लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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water in eyeजिसकी खातिर हम लिखते हैं
वे कहते कि गम  लिखते हैं

आस पास का हाल देखकर
आँखें होतीं नम, लिखते हैं

उदर की ज्वाला शांत हुई तो
आँसू को शबनम लिखते हैं

फूट गए गलती से पटाखे
पर थाने में बम लिखते हैं

प्रायोजित रचना को कितने
हो करके बेदम लिखते हैं

चकाचौंध में रहकर भी कुछ
अपने भीतर तम लिखते हैं

कागज करे सुमन ना काला
काम की बातें हम लिखते हैं।

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5 Comments on "आँसू को शबनम लिखते हैं"

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
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सुन्दर रचना! शब्दों का उम्दा संयोजन! साधुवाद!
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

श्‍यामल सुमन
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आपकी सकारात्मक टिप्पणी हेतु हार्दिक धन्यवाद निरंकुश जी

श्‍यामल सुमन
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हार्दिक धन्यवाद अशोक जी

Ramesh Sachdeva
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बहूत खूब.
जिसकी खातिर हम लिखते हैं
वे कहते कि गम लिखते हैं|

श्‍यामल सुमन
Guest

हार्दिक धन्यवाद रमेश जी

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