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-रामबिहारी सिंह

मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को एक बार फिर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से अभयदान मिल गया है। गत दिवस भोपाल में आयोजित भाजपा कार्यकर्ता गौरव दिवस के उपलक्ष्य में सम्मिलित हुए पार्टी आला कमान ने सिर्फ शिवराज के कार्यों की एक स्वर में सराहना की, बल्कि प्रदेश में होने वाले आगामी (2013 में) विधानसभा चुनाव के साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भी प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंप दी। यहीं नहीं केंद्रीय नेतृत्व शिवराज के कार्यकाल को अद्वितीय बताते हुए आगामी चुनावों में रिकार्ड तोड जीत के साथ आगे भी मुख्यमंत्री बने रहने का अभयदान देते हुए जिम्मेदारी भी बढा दी।

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अध्यक्ष नितिन गडकरी, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली, महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार ने राजधानी भोपाल में कार्यकर्ता गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर यह जिम्मेदारी सौंप कर न सिर्फ चौहान के मुख्यमंत्री पद पर आगे बने रहने के अटकलों पर विराम लगा दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि आगे आने वाले चुनाव भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में ही होंगे।

कहना न होगा कि पिछले कुछ महीनों से मध्यप्रदेश में कांग्रेस के एकछत्र रा य को उखाड फेंकने वाली महिला भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की भाजपा में वापसी के कयास के बाद प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में मचने वाली छलबली पर भी पूर्ण विराम लग गया है। उधर प्रभात झा के नये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने पर भी राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्यमंत्री पद से विदाई की बातें होती रहीं। इसको उस समय और बल मिला जब पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से मुलाकात कर पार्टी में वापसी के लिए समय मांगा था। इस सबके बाद प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने भी भाजपा कार्यकर्ता गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश का जननायक बताकर अपनी तरफ से स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह भी पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व की राह पर मुख्यमंत्री के साथ हैं। कार्यकर्ता गौरव दिवस पर एकत्र हुए भाजपा नेताओं ने जिस अंदाज से मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और उनमें ऊर्जा का नया संचार किया उससे अब यह साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कद और बढ गया है। और केंद्रीय नेतृत्व में उनकी छवि और निखरकर सामने आई है।

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को जिस तरह से प्रदेश में धरातल पर उतारने के साथ ही प्रदेश की जनता को भय और भूख से मुक्ति दिलाने की पहल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पीठ थपथपाई और भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्य राष्ट्रवाद की स्थापना के लिए सुशासन, विकास की नई जिम्मेदारी सौंपकर हल पल उनके संग केंद्रीय नेतृत्व के साथ खडे रहने का विश्वास दिलाया उससे यही प्रतीत होता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने का अभयदान दे दिया है। उधर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ ही अन्य भाजपा नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अनंत कुमार, राजनाथ सिंह के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने कार्यकर्ता दिवस पर जिस तरह से न सिर्फ प्रशंसा में पुल बांधे बल्कि प्रदेश को विकास के राह पर नये आयाम स्थापित के लिए तेजी से आगे बढते रा य की संज्ञा देकर एक तरह से पार्टी कार्यकर्ताओं को भी यह संदेश दे दिया कि इस मामले में केंद्रीय नेतृत्व का विचार साफ है।

कहना न होगा कि प्रदेश में विगत कुछ माह पूर्व मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने के बाद प्रदेश में भाजपा सरकार कटघरे में घिरती नजर आ रही थी। इस दौरान पार्टी के एक कबीना मंत्री के एक गोलीकांड में फंसे होने के बाद जिस तरह से प्रदेश की भाजपा सरकार पर दबाव बढ रहा था। इसके चलते मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में मुख्यमंत्री पर चारों तरफ से हमले हो रहे थे। चाहे रतलाम में भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक हो या फिर राजधानी भोपाल में, हर जगह यही केंद्रीय नेतृत्व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को टोकने से नहीं चूकते थे। हालांकि भाजपा कार्यकर्ता गौरव दिवस पर वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शिवराज सिंह चौहान को निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने को लेकर सख्ती दिखाने की केंद्रीय नेतृत्व की बात दोहराई थी, किन्तु बाद में वह भी मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रदेश की जनता के प्रति शिवराज की निष्ठा देखकर उनकी प्रशंसा करने से अपने आप को नहीं रोक सके।

कार्यकारिणी की रतलाम में हुई बैठक में महामंत्री व प्रदेश प्रभारी अनंत कुमार ने केंद्रीय नेतृत्व की मंशा को दृष्टिगत रखते हुए यहां तक कहा था कि प्रदेश के कई मंत्री भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने यह कहकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी कटघरे में खडा कर दिया था कि जो भी मंत्री भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर करने में कोई संकोच न करें और बाहर का रास्ता दिखाएं। इसके बाद तो प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई थी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर यहां तक दबाव बनने लगा था कि केंद्रीय नेतृत्व ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्हें फ्री हैंड दे दिया है। इसकी परिणति तब और मजबूत हो गई जब पूर्व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा के बेलागांव गोलीकांड में नाम आने के बाद उनका इस्तीफा लिए जाने के लिए चौतरफा दबाव झेल रही प्रदेश सरकार कुछ भी नहीं कर पा रही थी, किन्तु रतलाम में कार्यकारिणी की बैठक के बाद महामंत्री व मध्यप्रदेश प्रभारी अनंत कुमार की चेतावनी के बाद प्रदेश सरकार और संगठन पर दबाव इतना बढ गया कि फिर मंत्री अनूप मिश्रा को रातोंरात इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया गया। और सुबह तक प्रदेश में चारों तरफ यह खबर फैल गई कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। इसके सबके चलते मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की क्या दिशा और दशा थी वर्तमान माहौल देखकर ही तय किया जा सकता था। इसके बाद फिर भोपाल में हुई कार्यकारिणी की बैठक में भी अनंत कुमार ने अपनी बात दोहराते हुए कहा था कि प्रदेश के कुछ मंत्री शराब में लीन रहते हैं उन्हें विभाग और प्रदेश की जनता की चिंता नहीं है। चिकित्सा मंत्री अनूप मिश्रा का इस्तीफा होने के बाद भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर संकट के बादल यहीं छटते नजर नहीं आ रहे थे इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती की वापसी का मसला भी उन्हें सताता रहा। इस दौरान उमा की वापसी का मामला इतना बढ गया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस समय हर दिन दिल्ली दौरा करने पर मजबूर थे। इसकी पुष्टि तब और स्पष्ट हो गई जब उन्होंने इसी केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह कहकर न सिर्फ भाजपा हाईकमान को चौका दिया, बल्कि यह भी साफ हो गया कि अब प्रदेश भाजपा में उमा भारती की वापसी असंभव तो नहीं किन्तु मुश्किल जरूर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस दौरान अपनों से ही इस तरह से ही घिर गए थे कि उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह चेतावनी तक दे डाली थी कि यदि उमा की वापसी हुई तो वह इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इतनी हिम्मत नहीं जुटा सका कि वह उमा भारती की पार्टी में वापसी पर हाल में कोई निर्णय कर पाता। और उसे किसी तरह उमा की वापसी का अध्याय कुछ दिनों के लिए बंद करना पडा था।

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