लेखक परिचय

शैलेन्द्र चौहान

शैलेन्द्र चौहान

कविता, कहानी, आलोचना के साथ पत्रकारिता भी। तीन कविता संग्रह ; 'नौ रुपये बीस पैसे के लिए'(1983), श्वेतपत्र (2002) एवं, 'ईश्वर की चौखट पर '(2004) में प्रकाशित। एक कहानी संग्रह; नहीं यह कोई कहानी नहीं (1996) तथा एक संस्मरणात्मक उपन्यास पाँव जमीन पर (2010) में प्रकाशित। धरती' नामक अनियतकालिक पत्रिका का संपादन। मूलतः इंजीनियर। फिलहाल जयपुर में स्थायी निवास एवं स्वतंत्र पत्रकार।

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-शैलेन्द्र चौहान-

summer

देश के अनेक हिस्सों में लू व भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिन के 11 बजे के बाद सडकों पर लोग कम ही दिख रहे हैं। जानलेवा गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गर्म हवाएं लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है। गर्मी का सबसे ज्यादा असर दक्षिणी राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में है। सबसे ज्यादा मौतें भी यहीं हुईं हैं, मरने वालों में ज्यादातर मजदूर एवं किसान हैं। गर्मी और लू से मौत के मामले उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में भी सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में पारा 47.7 डिग्री तक पहुंचा। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में लू का प्रकोप बेहद ज्यादा है। बीते दो-दिनों में कल से राज्य में 150 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आकर मारे गए हैं। दिल्ली में 25 मई को तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रहा और यह पिछले 10 सालों में केवल दूसरा मौका था, जब तापमान ने 45 डिग्री पर पारा छुआ हो। पाकिस्तान के जलालाबाद में पारा 49 डिग्री पर थमा हुआ है। इसके अलावा, पाकिस्तान के नवाबशाह जिले में भी तापमान 48-50 डिग्री चल रहा है। ये सिंध प्रांत के जिले हैं और यहीं से आने वाली हवाएं दिल्ली और उत्तर भारत को बुरी तरह झुलसा रही हैं। पूरे देश में लू के कारण अब तक करीब1100 से अधिक जानें जा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी गर्मी से लोग बेहाल हैं। साथ ही महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल जैसे दूसरे राज्य भी प्रचंड गर्मी से जूझते रहे। इनमें से अधिकतर राज्यों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। आदमी तो आदमी पशु पक्षी तक इस गर्मी  परेशान हैं। चिड़ियां, चमगादड़ मोर दम तोड़ रहे हैं।  चिलचिलाती धूप में लू के थपेड़ों ने जनजीवन को बेहाल कर रखा है। अब इसका असर सेहत पर भारी पड़ने लगा है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, उल्टी दस्त, डीहाइड्रेशन से पीड़ित लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमार हो अस्पताल पहुंच रहे हैं। गर्मियों में उत्तर-पूर्व तथा पश्चिम से पूरब दिशा में चलने वाली प्रचण्ड उष्ण तथा शुष्क हवाओं को लू कहतें हैं। इस तरह की हवा मई तथा जून में चलती हैं।

