लेखक परिचय

अरविन्‍द विद्रोही

अरविन्‍द विद्रोही

एक सामाजिक कार्यकर्ता--अरविंद विद्रोही गोरखपुर में जन्म, वर्तमान में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में निवास है। छात्र जीवन में छात्र नेता रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक हैं। डेलीन्यूज एक्टिविस्ट समेत इंटरनेट पर लेखन कार्य किया है तथा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा लगाया है। अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 1, अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 2 तथा आह शहीदों के नाम से तीन पुस्तकें प्रकाशित। ये तीनों पुस्तकें बाराबंकी के सभी विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मुफ्त वितरित की गई हैं।

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अरविन्द विद्रोही

जनेश्वर मिश्र समाजवादी आन्दोलन के एक योद्धा व विचारक के रूप में सदैव याद किये जायेंगे | ५ अगस्त ,१९३३ को श्रीमती बासमती एवं श्री रंजीत मिश्र के पुत्र रूप में बलिया जनपद के शुभ नाथहि गाँव में जन्मे जनेश्वर मिश्र पर तत्कालीन ब्रितानिया हुकूमत के खिलाफ चल रहे जन संघर्ष का गहरा असर पड़ा | हिंदुस्तान प्रजातान्त्रिक समाजवादी संघ ने समाजवाद की अवधारणा को भारत भूमि के युवा मष्तिष्क में जगह बना दी थी | शचीन्द्र नाथ सान्याल , चन्द्र शेखर आजाद , भगत सिंह , राज गुरु , सुख देव सहित तमाम क्रांतिकारियो के आजादी के लिए संघर्ष ,समाज के प्रति सोच व बलिदान ने भारत के जन मानस को आक्रोशित कर रखा था | इस क्रांति की बेला में ब्रितानिया हुकूमत के अन्याय के खिलाफ चल रहे संघर्ष के दौर में जन्म लेने वाले जनेश्वर मिश्र के व्यक्तित्व में अन्याय , अत्याचार , शोषण , छुआ -छुत , भेद-भाव व पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष कूट कूट के भरा था |

लोक नायक जय प्रकाश नारायण , डॉ राम मनोहर लोहिया के व्यक्तित्व का गहरा प्रभाव विद्यार्थी जीवन में जनेश्वर मिश्र पर पड़ा | जय प्रकाश नारायण के सर्वोदय आन्दोलन में चले जाने के बाद जब लोहिया ने समाजवादी आन्दोलन व संघर्ष की कमान संभाली तब से जनेश्वर मिश्र पूरी तरह से डॉ लोहिया के ही साथ हो लिए | डॉ लोहिया के निजी सचिव की जिम्मेदारी के साथ साथ जनेश्वर मिश्र ने १९६१ में समाजवादी युव जन सभा के महामंत्री पड़ की जिम्मेदारी भी संभाली | १९६२ में फूल पुर लोक सभा के चुनाव में जवाहर लाल नेहरु के मुकाबिल डॉ लोहिया के चुनाव संचालन की जिम्मेदारी जनेश्वर मिश्र ने ही संभाली थी | इस चुनाव में जनेश्वर मिश्र के रण नीतिक कौसल के कारण डॉ लोहिया ने ४५ बुथो पर नेहरु को परास्त किया यद्यपि यह चुनाव डॉ लोहिया हार गये | इस चुनाव के कारण १९६३ में डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट के तहत जनेश्वर मिश्र को नज़र बंद किया गया | डॉ राम मनोहर लोहिया के अनुयायी के रूप में जनेश्वर मिश्र इतने मशहूर हो गये कि १९६९ में फूल पुर लोक सभा के उप चुनाव में फूल पुर के लोगो ने नारा दिया — लोहिया को तो जीता ना सके , छोटे लोहिया को जिताएंगे | इस प्रकार जनेश्वर मिश्र को छोटे लोहिया की उपाधि से विभूषित करने का श्रेय फूल पुर की सम्मानित जनता को जाता है | यह वह दौर था जब समाजवादी युव जन सभा के नेता के तौर पर जनेश्वर मिश्र का दबदबा कायम हो चुका था | उत्तर भारत के युवाओ के आकर्षण के केंद्र बिंदु बन चुके जनेश्वर मिश्र के संघर्ष व विचारो के प्रति समर्पण के कारण ही समाजवादी पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया ने कहा था ,– समता , समानता , अहिंसा , लोक तंत्र और समाज वाद यह पांचो भारत की समग्र राजनीति के अंतिम लक्ष्य है | इन्हें जनेश्वर जैसे वैचारिक प्रतिबद्धता वाले संकल्प के धनी युवा ही सत्याग्रह के रास्ते पर चल कर प्राप्त कर सकते है | जनेश्वर में संगठन की अकूत छमता है | वह विश्वसनिये और जुझारू है , समाजवाद की लड़ाई के लिए ऐसे नौजवानो को आगे आना जरुरी है | उसके मन में ताकत के बल पर शोषक बने लोगो के प्रति क्रोध और गरीबो , पीडितो , कमजोरो के लिए अथाह करुना है | उसमे प्रतिभा है और दबे-कुचले वर्ग की बेहतरी के लिए बड़ा काम करने की सदिच्छा भी , ये दोनों बाते विरले लोगो में मिलती है | छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने डॉ लोहिया के एक एक शब्द को , अपने ऊपर किये गये हर विश्वास को ता ज़िदगी बखूबी जिया व पूरा किया |

