लेखक परिचय

अशोक गौतम

अशोक गौतम

जाने-माने साहित्‍यकार व व्‍यंगकार। 24 जून 1961 को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की तहसील कसौली के गाँव गाड में जन्म। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से भाषा संकाय में पीएच.डी की उपाधि। देश के सुप्रतिष्ठित दैनिक समाचर-पत्रों,पत्रिकाओं और वेब-पत्रिकाओं निरंतर लेखन। सम्‍पर्क: गौतम निवास,अप्पर सेरी रोड,नजदीक मेन वाटर टैंक, सोलन, 173212, हिमाचल प्रदेश

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dog birthdayअचानक दोपहर बाद आफिस में नोटिस सर्कुलेट हुआ कि दो दिन बाद यानि रविवार को मैडम के कुत्ते का बर्थडे है और इस अवसर पर स्टाफ के सारे सदस्य सादर आमंत्रित हैं । यह नोटिस सर्कुलेट होते ही पूरे आफिस में खलबली मच गई। किसीको पता ही नहीं था मैडम कुत्ता प्रेमी भी हैं ,वे चुनिंदा अधीनस्थों के सिवाय कुत्तों से भी पे्रम करती हैं।

नोटिस पर साइन करते हुए शर्मा ने दांत निपोड़ते हुए कहा,‘ धन्य है मैडम। धन्य है यह कुत्ता जिसे मैडम का सान्निध्य मिला है। यार, यहां तो हमें सात फेरे लगाने के बाद भी घरवाली का सान्निध्य तो दूर, साथ तक नसीब नहीं। अब तो मन करने लगा है कि क्यों न अपनी घरवाली को छोड़ मैडम का कुत्ता हो जाऊं जो इतने प्यार से अपने कुत्ते का जन्म दिन मना रही है। ऐसे में वे अपनी हसबेंड का बर्थडे किस जोश में मनाती होंगी? यह सोचने भर से ही कलेजा मुंह से बाहर को आने को होता है। इधर तो अपनी घरवाली तक ने आजतक कभी प्यार से थाली में रोटी तक न परोसी ’, कहते उनका चेहरा देखने लायक था, मानों बीस वर्षों का उनका दर्द एक ही बारी में चेहरे पर उभर आया हो।

‘ पर यार ये कुत्ता होगा किस जात का?’ वर्मा ने कुत्ते की जात में जिज्ञासा दर्शाई तो गुप्ता ठहाका लगाते बोले,‘ अरे तुम भी रह गए न  गोबर गणेश के गोबर गणेश ही। तभी तो तुम्हें आफिस की कोई भी मैडम घास तक नहीं डालती। जात आदमियों की होती है कुत्तों की नहीं।’

‘तो कुत्तों का क्या होती है?’ वर्मा ने खीझते हुए पूछा तो गुप्ता ने आफिस का सबसे ज्ञानवान होने का दिखावा करते गंभीर मुद्रा में कहा ,‘ वत्स! कुत्ते की कास्ट होती है कास्ट।’

‘तो यह कुत्ता किस कास्ट का हो सकता है?’

‘यह तो मैडम जाने या फिर उनका कुत्ता! यहां कौन सी उसकी सर्विस बुक बनी है।’

‘तो क्या कुत्ते से उसकी कास्ट के बारे में पूछ लिया जाए?’

‘ पर कुत्ता क्या अपनी कास्ट बताएगा? जबकि आज के दौर में कोई भी अपनी कास्ट बताने से गुरेज करता है? किसी की जात पूछना कानूनन जुर्म है। सब जीव एक से होते हैं।’

‘कुत्ते की भी??’

‘ओए चुप रहो। जेल जाना है क्या कुत्ते की कास्ट पूछ कर? कुत्ता है तो बस कुत्ता है। हमें क्या लेना उसकी कास्ट कुस्ट से। वह मैडम का कुत्ता है तो बस क्लास वन कुत्ता है ,’ बीड़ी पीता रमेश डायरी डिस्पेचर चहका।

तो अब सवाल आ खड़ा हुआ कि स्टाफ की ओर से कुत्ते के बर्थडे पर स्टाफ की ओर से शुभकामनाओं के रूप में गिफ्ट क्या दिया जाए ताकि कुत्ता उस गिफ्ट को आदमी होने तक याद रखे। अतः लंच के बाद ज्यों ही मैडम घर को रवाना हुईं इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आफिस में सारे काम छोड़ आपातकालीन बैठक रखी गई।

