लेखक परिचय

एल. आर गान्धी

एल. आर गान्धी

अर्से से पत्रकारिता से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में जुड़ा रहा हूँ … हिंदी व् पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है । सरकारी सेवा से अवकाश के बाद अनेक वेबसाईट्स के लिए विभिन्न विषयों पर ब्लॉग लेखन … मुख्यत व्यंग ,राजनीतिक ,समाजिक , धार्मिक व् पौराणिक . बेबाक ! … जो है सो है … सत्य -तथ्य से इतर कुछ भी नहीं .... अंतर्मन की आवाज़ को निर्भीक अभिव्यक्ति सत्य पर निजी विचारों और पारम्परिक सामाजिक कुंठाओं के लिए कोई स्थान नहीं .... उस सुदूर आकाश में उड़ रहे … बाज़ … की मानिंद जो एक निश्चित ऊंचाई पर बिना पंख हिलाए … उस बुलंदी पर है …स्थितप्रज्ञ … उतिष्ठकौन्तेय

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कुरआन ए पाक में सच्चे मुसलमान के लिए हज यात्रा का विशेष महत्तव वर्णित है. हज यात्रा केवल अपनी कमाई में से या फिर निकट सम्बन्धी से प्राप्त धन राशी से ही हलाल मानी जाती है. इसी लिए किसी भी मुस्लिम देश में हज यात्रियों के लिए सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाती क्योंकि यह शरियत की हिदायतों के खिलाफ है. बहुत से इस्लामिक विद्वान सरकारी सब्सिडी पर हज यात्रा को ‘हराम’ मानते हैं . फिर भी हमारे सेकुलर हुक्मरान १८० मिलियन मुस्लिम बिरादरी को खुश करने के लिए हज यात्रा के लिए सब्सिडी निरंतर बढाते चले जा रहे हैं . इस वर्ष केंद्र ने हज सब्सिडी के लिए फिर से ८०० करोड़ की भारी भरकम राशि मंजूर की है. १९९४ में यह राशी १०.५७ करोड़ रूपए थी जो २००८ आते आते ८२६ करोड़ हो गई.

प्रति हज यात्री खर्च भी १२०० रूपए से , २००९ आते आते बढ़ कर ५१,६१० रूपए हो गया. हर वर्ष लगभग १.६४ लाख मुसलमान हज यात्रा को जाते हैं जिनमें से १.१५ लाख सरकारी सब्सिडी पर यात्रा करते हैं जिनका चयन हज कमेटी कुर्रह -अर्थात लाटरी से करती है. २००२ में हज कमेटी ने ७०,२९८ यात्री भेजे थे और २००८ आते आते यह संख्या १२,६९५ हो गई.

ऐसे ही केरल और आंध्र प्रदेश में ईसाई यात्रिओं को भी सरकारी सब्सिडी दी जाती है. हमारे सेकुलर हुक्मरानों को शायद खुद को सेकुलर दिखाने के लिए या फिर अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करने के लिए ‘भारतीय जनता के खून पसीने की कमाई के ‘कर’ को लुटाने में मज़ा आता है.

सेकुलर छवि बनाए रखने के लिए यह भी जरूरी है कि यह सुविधा बहुसंख्यक ‘हिन्दुओं’ को हरगिज़ न दी जाए. हर साल ९६० हिन्दू यात्री पवित्र मानसरोवर यात्रा को जाते हैं. इस यात्रा के लिए उन्हें कुमाऊ मंडल विकास निगम को २४,५०० रूपए अदा करने पड़ते हैं जिसमें ५०००/- सिक्योर्टी जो वापिस नहीं होती, भी शामिल है.इसके अतिरिक्त २१५०/- और ७०० डालर (३१५००/-) अलग से देने होते हैं जो चीन सरकार को जाते हैं.यात्रा पर होने वाले अन्य खर्चे अलग से. इस प्रकार प्रतीयेक हिन्दू यात्री को ५८.१५०/- तो यात्रा शुल्क और कर के रूप में ही सरकार को देने होते हैं. इस प्रकार हर वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा पर हिन्दू यात्री अपनी सेब से ५.५६२४ करोड़ रूपए खर्च करते हैं और हमारी सेकुलर सरकार अपने हिन्दू यात्रियों को १% भी सरकारी सब्सिडी देना मुनासिफ नहीं समझती.

