लेखक परिचय

स्मिता

स्मिता

भागलपुर विश्‍वविद्यालय से वनस्‍पतिशास्‍त्र में स्‍नातक एवं पत्रकारिता में स्‍नातकोत्तर डिप्‍लोमा की डि्ग्रियां हासिल की। पेशे से पत्रकार स्मिता का शौक संवेदनाओं, भावों, विचारों को कहानी, लेख व कविता के माध्‍यम से अभिव्‍यक्‍त करना है। स्मिता की एक पुस्‍तक प्रकाशनाधीन है। फिलहाल वे एक उपन्‍यास पर भी काम कर रही हैं।

Posted On by &filed under कविता.


दौर नया है युग नया है

हानि-लाभ की जुगत में

चारों ओर मची है आपाधापी

मां शारदे मुझे सिखाती

तर्जनी पर गिनती का स्‍वर न काफी

भारत की थाती का ज्ञान न काफी

सिर्फ अपना गुणगान न काफी

मां शारदे मुझे सिखाती

नवसृजन की भाषा सीखो

मानव मुक्ति का ककहरा सीखो

भव बंधन के बीच चलना सीखो

मां शारदे मुझे सिखाती

हर घर में ज्ञान का दीप जलाओ

गरीबी से मुक्ति का पाठ पढाओ

नवसृजन का संकल्‍प घर-घर पहुंचाओ

मां शारदे मुझे सिखाती

– स्मिता

Leave a Reply

2 Comments on "मां शारदे मुझे सिखाती"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
समीर लाल
Guest

उम्दा रचना!!

नमन माँ शारदे का!

रावेंद्रकुमार रवि
Guest

बहुत सुंदर!

“सरस्वती माता का सबको वरदान मिले,
वासंती फूलों-सा सबका मन आज खिले!
खिलकर सब मुस्काएँ, सब सबके मन भाएँ!”


क्यों हम सब पूजा करते हैं, सरस्वती माता की?
लगी झूमने खेतों में, कोहरे में भोर हुई!

संपादक : सरस पायस

wpDiscuz