खारिज नही कर रहे। पहले में बता दू कि यहा सुन्नत के क्या मायने है, सुन्नत मतलब वो काम जो मोहम्मद साहब सल0 ने किया। मुझे मोहम्मद साहब सल0 की जिंदगी का एक बहुत ही मशहूर किस्सा याद आ रहा है। मोहम्मद साहब अपने घर से निकलकर जब कही जाते तो एक औरत उन पर रोज अपने घर की छत से कूडा डाला करती थी, मोहम्मद साहब मुस्कुराते हुए उस कूडे को साफ कर आगे बढ जाया करते थे। एक दिन जब मोहम्मद साहब उसी जगह से गुजरे तो उन पर कूडा नही फेंका गया। अगले दिन भी कूडा नही फेंका गया हुजूर ने लोगो से उस घर की उस औरत के बारे में पूछा मालुम हुआ वो औरत जबरदस्त बीमार है, आप मोहम्मद साहब उस औरत की मिजाज़पुरसी के लिये उस के घर गये और उस का हाल चाल पूछा। मोहम्मद साहब का किरदार देखकर उस औरत की ऑखो में आंसू आ गये और वो ईमान ले आई। कहने का मतलब ये है कि जब मोहम्मद साहब का किरदार ऐसा था तो हम लोग भी उन्ही के उम्मती है। उन के जानशीन है। फिर हम किसी इन्सान से इतनी नफरत क्यो कर रहे है। हमे भी हुजूर के नक्शे कदम पर चलना चाहिये पर आज ऐसा नही है। क्या इस्लाम इस की इजाजत देता है कि हमे 24 साल तक एक आदमी से नफरत करते रहना चाहिये।

वैसे देखा जाये तो सलमान रूष्दी को इस आयोजन में शामिल होने और भारत आने के लिये किसी प्रकार की वीजा की जरूरत नही ऐसे मुस्लिम संगठनो के ऐतराज के बाद सलमान रूश्दी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भी मीडिया में कहा भी था कि ‘में रिकॉर्ड के लिये बताना चाहता हॅू कि मेरी भारत यात्रा के लिये मुझे किसी वीजा की आवष्यकता नही है। मेरे पास भारतीय मूल व्यक्ति का कार्ड है मेरी भारत यात्रा का यू विरोध करना अनुचित है।’ आईये पहले बात करते है कि ये भारतीय मूल व्यक्ति का कार्ड क्या है। भारत सरकार ने जनवरी 2005 में ओवरसीज सिटीजनशिप योजना की घोषणा की थी। इस सहूलियत का लाभ भारतीय मूल के वे तमाम ले सकते थे जो 26 जनवरी 1950 के बाद प्रवासी बने है। और जिन्होने पाक्स्तिान और बांग्लादेश को छोडकर किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है। लेकिन उन्हे ओवरसीज सिटीजनशिप तभी दी जाती है जब उन का देश स्थानीय कानूनों के तहत दोहरी नागरिकता को कुछ मायनो में स्वीकृति प्रदान करता हों। ओवरसीज सिटीजनशिप हासिल करने का ये मतलब नही कि वह व्यक्ति भारत का नियमित नागरिक हो गया वह न भारतीय पासर्पोट हासिल कर सकता है और न ही उसे वोट डालने का अधिकार मिलता है। उसे भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज जैसा संविधानिक पद भी नही दिया जा सकता और न ही वह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद का प्रत्याशी बन सकता है। सामान्यतः उसे भारत सरकार के अंर्तगत कोई रोजगार भी नही मिल सकता। वह भारत में खेती के लिये जमीन भी नही खरीद सकता, हा विरासत में वह ऐसी संपत्तियो का अधिकार जरूर पा सकता है। ओवरसीज सिटीजन बिना किसी रोक-टोक भारत भ्रमण कर सकता है। इस के पीछे दरअसल सरकार का उद्देश्य यही है कि भारी संख्या में प्रवासी भारतीय देश में आए और देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग दे। ओवरसीज सिटीजनशिप कार्ड आजीवन मान्य होता है। ओवरसीज सिटीजन को थाने में पंजीयन कराने की भी कोई जरूरत नही होती। जब किसी ओवरसीज सिटीजनशिप के रूप में पंजीकृत किया जाता है तो उसके पासर्पोट पर ‘यू’ वीजा स्टीकर लगा दिया जाता है।

