लेखक परिचय

नीरज वर्मा

नीरज वर्मा

1998 से सक्रिय, टी.वी.पत्रकारिता की शुरुवात , 16 सालों का तज़ुर्बा, राजनीति-आध्यात्म-समाज और मीडिया पर लगातार लेखन ! एक्टिव ब्लॉगर ! हिन्दी-मराठी-अंग्रेजी-भोजपुरी पर ख़ासी पकड़ ! अघोर-परम्परा पर, पिछले कई सालों से लगातार शोध !

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-नीरज वर्मा-  arvind kejariwal cartoon caricature copy
21 जनवरी को “आम आदमी पार्टी” के ख़ास आदमी, अरविन्द केजरीवाल ने अपना धरना ख़त्म कर दिया! धरने की वज़ह थी- पुलिस के “टेढ़े” पुलिसकर्मियों को सीधा करने के लिए केंद्र सरकार को सीधा करना ! 36 घंटे तक धरना-प्रदर्शन होता रहा ! पत्थर चले-लाठियां भांजी गयीं ! केंद्र सरकार ने अरविन्द को सीधा कर दिया ! परिणाम- सिफ़र ! आम जनता को पुलिस से “राहत” देने के नाम पर हुआ ये धरना, आम आदमी के लिए सौगात की जगह मुसीबत लेकर आया ! मगर अरविन्द और उनकी “आप” खाली हाथ नहीं लौटे ! लौट के बुद्धू घर को आये ! लेकिन अरविन्द को क़रीब से जानने वाले जानते हैं कि अरविन्द, बुद्धू नहीं हैं बल्कि ज़रूरत से ज़्यादा बुद्धिमान हैं ! ईमानदारी का सर्वाधिकार तो वो पहले से ही सुरक्षित लेकर बैठे हैं ! ऑल राइट्स रिज़र्व्ड ! राइट्स की मांग को लेकर धरने पर बैठा ये शख्स जानता है कि मई में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र, ये धरना आम आदमी को भले ही परेशान कर बैठा हो पर “आम आदमी पार्टी ” को मुनाफ़ा देकर गया ! वाया टीवी चैनल्स, आम आदमी के दिमाग पर अपनी पकड़ बनाने में उस्ताद केजरीवाल को मालूम है कि वोटों के लिए  टीवी के ज़रिये टीआरपी कैसे बटोरी जाती है, ये टीवी चैनल्स को भी मालूम है ! अरविन्द केजरीवाल, सास-बहू-साज़िश से भी ज़्यादा कारगर हो रहे हैं ! फ़ायदा अरविन्द को भी खूब हो रहा है ! आम आदमी उसी पायदान पर अटका है, जहां से चला था ! हालिया सर्वे बताते हैं कि केजरीवाल की “आप” दिल्ली के अलावा और किसी राज्य में सरकार नहीं बना सकती ! यहां तक कि प्रमुख विपक्षी दल का रूतबा भी हासिल करना मुमकिन नहीं ! दिल्ली में इसलिए, क्योंकि ज़्यादातर तथा-कथित नेशनल न्यूज़ चैनल्स का तमगा लगाए टीवी चैनल्स दिल्ली को ही हिंदुस्तान समझते हैं और हिंदुस्तान का मतलब महज़ दिल्ली लगाते हैं ! अरविन्द केजरीवाल, टीवी चैनल्स की इस “साज़िश” को बखूबी समझते हैं ! लिहाज़ा दिल्ली में शोर करने और आदमी के सामने संकट खड़ा कर, उसे उबारने का दावा करने वाला रातों-रात राष्ट्रीय-स्तर का बन जाता है ! ठीक उसी बिना पर, जैसे टीवी चैनल्स में काम करने वाले ज़्यादातर तथा-कथित बड़े पत्रकार, बिना दिल्ली के बाहर निकले राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार बन जाते हैं ! यानि दिल्ली छोड़कर, इस मुल्क़ के बाकी हिस्सों में चल रही ज़मीनी मुहिम की खबर ना