लेखक परिचय

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी

मयंक चतुर्वेदी मूलत: ग्वालियर, म.प्र. में जन्में ओर वहीं से इन्होंने पत्रकारिता की विधिवत शुरूआत दैनिक जागरण से की। 11 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय मयंक चतुर्वेदी ने जीवाजी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर, एम.फिल तथा पी-एच.डी. तक अध्ययन किया है। कुछ समय शासकीय महाविद्यालय में हिन्दी विषय के सहायक प्राध्यापक भी रहे, साथ ही सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को भी मार्गदर्शन प्रदान किया। राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मयंक चतुर्वेदी पांचजन्य जैसे राष्ट्रीय साप्ताहिक, दैनिक स्वदेश से भी जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों पर लिखना ही इनकी फितरत है। सम्प्रति : मयंक चतुर्वेदी हिन्दुस्थान समाचार, बहुभाषी न्यूज एजेंसी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख हैं।

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी

हमारे साथ ही आजाद हुआ इलराइल देश मुट्ठी भर आबादी रखने के बाद भी साहस के साथ अपने आठ पड़ोसी देशों के पांच हमले झेलने और उनमें फतह हासिल करने के बाद आज विकसित एवं शक्ति सपन्न बनकर दुनिया के सामने है। यह देश अपने विकास के साथ आज समुचे विश्व को अन्न और फल की आपूर्ति कर रहा है। हमारे वैज्ञानिक भी इस रेतीली जमीन और जलसंकट वाले देश की तकनीकी सीखने जाते हैं। वहां के नागरिकों (यहूदियों) की ओर नजर उठाने वालों की आंख भी सलामत नहीं रहती। इस्रायल कहां से कहां पहुंच गया लेकिन भारत आज भी समस्याओं से जूझ रहा है। देश में खतरा कम नहीं हुआ है। यदि देश खतरे में है, तो हम कैसे सुरक्षित हो सकते हैं। अब भारत को भी इजराइल जैसा बनना होगा। हमारी सीमा के शत्रु बाज नहीं आ रहे हैं , हमारा देश जितना अधि‍क शक्ति संपन्न होगा, हम उतने ही सुरक्षित होंगे। आरएसएस का प्रमुख काम देश की भलाई करना है और वह इसको बखूबी करता रहेगा। दुर्भाग्य की बात है कि देश में आजादी के बाद से कई सरकारें बनीं, लेकिन आम जनता के दुख-दर्द कम नहीं हुए हैं। उक्त उद्गार सागर के खेल परिसर में जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने गत दिवस विक्त किए।

 श्री भागवत ने कहा कि हिंदू ही एकमात्र रास्ता है जो सबको साथ लेकर चलता है। हिंदू में ही सर्वधर्म समभाव का जागरण है। दुनिया में हिन्दू ही एक ऐसा मार्ग है, जो लोगों को जोड़ने का कार्य करता है। हिन्दू राष्ट्र में विविधता में एकता दिखती है। बाकी जो भी मार्ग है, वह अलग-अलग दिखते हैं और अलग-अलग बातें करते हैं। हालांकि, यह बात महत्वपूर्ण है कि सबको जाना एक ही जगह है। हिंदू राष्ट्र के समर्थन में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक एमएन राय, रविंद्रनाथ टैगोर से लेकर डॉ. भीमराम आंबेडकर के तर्कों का हवाला भी दिया। जिसमें आपने बताया कि हिंदुत्व ही सामाजिक सद्भाव एवं विकास का एकमात्र रास्ता है। हिंदू ही विविधता में सभी को समभाव से स्वीकार करता है। उन्होंने गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर के लेख स्वदेशी समाजके अंश का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू-मुस्लिमों के बीच सद्भाव और एकता का रास्ता हिंदुत्व से ही निकलेगा।

आपने उदाहरण देते हुए कहा कि पहाड़ पर चढ़ने पर पता चलता है कि सभी को ऊंची चोटी पर पहुंचना है, लेकिन नीचे से आते वक्त कोई सीधा रास्ता चुनता है, तो कोई टेड़ा-मेढ़ा। डॉ. भागवत ने कहा कि देश के लोगों और कार्यकर्ताओं को देश के लिए जीने और मरने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए अपना स्वार्थ त्यागना होगा। अपने 50 मिनट के भाषण में आपने समृद्धि, सुरक्षा एवं विकास के लिए भारत के सभी जन पहले सबल बने इस बात पर बल दिया।

 जैसी कल्पना थी, देश वैसा नहीं हुआ

डॉ. भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व हमारा मानना था कि अंग्रेज ही देश के सभी दुखों का कारण हैं, लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद भी हमारे दुख कम नहीं हुए। कई योजनाएं बनीं और आयोग बने फिर भी जितनी प्रगति देश को करनी चाहिए थी, उतनी नहीं कर पाई। हालांकि, अभी तक थोड़ी-बहुत प्रगति देश ने की है, वो सब देश के नागरिकों की मेहनत-कौशल का नतीजा है। उन्होंने किसी भी नेता या पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि जिन नेताओं की सरकारें रहीं, उनमें कुछ पैसा खर्च हुआ, कुछ विकास हुआ और कुछ पैसा भ्रष्टाचार में चला गया।