दारूल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी का इस सारे मामले पर ये कहना कि सलमान रूश्दी का भारत दोरा मुसलमानो के जज्बातो को भडकाने वाला है। अपने लेखन से मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी करने के कारण पूरी दुनिया का मुसलमान रूश्दी से आज भी नफरत करता है। उन्हे किसी भी सूरत मे मुल्क में आने नही आने देना चाहिये इस के अलावा उन का ये भी कहना कि देश के सभी मुसलमानो को केंद्र सरकार पर दबाव बनाना चाहिये कि रूश्दी भारत न आने पाये। वही नदवा कालेज के मोहतमिम सलमान अल हुसैनी नदवी का ये कहना कि पैगम्बर साहब पर बेहद अमर्यादित टिप्पणियो के कारण आज दुनिया का हर मुसलमान रूश्दी को घृणा की नजर से देखता है। उन को भारत आने देना, केंद्र सरकार द्वारा हिंदुस्तान के तमाम मुसलमानो को ज़लील करना होगा। उन का दौरा रोकने की पहल जल्द नही हुई तो हिंदुस्तान का मुसलमान केंद्र सरकार को कभी माफ नही करेगां। देश के हर मुस्लिम संगठन को रूश्दी के दौरे के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिये। में समझता हॅू कि इन सब बातो से पहले एक सवाल ये होना चाहिये कि क्या चुनाव के समय ऐसे किसी आयोजन का होना सही है जिस से किसी एक जाति धर्म के लोगो की आस्था पर गहरी चोट होती हो उस के जज्बात भडके और देश में तनाव पैदा हो क्यो कि सलमान रुश्दी के नाम से ही मुसलमान उत्तेजित हो जाता है ऐसे में वो अगर हिंदुस्तान के किसी शहर में आये तो क्या होगां। क्यो कि केंद्र और राजस्थान दोनो जगह कांग्रेस की सरकार है अतः देश की एकता अखंडता और मुस्लिम समाज की भावनाए आहत न हो इस संबंध में कांग्रेस की जिम्मेदारी ज्यादा बनती है। हा इस संबंध में जॉच हो सकती है कि खास चुनाव के मौके पर सलमान रूश्दी को भारत बुलाने के पीछे किसी की कोई सोची समझी साजिश तो नही। और उन्हे इस आयोजन में किसने और क्यो बुलाया वैसे खास तौर से देश के पॉच राज्यो में हो रहे विधानसभा चुनावो को मद्देनजर रखते हुए ऐसे विवादित मेहमान और आयोजन से बचा भी जा सकता था। या फिर किसी की सोची समझी साजिश के तहत खास तौर से सांप्रदायिक तनाव फैलाने की मंशा के तहत ये आयोजन किया जा रहा हो। मेरी राय में देश के हालात न बिगडे इस को देखते हुए चुनाव आयोग को इस आयोजन पर रोक लगानी चाहिये। नही तो ये सलमान रूश्दी की भारत यात्रा कही काग्रेस के लिये कोढ में खाज साबित न हो जायें।

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2 Comments on "कांग्रेस के लिये कोढ में खाज, रूश्दी की भारत यात्रा"

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Jeet Bhargava
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सही कहा , इसा बार कोंग्रेस बीच फंस गयी है. लिहाजा उसने अमेरिका को नाराज न करने के लिए रश्दी को आने से मना नहीं किया है!!

इक़बाल हिंदुस्तानी
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बेहतर तो यही होता कि रुश्दी को इग्नोर किया जाता लेकिन अगर विरोध ही करना है तो देश के कानून के दायरे में ही होना चाहिए.

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