केजरीवाल को है और ना ही टीवी चैनल्स के टीआरपी बूस्टर, केजरीवाल जानना चाहते हैं ! जहां टीवी न्यूज़ चैनल्स, वहां केजरीवाल और वाइस-वर्सा ! हिंदुस्तान के बाकी हिस्सों का रहनुमा कौन है या होगा, ये अभी सामने आना बाकी है ! कहते हैं  दिल्ली में, बड़े आदमियों की, छींक भी अहम् खबर है ! न्यूज़ चैनल्स वाले इसे  ब्रेकिंग ख़बर के तौर पर चलाते हैं, देश के बाकी हिस्सों में इंसान भूख से मर भी जाए तो सांस नहीं लेते ! ये मुई पावर और कुर्सी चीज़ ही ऐसी  है ! पहले केजरीवाल कहते थे कि उनके सीटिंग एम्एलए, लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगें ! “आप” पार्टी के विधायक बिन्नी ने तो इसी मुद्दे पर बागी तेवर अपना लिया ! बिन्नी लोकसभा का टिकट चाहते हैं ! मगर अब तो केजरीवाल भी लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं ! यानि जनता के कंधे पर बंदूक और मामला कुर्सी का ! पिछले 10 सालों में आम आदमी, कोंग्रेस से परेशान सा दिखता है ! हाथ का साथ उसे रास नहीं आ रहा ! संसद के नुमाइंदों का चुनाव नज़दीक है ! केजरीवाल अब तक दिल्ली से बहार नहीं निकले , हो सकता है लोकसभा चुनाव और उसमें जीत का लालच उन्हें दिल्ली से बाहर आने को मजबूर करे, न्यूज़ चैनल्स का तमगा लगाए टीवी चैनल्स की तरह ! पर ऐसे में सवाल ये कि आम आदमी का संकट तो टला नहीं ! बरक़रार है !
लोकतंत्र में अपनी बात कहने का हक़ सबको है , चुनाव लड़ने का भी हक़ सबको हासिल है ! और ये हक़ 1947 से बदस्तूर चला आ रहा है ! हिंदुस्तान की जनता दुखी है ! डूबते को तिनके का सहारा काफ़ी है ! केजरीवाल ने वादा किया था ! संसद से सड़क तक, आम आदमी का संकट दूर करेंगे ! संकट-मोचक बनेंगे ! विधान सभा चुना लड़े थे, मुख्यमंत्री बने ! लोकसभा भी लड़ेंगें ! प्रधानमंत्री बनेंगे ! नहीं बन पाये तो वोट काटकर त्रिशंकु सरकार बनवाएंगें ! किंगमेकर कहलवाएंगें ! पिछले १५ सालों से इस मुल्क़ में “ना घर के ना घाट के” वाले सरकारें बन रही हैं ! सबका अपना रोना है ! आम आदमी को हासिल महज़ एक कोना है ! हर मुसीबत के लिए उसे रोना है ! संविधान की अपनी मर्यादा है , एक सीमा है ! दुस्साहस के बावजूद, केजरीवाल अभी इसके उल्लंघन का अधिकार हासिल नहीं कर पाये हैं और शायद कर भी ना पाएं ! लंगड़ी सरकार और समझौतों की नुमाइंदगी, आम आदमी का भला कभी नहीं करती ! दिल्ली में अपने कट्टर विरोधी कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाकर, केजरीवाल ने साफ कर दिया है. कि … संसद से सड़क तक लड़ाई होगी, लंगड़ी सरकार भी बनेगी, समझौते भी होंगे ! ब्रेकिंग न्यूज़ भी चलेगी ! यानि आधी हकीकत और आधे फ़साने के बीच सनसनी का क्लीन-शेव, नया एंकर डायलॉग बोलता रहेगा…  आम आदमी की लड़ाई तो ऊपर वाले के हाथ में है जहांपनाह !

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