समाजवादी आन्दोलन के योद्धा जनेश्वर मिश्र का महती योगदान वैचारिक दृढ़ता के रूप में हमारे सामने है | डॉ लोहिया के विचारो को आत्मसात किये छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने तमाम युवाओ को समाजवादी संघर्ष व विचार से जोड़ा तथा राजनीतिक सक्रियता प्रदान की | डॉ लोहिया के विचारो के लिए संघर्ष करने वाले लोक बंधु राज नारायण को भी जनेश्वर मिश्र अपना नेता मानते थे | प्रखर वक्ता जनेश्वर मिश्र उर्फ़ छोटे लोहिया को समाजवाद की चलती फिरती पाठ शाला बताते हुये समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि आज से लगभग ४३ वर्ष पूर्व मैं जनेश्वर मिश्र जी के संपर्क में आया था तब से जब तक वो सशरीर रहे , एक शिक्षक व अभिभावक की तरह हमारा मार्ग दर्शन करते रहे | उनका दिल्ली का राजेंद्र प्रसाद मार्ग स्थित ८ न ० का बंगला लोहिया के लोग समाजवादी नेताओ, कार्य -कर्ताओ का केंद्र बिंदु था | स्मृतियो में खोते हुये राजेंद्र चौधरी ने बताया की छोटे लोहिया का भवन मार्ग दर्शन प्राप्त करने का , आशीर्वाद प्राप्ति का , अपनी बात बेबाकी से कहने का , मदद प्राप्ति का और भर पुर भोजन करने का स्थल था | समाजवादी विचारो के संगम छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र ने ११ सितेम्बर, २००५ को कहा था ,– समाजवाद महज़ सियासी लफ्ज़ नहीं है, इसे किसी भी समाज का संपूर्ण आधार माना गया है | उप भोक्ता वादी संस्कृति युवा वर्ग को वैचारिक रूप से पतन की ओर ले जाती है | इससे निकट भविष्य में ऐसा संकट पैदा होगा जिससे पार पाना आसान नहीं होगा |… आज के हालात में छोटे लोहिया की यह चिंता वैश्विक चिंता बन चुकी है |

२८ अगस्त, २००९ को आगरा के लोहिया नगर में छोटे लोहिया ने कहा था , — समाजवादियो को देश की तकदीर बदलनी है तो भारी बलिदानों के लिए तैयार रहना होगा | समाजवादियो को राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस चलानी चाहिए | सिर्फ नेताओ के भाषण सुन लेने भर से सामाजिक – आर्थिक परिवर्तन की राजनीति नहीं गरमाएगी | जनता भूख की मार सहते- सहते सो गयी है | जनता को जगाने की जरुरत है | यह काम समाजवादियो को ही करना है | भेदभाव के बारे में सोचोगे तो दिमाग गरम हो जायेगा , तब गरीब की लड़ाई लड़ सकोगे |….. छोटे लोहिया स्वयं विभिन्न जन संघर्षो में लगभग ११ साल जेल में रहे है | कर्त्तव्य के प्रति लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की तरह दृढ़ता दिखाते हुये राम कोला कांड में नैनी जेल में हिरासत में रखे गये छोटे लोहिया ने पत्नी की मृत्यु पर राज्य पाल द्वारा जमानत पर रिहाई करने की बात कहने पर साफ़ मना कर दिया था | उन्होंने कहा कि सभी आन्दोलन कारियो कि रिहाई होने पर ही वे जेल से निकलेंगे और अंतत यही हुआ |

