लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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कामिनी कामायनीlady

रायगा है उनकी महफिल,है वहाँ दीवाने सब ,

बेरहम,महरुम बंदे ,बदगुमानी से है भरे ।

किसको है फुर्सत यहाँ पर ,बज्म का देखे मिजाज

सब कहर ढाने को आगे ,सब जहर से हैं भरे ।

वह शिकस्ता नाव अपनी कब से कोने में खड़ी

जाना था उस पर जिनको ,सब के सब डरके खड़े ।

है हिदायत उनको कि लहू से लिखेंगे वो खत ,

पर वो हैअंधों की बस्ती ,कौन किसको क्या कहे ।

मौज दरिया से निकल कर और जा सकता कहाँ ,

कौन उसको माफ करता ,कौन नैनों मे भरे ।

 

 

 

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