 देश को ठेके पर नहीं दिया जा सकता

डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में देश में सम्पूर्ण समाज की बराबर भागीदारी और जबावदारी पर बल देते हुए कहा कि सभी को अधि‍कार से ज्यादा अपने कर्तव्यों पर ध्यान देना होगा। देश को किसी भी सूरत में राजनैतिक दलों को ठेके पर नहीं दिया जा सकता, क्योंकि राजनीति से देश का उत्थान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि देश सुरक्षित और सुखमय है तो ही हमारी घर-गृहस्थी सुरक्षित है और देश खतरे में है तब जान लें कि हम सभी खतरे में रहेंगे। जिनका देश समर्थ-सुरक्षित नहीं, वो दुनिया में कहीं भी जाएं, उनके सिर पर संकट हमेशा मंडराता रहेगा।

देश शब्द का मतलब स्पष्ट किया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिविर के समापन कार्यक्रम में संघ सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि देश के लोगों और कार्यकर्ताओं को देश के लिए जीने और मरने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए अपना स्वार्थ त्यागना होगा। देश शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए आपने बताया कि, देश से तात्पर्य केवल भूमि से ही नहीं है बल्कि भूमि पर मौजूद जल, जंगल, जानवर, संस्कृति, परंपराओं की संपूर्ण पहचान देश को इंगित करती है।

संघ को समझना है तो पहले बने स्वयंसेवक

आपने बड़े ही रोचक अंदाज में अंधों के हाथी की कहानी सुनाकर संघ का परिचय दिया। श्री भागवत बोले कि गणवेश और लाठी देख संघ को अखाड़ा न समझेदेशवासियों में संस्कार जगाने के अभियान में हम जुटे हैं, मेरे कहने पर भरोसा करने के बजाए संघ को समझना है तो पहले स्वयंसेवक बने और संघ क्या है, यह अनुभव से समझिए। संघ को इससे जुड़कर ही समझा जा सकता है।  

देश में स्वयंसेवक कर रहे अनगिनत सेवा कार्य

डॉ. भागवत ने कहा है कि संघ के स्वयंसेवक बिना किसी सरकारी मदद के अपनी चमड़ी घिसकर और दमड़ी खर्च कर देशभर में अनगिनत सेवा के कार्य चला रहे हैं। देश का कल्याण योग्य लोगों से ही होगा, इसलिए संघ में आकर स्वयं को योग्य बनाएं, तभी देश दुनिया, अपना परिवार एवं पीढ़ियां सुखी होंगी। आपने कहा कि अच्छा देश बनाने के लिए श्रेष्ठ नागरिकों का निर्माण जरूरी है। आरएसएस पिछले 90 वर्षों से इसी काम में जुटा है। आरएसएस न अखाड़ा है, न पैरमिलिट्री फोर्स है, न संगीतशाला है, न पार्टी और न ही टिकिट दिलवाने का कोई संस्थान है, यह योग्य व्यक्ति निर्माण का सतत कार्य करने वाला संगठन है।

सबकी अपनी-अपनी विचारधारा है

श्री भागवत ने कहा कि दुनिया में सबकी अपनी-अपनी विचारधारा है। और वह उन्हें मजबूत और आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। संघ भी अपनी विचाराधारा पर कायम है और वह इसे आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

स्वयंसेवकों ने किया शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन

संघ की इस सार्वजनिक सभा के आयोजन में श्री भागवत के मुख्य उद्बोधन के पूर्व हजारों स्वयंसेवकों ने सूर्यनमस्कार सहित अन्य क्र‍ियाओं द्वारा अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। जिले एवं संभाग के कई स्थानों से आए स्वयंसेवकों ने खेल परिसर मैदान पर संघ प्रमुख के सामने शारीरिक योग क्रियाओं का प्रदर्शन किया। हजारों स्वयंसेवकों ने दंड हाथ में लेकर पूरे गणवेश में योग क्रियाएं की, जो यहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं संभागभर से आए हजारों स्वयंसेवक शहर के मुख्य मार्गों पर पथ संचलन करते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। दोपहर 12 बजे से ही शहर में चारों दिशाओं से पथ संचलन निकलना शुरू हो गए थे, जो अलग-अलग स्थानों से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। बड़ा बाजार, सिविल लाइन सहित अन्य कई स्थानों से निकले पथ संचलन में छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग सभी वर्गों के लोग भारत माता के जयकारे और गीत गाते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।

इस अवसर पर मध्यक्षेत्र के संघचालक अशोक सोनी, महाकौशल प्रांत के संघचालक प्रशांत सिंह और सागर विभाग के संघचालक गौरीशंकर चौबे मंचासीन अतिथियों में शामिल थे। इनके अलावा सैंकडों गणमान्य नागरिक और जनसामान्य मौजूद था।

एकत्रीकरण कार्यक्रम की झलकियां

संघ का एकत्रीकरण कार्यक्रम तय समय दोपहर 2.30 बजे शुरू हुआ।

इसमें हजारों की संख्या में पहुंचे गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने शरीरिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम में मातृशक्ति को भी आमंत्रित किया गया था।

सागर में आयोजित इस कार्यक्रम के लिए करीब 10 हजार कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी।

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