आज़ादी के ६४ बरस बाद भी हम अपनी जनता को स्वच्छ पीने का पानी तक मुहैय्या नहीं कर पाए . हर १५ सैकंड के बाद एक बच्चा जल जनित रोग से मर जाता है. हमारे बंगाली बाबू ने इस साल नदियों के जल को साफ़ करने के लिए, महज़ २०० करोड़ रूपए अपने बज़ट में अलग से रख छोड़े हैं. वोट बैंक सब्सिडी का चौथा हिस्सा ! ठीक ही है भई बच्चे कब वोट डालते हैं.

निरंतर अल्पसंख्यक तुष्टिकरं और आसमान छूती हज सब्सिडी को देखते हुए एक प्रशन हर भारतीय के मन में अपने आप ‘विकिलीक के खुलासों की माफिक उजागर हो उठता है. क्या गाँधी नेहरु का भारत आज भी मुग़ल कालीन ‘इस्लामिक राज्य ‘ तो नहीं ?

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41 Comments on "सेकुलर सरकार की हज सब्सिडी"

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शैलेन्‍द्र कुमार
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अगर हिन्दुओं को धार्मिक सब्सिडी मिलती है और वो लेते है तो मेरी नज़र में वो पाप करते है፣ जब कण कण में भगवान है तो धार्मिक सब्सिडी की कोई आवश्यकता नहीं፣ तीर्थ करने की इच्छा है तो जब इतना कमा लेंगे तो करेंगे፣ किसी दूसरे के पैसे से ऐसा करने से मेरी मान्यता है कि कम से कम भगवान ऐसी प्रार्थना स्वीकार नहीं करेंगे बल्कि सरकार को किसी भी धर्म से जुड़े आर्थिक मामले में कोई दखल नहीं देना चाहिए፣ चाहे धन लेने की बात हो चाहे सब्सिडी देने की፣ सब्सिडी देनी है तो गरीबों की शिक्षा और स्वास्थ्य… Read more »
SAJID
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प्रिय महानुभावो, मै अधिक क्या कहू यहाँ पर अधिकतर लोगो के कहने का तात्पर्य ही यही है, कि भले ही देश के भ्रष्ट नेता ये सारा पैसा खा जाये पर मुसलमानों को कोई भी सुविधा न मिले! मै सिर्फ ये जानना चाहता हू कि क्या मात्र सब्सिडी ही देश के विकास में बाधक तत्व है? अगर मात्र सब्सिडी न दिए जाने से ही देश का भला होता है, तो सब्सिडी को नहीं दिया जाना चाहिए! मै स्वयं सब्सिडी का विरोध करूँगा, यदि आप में से कोई भी इस बात कि गारंटी ले ले, कि इन ८०० करोड़ रुपयों का सही… Read more »
Abdul Rashid
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शैलेन्द्र जी आपको शायद जानकारी नहीं है इसलिए आपने ऐसा लिखा है न तो कोई मस्जिद सरकारी है और न ही किसी मस्जिद के मौलवी की तनख्वाह सरकारी खजाने से आती है.आप अपने आस पास के मस्जिद से जानकारी लेकर देख लेना आपको आपका जवाब मिल जाएगा.रही बात हज की सब्सिडी का तो हज कि सब्सिडी के लिए क्या मुस्लमानो ने मांग कि है.सब्सिडी तो बी जे पी भी अपने शासन काल में ह्टा सकती थी नहीं हटाई क्यों ! रही बात तुष्टिकरण की तो बोट की राजिनिती को आप भी अच्छे से जानते होंगे. हम आप आपस में कड़वे… Read more »
raja sharma
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भाई रहीद जी आपका kahna तो सही है लेकिन कोर्ट भी सर्कार की गुलाम है. muslim भाइयों को समझना चाहिए की सर्कार की भीख पर कोई कोम तरक्की नहीं kar सकती. congress पार्टी कुछ लोलीपोप दिखाकर हमेशा ही मुसलमानों को ठगती रही रही है और न सिर्फ मुसलमानों को बल्कि देश में angrejo की तरह foot डालो राज करो की निति पर kam करते हुए नागरिको को आपस में लड़ती रही है और अपना मतलब साधती रही hei. आप ही सोचो की जैन समाज को अल्पसंख्यकों ka darja kiliye दिया गया जबकि हिन्दुओ के व्यापारी वर्ग में वह आते हैं.… Read more »
शैलेन्‍द्र कुमार
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“आमदनी अठन्नी खर्चा रुपय्या” देश विदेशी कर्ज का ब्याज देने के लिए कर्ज ले रहा है፣ इन महानुभावों को धार्मिक सब्सिडी चाहिए፣ मस्जिदों के मुल्ला मौलवियों को तनख्वाह चाहिए፣ जिसका शिक्षा፣ स्वास्थ्य और विकास से कोई लेना देना नहीं፣ सारा पैसा व्यर्थ

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