लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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कभी कभी कुछ शब्द,

सोने नहीं देते……

जब तक उन्हे किसी

कविता का आकार न दे दूँ।

 

कभी कभी कोई धुन,

सोने नहीं देती…..

जब तक उसमे शब्द पिरोकर,

गीत का कोई रूप न दे दूँ।

 

कभी कभी कोई विचार

सोने नहीं देते…..

जब तक विचारों को संजोकर

आलेख का आकार न दे दूँ।

 

कभी कोई किरदार

सोने नहीं देता…….

जब तक उसके चरित्र पर

कहानी को आकार न दे दूँ।

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