अकेले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में गर्मी और लू से मरने वालों का आंकड़ा 1100 तक पहुंच चुका है। ताजा खबरों के मुताबिक लू ने आंध्र प्रदेश में अबतक 852 लोगों की जान ली है तो वहीं तेलंगाना में 266 लोगों की मारे जा चुके हैं। इससे पहले आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एन चिन्ना राजप्पा ने बताया है कि 25 मई तक 551 लोगों की मौत हुई। वहीं, तेलंगाना के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने 215 लोगों के मरने की पुष्टि की है। हैदराबाद मौसम केंद्र ने अगले 24 घंटों के दौरान लू का प्रकोप जारी रहने की चेतावनी दी है। हालांकि तेलंगाना में दिन के तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के हनमकोंडा, खम्मम, नलगोंडा और रामागुंडम में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लू के समय तापमान 48° सेंटिग्रेड से तक  पहुंच जाता है। इस हद तक तापमान का बढ़ना कहीं न कहीं ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम भी है। अनियोजित और अनियंत्रित औद्योगिकीकरण से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। नतीजतन सम्पूर्ण विश्व पर ग्लोबल वार्मिंग का खतरा मंडराने लगा है। ग्लोबल वार्मिंग यानी वैश्विक गर्माहट बढ़ने से पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से तापमान में वृद्धि हुई है और जलवायु में परिवर्तन के खतरे सामने आये हैं वे चिंतित करने वाले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस परिवर्तन के पीछे ग्रीन हाउस गैसों की मुख्य भूमिका है। इन गैसों में क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, कार्बनडाई-आक्साइड, मीथेन, नाइट्रस-आक्साइड और हाइड्रोजन और कार्बन मोनोआक्साइड आदि गैसें शामिल हैं। ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ने का मुख्य कारण औद्योगिकीकरण है इसके साथ-साथ जंगलों का तेजी से कम होना, पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में वृद्धि होना, प्रदूषण बढ़ना और रेफ्रीजरेटर, एयर कंडीशनर, कोल्ड स्टोरेज आदि के बढ़ते प्रयोग से भी ग्रीन हाउस गैसों का प्रभाव बढ़ रहा है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 तक भारत विश्व का ऐसा देश होगा, जिसके हवा, पानी, जमीन और वनों पर औद्योगिकीकरण का सबसे अधिक दबाव होगा जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। वैसे हमारी जलवायु में गर्मियों के मौसम में लू चलना स्वाभाविक है। इसे  कुछ लोग तो सहन भी कर लेते हैं, लेकिन कुछ लोग सहन नहीं कर पाते और वे लू का शिकार हो जाते हैं। तब  “लू” लग जाना या तापघात एक व्याधि के रूप में परिवर्तित हो जाती है। “लू” लगने का प्रमुख कारण शरीर में नमक और पानी की कमी होना है। पसीने की “शक्ल” में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून की गर्मी को बढ़ा देता है। सिर में भारीपन मालूम होने लगता है, नाड़ी की गति बढ़ने लगती है, खून की गति भी तेज हो जाती है। साँस की गति भी ठीक नहीं रहती तथा शरीर में ऐंठन-सी लगती है। बुखार बढ़ जाता है। हाथ और पैरों के तलवों में जलन-सी होती है। आँखें भी जलती हैं। इससे अचानक बेहोशी व अंततः रोगी की मौत भी हो सकती है। अतः इससे बचाव आवश्यक है। गर्मी और लू से बचने के लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने और घरों के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन के पास लू से निपटने का कोई इंतजाम नहीं दिख रहा है। सरकार के पास इस स्थिति से निपटने की न कोई योजना है न उपाय। राष्ट्रीय नेता सभाएं और रैलियों में मशगूल हैं। आम आदमी के स्वघोषित पैरोकार प्रधानमंत्री को मरनेवालों की कोई सुध नहीं है। किसानों के हमदर्द भी अब चुप बैठे हैं। राहत के लिए बेसब्री से मानसून का इंतजार हो रहा है। उम्मीद की जा रही है कि मानसून दक्षिणी तटरेखा तक 31 मई तक पहुंचेगा। उसके बाद उत्तरी राज्यों तक मानसून पहुंचने में उसे कुछ हफ्ते और लग सकते हैं।

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1 Comment on "भीषण गर्मी से मचा हाहाकार"

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इंसान
Guest
परंपरागत जीवन निर्वाह करते प्रायः भारतीय घर में बड़े बूढ़ों से सीखते आए हैं| मैं स्वयं वृद्धावस्था में मस्तिष्क पर बल दे याद करने का प्रयत्न कर रहा हूँ कि कब किसी शासकीय अधिकारी ने मेरी व्यक्तिगत समस्याओं का हल निकाल मुझे किसी दुविधा से उभारा हो! जी नहीं, उसे तो जीने की इच्छा लिए डा: दीपक आचार्य जी के बेशर्म नंगे और भूखों को चोरी करते पकड़ उन्हें लूटते देखा गया है| शैलेन्द्र चौहान जी आज आप भीषण गर्मी से मचे हाहाकार के बीच पाठकों को कहना चाहते हैं कि ‘प्रशासन के पास लू से निपटने का कोई इंतजाम… Read more »
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