स्टाफ मीटिंग में  मैडम के मुंह लगे दीवान ने सुझाव दिया,‘ मित्रो! मैडम के कुत्ते का यह पहला जन्मदिन है, सो मेरी तो राय है कि मैडम के जन्मदिन पर हम चाहें उन्हें हल्का सा गिफ्ट ही क्यों न दें पर उनके कुत्ते के जन्मदिन पर हमें ऐसा गिफ्ट देना चाहिए कि मैडम उस गिफ्ट को देखकर तो दंग रह ही जाए , उनका कुत्ता भी उस गिफ्ट को देख वाह वाह कर उठे। दूसरे, कुत्ते को  हमारे स्टाफ का गिफ्ट देख लगे कि हम कुत्तों से ही प्रेम करते हैं। मैडम को प्रसन्न करने का ये अवसर भी हमें हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। मैडम ने कुछ सोच समझकर ही अपने कुत्ते के बर्थ डे पर हमें सादर आमंत्रित किया है, यह उनका बड़प्पन है। वैसे हम लोग मैडम से अपने अपने रिश्ते के हिसाब से जो व्यक्तिगत तौर पर उनके कुत्ते को गिफ्ट करना चाहें , उनकी अपनी मर्जी । पर मेरा विचार है कि स्टाफ की ओर से कुत्ते के लिए जो भी हो , जरा कुछ हटकर हो तो अच्छा लगेगा ,’ कह वे अपनी कुर्सी पर पसर गए। काफी देर तक हाउस में सन्नाटा पसरा रहा । कुछ देर तक सन्नाटा पसरा रहने के बाद मिसेज सीमा अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हो बोलीं,‘ मेरे हिसाब से दीवान जी सही कह रहे हैं। हमें कुत्ते के प्रति अपना पे्रम दर्शाने के लिए उसे अच्छा सा गिफ्ट देना चाहिए। ऐसा होने से कुत्तों में हमारे प्रति विश्वास बढ़ेगा, प्यार बढ़ेगा।’

‘ तो क्या दें?’ एक यक्ष प्रश्न स्टाफ मीटिंग में मंडराने लगा।

‘ मेरे हिसाब से मैडम के कुत्ते के लिए स्टाफ फंड में से कोट ले लेते हैं। ’

‘गले का पट्टा क्यों नहीं?’

‘ वह तो हम सबके गले में है,’पता नहीं बीच में कौन कह गया।

‘पर मैडम, कोट तो मैं आजतक नहीं ले सका ,’  ज्ञानी ने ठहाका लगाया तो सतीश ने बीच में कहा,‘ दोस्त! ये जरूरी नहीं कि जो हमारे पास न हो वह हम कुत्ते के बर्थडे पर उसे गिफ्ट न करें।’

‘ऐसे में मैडम के लिए भी गिफ्ट तो बनता ही है न?’ बीच में से पता नहीं फिर किसने कहा तो स्टाफ सचिव ने सबको शांत करते कहा,‘ हां! वह तो बनता ही है। वैसे कुत्ते का बर्थ डे मनाने का सौभाग्य हमें मैडम के सौजन्य से ही तो मिल रहा है। मैडम न होतीं तो कुत्ता न होता। और ऐसे में हम एक बेहतर जीव के बर्थ डे में जाने से रह जाते।’

‘साहब , हमने तो कभी अपने बच्चों तक का जन्मदिन नहीं मनाया। इस बहाने वहां जाकर पता तो चल जाएगा कि आखिर जन्मदिन में होता क्या है,’ पीउन ने सादर दोनों हाथ जोड़े कहा।

‘क्यों नहीं, पर उस दिन इस डेªस में मत आना। वैसे भी वहां पर सारे काम तुम्हें और दीवान को ही तो करने होंगे।’

‘ठीक है साहब। एक प्रार्थना और…..’ पीउन ने स्टाफ सचिव के आगे दोनों हाथ जोड़े तो वे  बोले,‘कहो।’

‘क्या मैडम के कुत्ते के जन्मदिन पर मैं अपनी बेटी को भी ला सकता हूं? कुत्ते के जन्मदिन के मौके पर केक तो कटेगा न साहब? ‘

‘ हां, पर तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो? अभी से कुत्ते की तरह जीभ मूतने लगी क्या?’

‘ नहीं साहब, इस बहाने कम से कम वह यह तो देख लेगी कि जन्मदिन के मौके पर होता क्या -क्या है। कैसा होता है केक और केक का स्वाद कैसा होता है।’
अशोक गौतम

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1 Comment on "हर हाइनिसेस बर्थडे"

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बी एन गोयल
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बी एन गोयल

अच्छा व्यंग्य है – लिखते रहो और गुदगुदाते रहो

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