लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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मिलन सिन्हा

हमारे  नेता जी काफी चर्चित थे .

जनता से

जो काम करने को कहते थे

उसे पहले

खुद करते थे .

इस  मामले वे अपने को

पक्के सिद्धान्तवादी-गांधीवादी कहते थे .

एक बार उन्होंने कहा,

हम गरीबी हटाकर रहेंगे

अब गरीबी रहेगी या

हम रहेंगे .

सिद्धान्त के मुताबिक  उन्होंने पहले

अपनी गरीबी हटाने का प्रयास किया

और जल्दी ही

कई गाड़ियां खरीद लीं,

चार-पांच मकान  बनवा लिया

और भी न जाने

क्या-क्या जोड़ लिया .

इस तरह उन्होंने

एक नयी परम्परा को जन्म दिया

जिसका अनुसरण करते हुए

अधिकांश नेता गांधीवादी (?) बन गए

और पहले

अपनी-अपनी गरीबी हटाने में जुट गए !

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