जनेश्वर मिश्र कार्यकर्ताओ और साथियो को सम्मान देने में तनिक भी कंजूसी नहीं करते थे | छोटे लोहिया का स्पष्ट कहना था कि मुद्दे जन संपर्क व संघर्ष से बनते है | वे चिंतित रहते थे कि अब समाजवादी जन संघर्ष से अलग हो रहे है तथा मेरी मृत्यु के बाद मेरे भवन में रह रहे कार्यकर्ताओ का क्या होगा ? छोटे लोहिया आज हमारे मध्य नहीं है, उनके विचार व संघर्ष समाजवादी विचारो पर चिंतन करने वालो, राजनीति करने वालो के लिए सदैव प्रेरक रहेंगे | आज समाजवादी विचारो के सभी लोगो को , डॉ लोहिया के लोगो को गरीब- गुरबा की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरुरत है |

राजनीतिक पटल पर १९९२ में मुलायम सिंह यादव द्वारा लखनऊ के हज़रत महल पार्क में डॉ लोहिया के विचारो की पार्टी का गठन किये जाने के पीछे छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का संपूर्ण निर्देश व आशीर्वाद था | डॉ राम मनोहर लोहिया के विचारो के वाहक छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र आजीवन समाजवादी पार्टी के और मुलायम सिंह यादव के मार्गदर्शक रहे | मुलायम सिंह यादव ने उनके देहावसान के बाद कहा था ,—- डॉ लोहिया और राजनारायण जी के बताये आदर्शो को जनेश्वर जी आगे बढ़ाने में लगे हुये थे | लोहिया और राजनारायण के विचार , उन्ही की सादगी , उन्ही का संघर्ष और उन्ही के बताये रास्ते पर जनेश्वर जी चल रहे थे | जो गरीब है , पिछड़े है , मजदूर है , किसान है , उनके प्रति जो ना इंसाफी हो रही है, गरीबी – अमीरी की खाई बढ़ रही है , उसे पड़ने का संकल्प जनेश्वर जी ने लिया था | अब जनेश्वर जी नहीं है | पहले डॉ राम मनोहर लोहिया जी और राज नारायण जी और फिर जनेश्वर जी हम लोगो को संभाले हुये थे | दिशा निर्देश देते थे , राय देते थे | उनका अभाव बहुत खलेगा | जनेश्वर जी के सपनो , विचारो और उनके संकल्पों को ले कर हम लोग आगे चलेंगे | १९ जनवरी,२०१० को समाजवादी पार्टी के इलाहाबाद में आयोजित धरने में जनेश्वर मिश्र छोटे लोहिया ने आशा भरी आवाज़ में कहा था —- शायद मेरी मौत के बाद समाजवादी आन्दोलन और तेज हो जाये | २२ जनवरी, २०१० को ही छोटे लोहिया नहीं रहे | छोटे लोहिया के देहावसान के बाद उनकी अंतिम इच्छा कि समाजवादी आन्दोलन तेज हो को पूरा करने कि जिम्मेदारी समाजवादी कार्यकर्ताओ की है | समाजवादी आन्दोलन के बूते समाजवादी राज्य की स्थापना जनता के मुद्दों पर संघर्ष खड़ा करके , जन विश्वास अर्जित करके ही किया जा सकता है | जोड़-तोड़ , दल -बदल, सिधान्त हीन गठ बंधन का सहारा लेने की अपेक्षा समर्पित संघर्ष के साथियो को राजनीति में अवसर दिया जाना वक्त की मांग है और समाजवादी पुरोधाओ भगत सिंह, आचार्य नरेन्द्र देव , लोक नायक जय प्रकाश नारायण , डॉ राम मनोहर लोहिया , राज नारायण , राम सेवक यादव , मधु लिमये , जनेश्वर मिश्र के संकल्पों , सपनो के क्रियान्वयन की दिशा में उथया गया सकारात्मक कदम रूपी सच्ची श्रद्धांजलि और समर्पण है

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